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Flipkart में छंटनी! 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, IPO से पहले कंपनी का बड़ा फैसला

Layoffs in Flipkart: वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने करीब 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। यह फैसला 6-7 मार्च को हुए सालाना परफॉर्मेंस रिव्यू के बाद लिया गया। इस छंटनी का असर कंपनी के करीब 1.5 प्रतिशत वर्कफोर्स पर पड़ा है। फिलहाल फ्लिपकार्ट में लगभग 20,000 कर्मचारी काम करते हैं।

इन विभागों में हुई छंटनी

कंपनी ने इंजीनियरिंग, ऑपरेशंस और मार्केटिंग समेत कई विभागों में कर्मचारियों की छंटनी की है। बताया जा रहा है कि यह कदम कंपनी के सालाना परफॉर्मेंस मैनेजमेंट प्रोसेस का हिस्सा है, जिसमें कम प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने के लिए कहा जाता है।

पहले भी हो चुकी है बड़ी छंटनी

यह पहली बार नहीं है जब फ्लिपकार्ट ने कर्मचारियों की छंटनी की है। साल 2024 की शुरुआत में भी कंपनी ने अपने परफॉर्मेंस रिव्यू के दौरान करीब 1000 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया था। उस समय यह कंपनी के कुल वर्कफोर्स का लगभग 5 प्रतिशत था।

पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी कंपनियों की तरह फ्लिपकार्ट भी अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और खर्च कम करने पर फोकस कर रही है।

IPO की तैयारी में जुटी कंपनी

यह छंटनी ऐसे समय में हुई है जब फ्लिपकार्ट भारत में अपना IPO लाने की तैयारी कर रही है। कंपनी ने गोल्डमैन सैक्स, मॉर्गन स्टेनली, जेपी मॉर्गन और कोटक महिंद्रा कैपिटल जैसे इन्वेस्टमेंट बैंकों से बातचीत शुरू की है। हालांकि यह प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है।

IPO से पहले कंपनी लागत कम करने और कामकाज को ज्यादा प्रभावी बनाने पर ध्यान दे रही है।

घाटा और बदलाव भी बने वजह

कंपनी सिंगापुर से अपना मुख्यालय भारत में शिफ्ट करने की प्रक्रिया में भी है, जिसके चलते सीनियर लीडरशिप में बदलाव किए जा रहे हैं। वहीं वित्त वर्ष 2025 में फ्लिपकार्ट का रेवेन्यू करीब 14 प्रतिशत बढ़ा जरूर है, लेकिन कंपनी अभी भी घाटे में चल रही है।

प्रेमी की गिरफ्तारी से नाराज प्रेमिका मोबाइल टावर पर चढ़ी, रिहाई की मांग

Bihar News: प्यार में इंसान क्या-क्या कर सकता है, इसका अनोखा नजारा शुक्रवार सुबह बिहार के गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र के बनकटा जागीरदारी गांव में देखने को मिला। यहां एक युवती अपने प्रेमी की रिहाई की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गई। अचानक हुई इस घटना से पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।

प्रेम प्रसंग से शुरू हुआ पूरा मामला

जानकारी के मुताबिक बनकटा मल गांव निवासी संजय गोंड की बेटी अर्पिता कुमारी का गांव के ही पवन चौहान के साथ लंबे समय से प्रेम संबंध था। बताया जा रहा है कि गुरुवार रात अर्पिता अचानक घर से गायब हो गई। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन जब उसका पता नहीं चला तो उन्होंने पवन चौहान पर अपहरण का शक जताते हुए पुलिस में शिकायत कर दी।

पुलिस ने प्रेमी को हिरासत में लिया

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पवन चौहान को हिरासत में लेकर थाने पहुंचा दिया। उधर शुक्रवार सुबह ग्रामीणों ने देखा कि अर्पिता गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ी हुई है और नीचे उतरने से साफ इनकार कर रही है।

शादी और रिहाई की रखी मांग

टावर पर बैठी युवती लगातार यही मांग कर रही थी कि पुलिस उसके प्रेमी को रिहा करे और दोनों की शादी कराई जाए। काफी देर तक वह टावर की ऊंचाई पर बैठी रही, जिससे आसपास के लोगों में चिंता और हलचल बढ़ गई।

पुलिस को टावर के नीचे लाना पड़ा प्रेमी

सूचना मिलते ही भोरे थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और युवती को समझाने की कोशिश शुरू की। लेकिन जब वह नीचे उतरने को तैयार नहीं हुई तो पुलिस ने हिरासत में लिए गए पवन चौहान को हथकड़ी लगी हालत में ही जीप से टावर के पास लाकर खड़ा कर दिया, ताकि युवती को नीचे उतरने के लिए मनाया जा सके।

घंटों चला समझाने का प्रयास

खबर लिखे जाने तक पुलिस और स्थानीय ग्रामीण युवती को सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश कर रहे थे। यह पूरा घटनाक्रम इलाके में चर्चा का विषय बन गया है और बड़ी संख्या में लोग मौके पर जमा हो गए।

पुलिस बोली- पहले सुरक्षा, फिर कानूनी कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि युवती को सुरक्षित नीचे उतारना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इसके बाद दोनों पक्षों को समझाकर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।

ईरान पर हमले का नाम ‘दहाड़ता शेर’ क्यों?, बाइबिल और यहूदी इतिहास में छिपा है इसका राज

Iran and Israel war: 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस ऑपरेशन का नाम ‘रोरिंग लायन’ यानी दहाड़ता शेर रखा। वहीं इजरायली सेना ने इसे ‘शील्ड ऑफ जुडाह’ कहा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई को ‘एपिक फ्यूरी’ नाम दिया। इससे पहले जून 2025 में इजरायल ने ईरान पर हुए हमले को ‘राइजिंग लायन’ कहा था।

आखिर शेर पर इतना जोर क्यों?

कई लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि इजरायल अपने सैन्य अभियानों के नाम में बार-बार शेर का जिक्र क्यों करता है। इसका जवाब यहूदी धर्म और बाइबिल की परंपराओं में छिपा है।
यहूदी संस्कृति में शेर को ताकत, बहादुरी और ईश्वर की शक्ति का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से शेर का प्रतीक इजरायल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान में गहराई से जुड़ा हुआ है।

मध्य पूर्व में भी होते थे शेर

आज शेर ज्यादातर अफ्रीका में पाए जाते हैं, लेकिन इतिहास बताता है कि कभी मध्य पूर्व और भारत में भी शेर बड़ी संख्या में रहते थे।
पुरातत्व के अनुसार 9500 ईसा पूर्व से लेकर कांस्य और लौह युग तक पवित्र भूमि यानी आज के इजरायल, फिलिस्तीन और जॉर्डन के इलाके में एशियाई शेर मौजूद थे। जॉर्डन नदी की घाटी में शेरों की अच्छी खासी संख्या थी। बाद में क्रूसेड युद्धों के समय इनका लगभग सफाया हो गया।

बाइबिल में 150 से ज्यादा बार शेर का जिक्र

हिब्रू बाइबिल, जिसे ईसाई धर्म में ओल्ड टेस्टामेंट कहा जाता है, उसमें शेर का जिक्र 150 से ज्यादा बार मिलता है। कई जगह यह वास्तविक जानवर के रूप में आता है, तो कई जगह प्रतीक के तौर पर।
बाइबिल में शेर ताकत, गति और आक्रामकता का प्रतीक माना गया है। कई धार्मिक संदर्भों में ईश्वर की तुलना भी शेर से की जाती है, जो अपने लोगों की रक्षा करता है।

शेर का बच्चा’ और यहूदा की कहानी

बाइबिल में यहूदा, याकूब के 12 बेटों में से एक था। मरते समय याकूब ने यहूदा को अपना प्रमुख उत्तराधिकारी घोषित किया।
बाद में इसी वंश से यहूदा का राज्य बना। ‘ज्यूडिया’ और ‘यहूदी’ शब्द भी इसी नाम से निकले। समय के साथ शेर का प्रतीक यहूदा और पूरे यहूदी समुदाय की पहचान बन गया।

सैमसन और शेर की मशहूर कहानी

बाइबिल में सैमसन नाम का एक योद्धा भी मिलता है, जिसे अलौकिक ताकत वाला माना जाता था। कहानी के अनुसार एक बार अंगूर के बाग में जाते समय उस पर एक शेर ने हमला कर दिया।
सैमसन ने अपनी ताकत से उस शेर को नंगे हाथों से मार दिया। यह घटना उसकी बहादुरी का पहला बड़ा प्रमाण मानी जाती है। प्राचीन कथाओं में नायक का शेर से लड़ना शक्ति का प्रतीक माना जाता था।

राजा डेविड और ‘यहूदा का शेर’

राजा डेविड भी यहूदा के वंश से थे। कहा जाता है कि उन्होंने बचपन में ही शेर और भालू का सामना किया था। बाद में वही इजरायल के राजा बने और यरूशलेम को राजधानी बनाया। डेविड को अक्सर ‘यहूदा का शेर’ कहा जाता है। यह प्रतीक उनके साहस, ताकत और ईश्वर से मिलने वाली शक्ति को दर्शाता है।

आज भी इजरायल की पहचान में शामिल है शेर

इसी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की वजह से शेर आज भी इजरायल की सांस्कृतिक और सैन्य पहचान का अहम हिस्सा बना हुआ है। इसलिए इजरायल अपने कई सैन्य अभियानों के नाम में शेर के प्रतीक का इस्तेमाल करता है।

आगे और बढ़ सकते हैं गैस सिलेंडर के दाम, मिडिल ईस्ट तनाव का असर?

LPG Cylinder Price hike: तेल कंपनियों ने रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। करीब एक साल बाद 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। इस बार घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपये महंगा हो गया है। वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर नए रेट अपडेट कर दिए गए हैं और ये तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

होर्मुज मार्ग बंद होने से बढ़ी चिंता

भारत अपनी गैस सप्लाई का करीब 80 से 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते लाता है। ऐसे में इस मार्ग के बंद होने की खबरों ने ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अचानक हुई कीमत बढ़ोतरी को सरकार की एहतियाती तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है, ताकि गैस का पर्याप्त भंडार बना रहे।

गैस रिजर्व को लेकर भी चर्चा

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि भारत के पास LPG का रिजर्व करीब 12 दिनों का ही बचा है। इसके बाद सरकार ने तेल कंपनियों को निर्देश दिया है कि गैस उत्पादन को अधिकतम किया जाए, ताकि सप्लाई में कोई बाधा न आए। देश में फिलहाल करीब 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं।

इस बीच कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध लंबा चलता है तो दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा सकता है। उनका कहना है कि कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। अगर ऐसा हुआ तो गैस की कीमतों में भी आगे और बढ़ोतरी हो सकती है।

दिल्ली से चेन्नई तक बढ़े दाम

नई कीमतों के बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गया है। कोलकाता में इसकी कीमत 879 रुपये से बढ़कर 939 रुपये पहुंच गई है। चेन्नई में यह 868.50 रुपये से बढ़कर 928.50 रुपये हो गया है।

कमर्शियल सिलेंडर भी हुआ महंगा

19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत भी 115 रुपये बढ़ा दी गई है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 1883 रुपये हो गई है, जबकि मुंबई में यह 1835 रुपये हो गई है। कोलकाता में कमर्शियल सिलेंडर 1875.50 रुपये से बढ़कर 1990 रुपये पहुंच गया है। चेन्नई में इसकी कीमत अब 2043.50 रुपये हो गई है। कमर्शियल गैस महंगी होने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस पर पड़ सकता है।

आमतौर पर LPG सिलेंडर की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को बदली जाती हैं, लेकिन इस बार 7 मार्च को ही दाम बढ़ा दिए गए। माना जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और गैस सप्लाई पर असर की आशंका के कारण यह फैसला लिया गया है।

क्या आपको भी अचानक कुछ खास खाने का क्यों करता है मन? जानें फूड क्रेविंग सिर्फ भूख नहीं होती

Food craving: अक्सर हमें लगता है कि अगर किसी खास चीज को खाने का मन कर रहा है तो इसका मतलब भूख लगी है। लेकिन मनोविज्ञान के मुताबिक ऐसा हमेशा नहीं होता। कई बार अचानक किसी खास खाने की इच्छा हमारे दिमाग, भावनाओं और मानसिक स्थिति से जुड़ी होती है। तनाव, अकेलापन, पुरानी आदतें और यादें भी तय करती हैं कि हमें क्या खाने का मन करेगा।

दिमाग देता है ये संकेत

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि फूड क्रेविंग दरअसल दिमाग का एक तरह का सिग्नल होता है। जब हम तनाव, उदासी या भावनात्मक दबाव महसूस करते हैं, तो दिमाग ऐसे खाने की ओर खींचता है जो तुरंत सुकून या संतुष्टि दे सके।

कुरकुरी चीजें खाने का मन क्यों करता है

अगर आपको बार-बार चिप्स, नमकीन या दूसरी कुरकुरी चीजें खाने की इच्छा होती है, तो यह दबे हुए तनाव या गुस्से का संकेत हो सकता है। कुरकुरी चीजों को चबाने से शरीर में जमा तनाव थोड़ा कम महसूस हो सकता है।

तीखा खाने वाले लोग कैसे होते हैं

जो लोग बहुत ज्यादा मसालेदार या तीखा खाना पसंद करते हैं, वे अक्सर नई चीजें अनुभव करने वाले और रोमांच पसंद होते हैं। मनोविज्ञान के अनुसार तीखा खाना दिमाग में उत्साह और उत्तेजना का एहसास बढ़ाता है।

गर्म खाना देता है सुकून

जब कोई व्यक्ति उदास या अकेला महसूस करता है तो उसे सूप, चाय या घर का गर्म खाना खाने का मन करता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गर्म खाना हमारे दिमाग में सुरक्षा, देखभाल और आराम की भावना से जुड़ा होता है।

मोबाइल देखते हुए खाना क्यों बढ़ा देता है भूख

अगर आप टीवी देखते हुए या मोबाइल चलाते हुए खाना खाते हैं, तो दिमाग उस खाने को ठीक से याद नहीं रख पाता। इसकी वजह से थोड़ी देर बाद फिर से भूख जैसा महसूस होने लगता है।

उदासी में मीठा क्यों अच्छा लगता है

जब व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर या उदास महसूस करता है, तो मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है। चीनी शरीर में सेरोटोनिन नाम का ‘फील-गुड’ हार्मोन थोड़े समय के लिए बढ़ा देती है, जिससे मन हल्का महसूस होता है।

प्लेट का खाना खत्म करने की आदत कहां से आती है

कई लोग पेट भर जाने के बाद भी प्लेट का सारा खाना खत्म करते हैं। यह आदत अक्सर बचपन की सीख से जुड़ी होती है, जैसे ‘खाना बर्बाद नहीं करना चाहिए’ या कभी भोजन की कमी का अनुभव।

नाश्ता छोड़ने से बढ़ सकती है ओवरईटिंग

जो लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, उनमें दिन के बाद के समय में ज्यादा अस्वस्थ खाने की आदत देखने को मिलती है। इससे ओवरईटिंग यानी जरूरत से ज्यादा खाने का खतरा भी बढ़ जाता है।

कम्फर्ट फूड का रिश्ता यादों से

कई बार हमारी पसंदीदा ‘कम्फर्ट फूड’ का स्वाद से ज्यादा संबंध हमारी यादों से होता है। बचपन में खाया गया कोई खास खाना हमें खुशी और सुरक्षा की पुरानी याद दिलाता है।

बार-बार एक ही चीज खाने की आदत

कुछ लोग लंबे समय तक एक ही तरह का खाना बार-बार खाते रहते हैं। मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि तनाव भरे समय में यह आदत व्यक्ति को नियंत्रण और स्थिरता का एहसास देती है।

धीरे-धीरे खाना खाने के फायदे

जो लोग धीरे-धीरे खाना खाते हैं, वे अक्सर अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पाते हैं। इससे चिंता कम होती है और शरीर को समय पर पेट भरने का संकेत भी मिल जाता है।

हर समय कुछ खाने का मन क्यों करता है

अगर किसी व्यक्ति को लगातार कुछ न कुछ खाने का मन करता रहता है, तो यह हमेशा भूख नहीं होती। कई बार यह मानसिक थकान, तनाव या भावनात्मक खालीपन का संकेत भी हो सकता है।

अमेरिका की मांग को ईरान ने किया खारिज, राष्ट्रपति मसूद बोले- ‘आत्मसमर्पण सिर्फ सपना’

Iran and Israel War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने को कहा गया था। उन्होंने साफ कहा कि ऐसी उम्मीद रखना सिर्फ एक सपना है और यह कभी पूरा नहीं होगा। राज्य टीवी पर प्रसारित अपने संदेश में उन्होंने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

पड़ोसी देशों पर हमलों को लेकर जताया खेद

अपने बयान में राष्ट्रपति पेजेशकियन ने खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों पर हुए हमलों को लेकर खेद भी जताया। उन्होंने कहा कि हाल में हुए कुछ हमले गलतफहमी की वजह से हुए थे और तेहरान भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की कोशिश करेगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर पड़ोसी देशों की जमीन से ईरान पर हमला किया गया तो जवाब देना जरूरी होगा। ईरानी मीडिया के मुताबिक इस फैसले को ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने मंजूरी दी है।

बहरीन, सऊदी और UAE पर हमलों से बढ़ा तनाव

ईरान की ओर से यह बयान ऐसे समय आया है जब शनिवार सुबह बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर हमलों की खबरें सामने आईं। इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।

पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति से की बातचीत

इसी बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन से फोन पर बात की। बातचीत के दौरान पुतिन ने क्षेत्र में जारी संघर्ष को तुरंत रोकने और शांति की दिशा में कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े विवादों का समाधान सैन्य कार्रवाई से नहीं बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत से होना चाहिए।

अमेरिका ने दी बड़े हमले की चेतावनी

दूसरी ओर अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में दावा किया कि ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद ईरान के मिसाइल लॉन्चर और मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्रियों को निशाना बनाना होगा।

अरब लीग की आपात बैठक कल

ईरान के हमलों के मुद्दे पर अरब लीग के विदेश मंत्री रविवार को आपात बैठक करने जा रहे हैं। इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति और अरब देशों पर हुए हमलों को लेकर चर्चा होगी। बताया जा रहा है कि यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए होगी।

कई अरब देशों ने की बैठक की मांग

जानकारी के मुताबिक इस आपात बैठक की मांग सऊदी अरब, कुवैत, कतर, ओमान, जॉर्डन और मिस्र ने मिलकर की है। इन देशों का कहना है कि क्षेत्र में तेजी से बढ़ते सैन्य तनाव को देखते हुए तुरंत सामूहिक रणनीति बनाना जरूरी हो गया है।

पश्चिम एशिया में तेजी से बदल रहे हालात

पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद अब तक ईरान इस्राइल समेत पश्चिम एशिया के करीब 13 देशों को निशाना बना चुका है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ बढ़ते टकराव के कारण पूरे क्षेत्र पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।

LPG सिलेंडर हुआ महंगा! घरेलू गैस 60 रुपये और कमर्शियल 115 रुपये महंगा

LPG Gas Price Hike: तेल कंपनियों ने रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर के दाम करीब एक साल बाद बढ़ाए गए हैं। इसमें 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। वहीं 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी 115 रुपये बढ़ा दिए गए हैं। इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर नए रेट अपडेट कर दिए गए हैं और ये तुरंत प्रभाव से लागू हो गए हैं।

इन शहरों में कितना हो गया नया रेट

नई कीमतों के बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गया है। कोलकाता में इसकी कीमत 879 रुपये से बढ़कर 939 रुपये पहुंच गई है। वहीं चेन्नई में यह 868.50 रुपये से बढ़कर 928.50 रुपये हो गया है।

कमर्शियल गैस सिलेंडर की बात करें तो दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर अब 1883 रुपये का हो गया है, जबकि मुंबई में इसकी कीमत 1835 रुपये हो चुकी है। कोलकाता में यह 1875.50 रुपये से बढ़कर 1990 रुपये और चेन्नई में 1929 रुपये से बढ़कर 2043.50 रुपये हो गया है।

होटल और रेस्टोरेंट पर पड़ेगा असर

कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस पर पड़ सकता है। गैस महंगी होने से खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

मिडिल ईस्ट तनाव से जुड़ा मामला?

आमतौर पर LPG सिलेंडर के दाम हर महीने की पहली तारीख को बदले जाते हैं, लेकिन इस बार 7 मार्च को ही कीमत बढ़ाने का फैसला किया गया है। इसके पीछे मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है और होर्मुज जलडमरूमध्य भी बंद है। इसी रास्ते से भारत करीब 80 से 90 फीसदी गैस आयात करता है। ऐसे में अचानक कीमत बढ़ाने को सरकार की एहतियाती रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत के पास कितना गैस स्टॉक बचा है

कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि भारत के पास LPG का स्टॉक लगभग 12 दिनों का ही बचा हुआ है। इसी वजह से सरकार ने तेल कंपनियों को गैस का उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि सप्लाई में किसी तरह की परेशानी न आए। देश में करीब 33.2 करोड़ सक्रिय LPG उपभोक्ता हैं।

क्या आगे और बढ़ सकते हैं दाम?

कतर के ऊर्जा मंत्री साअद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि अगर युद्ध लंबा चला तो दुनिया में बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। अगर ऐसा हुआ तो गैस की सप्लाई और प्रभावित हो सकती है और आने वाले समय में LPG के दाम और बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

बरेली SSP ने विग पहनकर किया सपना चौधरी के गाने पर डांस, VIDEO वायरल

UP News: UP के बरेली में इस बार होली के बाद पुलिस लाइन में ऐसा रंगीन और मजेदार माहौल देखने को मिला कि लोग हंसी नहीं रोक पाए। पुलिसकर्मियों और अधिकारियों ने जमकर होली खेली और ढोल-नगाड़ों के साथ गानों की धुन पर खूब डांस किया। इस दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) IPS अनुराग आर्य का एक Video सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

विग पहनकर सपना चौधरी के गाने पर डांस

वायरल वीडियो में SSP अनुराग आर्य सिर पर विग लगाकर हरियाणवी डांसर सपना चौधरी के मशहूर गाने “मेरी आख्या का काजल” पर मस्ती में डांस करते नजर आ रहे हैं। उनका यह अंदाज देखकर वहां मौजूद पुलिसकर्मी और अधिकारी भी तालियां बजाते और हंसते दिखाई दिए। जैसे ही उन्होंने डांस शुरू किया, पूरा माहौल तालियों और हूटिंग से गूंज उठा।

ढोल-नगाड़ों के साथ मनाया गया जश्न

होली के बाद बरेली पुलिस लाइन में सुबह से ही जश्न का माहौल बन गया था। थानों, चौकियों और पुलिस लाइन से पुलिसकर्मियों की टोलियां ढोल-नगाड़ों के साथ निकलीं। सभी ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं। कुछ समय के लिए पद और जिम्मेदारियों की औपचारिकता भी पीछे छूट गई और हर कोई रंग और संगीत में डूबा नजर आया।

वरिष्ठ अधिकारियों के घर पहुंची पुलिसकर्मियों की टोलियां

होली मिलन कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों की टोलियां एडीजी रमित शर्मा, कमिश्नर भूपेंद्र एस चौधरी, डीआईजी अजय साहनी, डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य के आवासों तक पहुंचीं। ढोल की थाप और गानों के साथ सभी ने अधिकारियों को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी।

फिल्मी अंदाज में हुआ अधिकारियों का स्वागत

जब पुलिसकर्मी डीआईजी अजय साहनी के आवास पहुंचे तो उन्होंने बाहर आते ही उनका फिल्मी अंदाज में स्वागत किया। पुलिसकर्मियों ने “बहारों फूल बरसाओ, मेरा महबूब आया है” जैसे गाने गाकर माहौल को और भी खुशनुमा बना दिया। इसके बाद यह टोली कमिश्नर और एडीजी के आवास भी पहुंची, जहां पुराने और लोकप्रिय गानों पर माहौल पूरी तरह रंगीन हो गया।

महिला अधिकारियों ने भी दिखाया डांस का जलवा

इस जश्न में महिला अधिकारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने पंजाबी गाने “लंदन ठुमकदा” पर डांस किया। उनका यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।

CO ने सिर पर पानी का गिलास रखकर किया डांस

होली के इस कार्यक्रम में एक और दिलचस्प पल तब देखने को मिला, जब फरीदपुर के सीओ संदीप सिंह ने अपने सिर पर पानी से भरा गिलास रखकर डांस किया। उन्होंने फिल्म “एनिमल” के गाने पर गिलास का संतुलन बनाए रखते हुए डांस किया। उनका यह अंदाज देखकर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए और जमकर तालियां बजाईं।

क्या सच में भारत के पास सिर्फ 20–25 दिन का बचा है तेल? जानिए देश के तेल भंडार की असली तस्वीर

Iran-Israel War: दुनिया में कहीं भी युद्ध या बड़ा तनाव शुरू होते ही एक सवाल बार-बार सुनने को मिलता है, क्या भारत के पास सिर्फ 20–25 दिनों का तेल बचा है? क्या अगर सप्लाई रुक गई तो गाड़ियां सड़कों पर खड़ी हो जाएंगी?
असल में भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए ऐसी चिंता उठना स्वाभाविक है। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी ऊर्जा सुरक्षा को काफी मजबूत कर लिया है, जिससे अचानक तेल खत्म होने जैसी स्थिति बनने की संभावना बेहद कम हो गई है।

असल में कितना है तेल का भंडार

3 मार्च 2026 को सरकारी सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में बताया गया कि भारत के पास करीब 25 दिनों का कच्चा तेल रिजर्व मौजूद है। इसके अलावा पेट्रोल, डीजल और दूसरे रिफाइंड ईंधनों का भी लगभग 25 दिन का अतिरिक्त स्टॉक है।
यानी कुल मिलाकर देश के पास लगभग 50 दिनों तक अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की क्षमता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका के बीच यह जानकारी सामने आई थी।

संसद में क्या बोले पेट्रोलियम मंत्री

फरवरी 2026 में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया था कि स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व और कमर्शियल स्टॉक को मिलाकर भारत के पास करीब 74 दिनों की तेल जरूरतों को पूरा करने की क्षमता है।
ये आंकड़े पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मानकों के आधार पर तय किए जाते हैं।

कमर्शियल स्टॉक भी है मजबूत

एनालिसिस फर्म केप्लर के अनुमान के मुताबिक भारत के पास करीब 100 मिलियन बैरल कमर्शियल क्रूड स्टॉक मौजूद है। देश की रोजाना करीब 5 मिलियन बैरल खपत को देखते हुए यह भंडार लगभग 40 से 45 दिनों तक चल सकता है।

कहां-कहां से आता है भारत का तेल

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी तेल खरीद की रणनीति बदल दी है। अब देश सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है बल्कि कई अलग-अलग क्षेत्रों से तेल खरीद रहा है। इसे ऑयल बास्केट डाइवर्सिफिकेशन कहा जाता है।

रूस बना सबसे बड़ा सप्लायर

फरवरी 2026 तक रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। भारत के कुल आयात का लगभग 35 से 38 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता है। 2025 में भारत रोजाना करीब 1.40 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद रहा था।

इराक और सऊदी अरब भी बड़े साझेदार

इराक भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 18 से 20 प्रतिशत है। वहीं सऊदी अरब की हिस्सेदारी करीब 13 से 15 प्रतिशत के आसपास है। इन देशों के साथ लंबे समय के तेल आपूर्ति समझौते भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हैं।

अमेरिका और नए देश भी बने सप्लायर

पिछले कुछ सालों में अमेरिका भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। फरवरी 2026 तक इसकी हिस्सेदारी करीब 8 से 10 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से भी भारत तेल खरीद बढ़ा रहा है।

जमीन के नीचे छिपा तेल का बड़ा भंडार

आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तैयार किया है। इसमें जमीन के नीचे विशाल गुफाओं में लाखों टन कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में करीब 1.33 मिलियन मीट्रिक टन, कर्नाटक के मंगलुरु में लगभग 1.5 मिलियन मीट्रिक टन और पाडुर में करीब 2.5 मिलियन मीट्रिक टन तेल स्टोर करने की क्षमता है।

अब बनेंगे और बड़े भंडारण केंद्र

सरकार इस परियोजना के दूसरे चरण पर भी काम कर रही है। इसके तहत ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पाडुर में नए भंडारण केंद्र बनाए जाने की योजना है। इसका मकसद यही है कि वैश्विक सप्लाई में बाधा आने पर भी देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो।

भविष्य के लिए क्या है भारत की रणनीति

भारत धीरे-धीरे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय कर चुकी है।
इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है और ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

डर से ज्यादा मजबूत है व्यवस्था

कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत के पास तेल खत्म होने का खतरा उतना बड़ा नहीं है जितना अक्सर चर्चा में दिखाया जाता है। मजबूत भंडार, कई देशों से सप्लाई और नई ऊर्जा रणनीतियों की वजह से भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मजबूत बना रहा है।

हिंद महासागर में बदल रहा शक्ति संतुलन, भारत की बढ़ी चिंता

Iran and Israel War: हिंद महासागर में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुआ, जो श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र के दायरे में आता है। इस घटना के बाद भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों की चिंता बढ़ गई है।

श्रीलंका नौसेना ने बचाए 32 ईरानी नाविक

श्रीलंका की नौसेना ने पुष्टि की है कि डूबते जहाज से 32 ईरानी नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि जहाज के कई अन्य चालक दल के सदस्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद श्रीलंका में भी इसको लेकर राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।

श्रीलंका सांसद नमल राजपक्षे ने जताई चिंता

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने इसे गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि भले ही युद्ध कहीं और हो रहा हो, लेकिन इसकी हलचल हिंद महासागर में दिखाई दे रही है, जो श्रीलंका के तट से केवल करीब 40 समुद्री मील दूर है। उनके मुताबिक यह स्थिति श्रीलंका के साथ-साथ भारत के लिए भी चिंता का विषय है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह घटना

भारत के नजरिए से यह मामला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंद महासागर भारत के लिए व्यापार, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति का सबसे बड़ा रास्ता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आयात करता है। ऐसे में अगर इस इलाके में सैन्य तनाव बढ़ता है, तो समुद्री व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

सरकार से जवाब मांग रहे श्रीलंका के सांसद

नमल राजपक्षे ने श्रीलंका सरकार से सवाल किया है कि क्या उसे इस अमेरिकी कार्रवाई की पहले से जानकारी थी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को इसकी जानकारी थी, तो यह बताया जाना चाहिए कि जनता और संसद से इसे क्यों छिपाया गया। वहीं अगर सरकार को कोई जानकारी नहीं थी, तो यह और भी गंभीर बात है कि इतने बड़े सैन्य ऑपरेशन की जानकारी देश को नहीं मिली।

अमेरिका ने पनडुब्बी से किया हमला

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो से हमला किया था। वहीं अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी जनरल डैन केन ने इस कार्रवाई को ऐतिहासिक बताया है।

आपात संदेश के बाद शुरू हुआ बचाव अभियान

श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने बताया कि जहाज की ओर से सुबह आपात संदेश भेजा गया था। इसके बाद बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक युद्धपोत पूरी तरह समुद्र में डूब चुका था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में बदलते शक्ति संतुलन का संकेत भी है। अगर ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं, तो भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा, कूटनीति और ऊर्जा आपूर्ति की रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।