Home Blog Page 9

पेश होगा केंद्रीय बजट, संसदीय इतिहास में पहली बार

Union Budget will Be Presented : देश का केंद्रीय आम बजट इस साल एक खास दिन पर पेश किया जाएगा। पहली बार ऐसा होगा जब केंद्रीय बजट (Union Budget) रविवार के दिन संसद में रखा जाएगा।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इसकी औपचारिक घोषणा की। उनके अनुसार, बजट रविवार, 1 फरवरी को लोकसभा में पेश किया जाएगा। यह फैसला संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ेगा।

निर्मला सीतारमण पेश करेंगी अपना 9वां बजट

इस बार भी केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) संसद में बजट भाषण देंगी। यह उनका लगातार नौवां बजट होगा।

इसके साथ ही वह देश के पूर्व प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के रिकॉर्ड के काफी करीब पहुंच जाएंगी। मोरारजी देसाई ने अपने कार्यकाल में कुल 10 बजट पेश किए थे, जो अब तक का रिकॉर्ड है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण से होगी बजट सत्र की शुरुआत

बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति Draupadi Murmu के अभिभाषण से होगी। वह लोकसभा कक्ष में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी।

राष्ट्रपति के भाषण के बाद वित्त मंत्री संसद के दोनों सदनों में आर्थिक सर्वेक्षण भी पेश कर सकती हैं, जिसमें देश की आर्थिक स्थिति की जानकारी दी जाती है।

दो चरणों में चलेगा बजट सत्र

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू पहले ही बता चुके हैं कि बजट सत्र 28 जनवरी से 2 अप्रैल तक चलेगा। यह सत्र दो हिस्सों में होगा।

पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा। इसके बाद सत्र कुछ समय के लिए स्थगित रहेगा। दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा।

इस तरह, इस साल का बजट सत्र कई मायनों में खास और ऐतिहासिक रहने वाला है।

बूटी मोड़ में अतिक्रमण पर सख्ती, नगर निगम ने चलाया हटाओ अभियान

0

Encroachment Removal Campaign: रांची के बूटी मोड़ इलाके में नगर निगम द्वारा अतिक्रमण हटाने का अभियान लगातार जारी है। यह कार्रवाई खास तौर पर शिवाजी प्रतिमा (Shivaji statue) के आसपास की जा रही है, जहां नगर निगम की जमीन पर कुछ लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा था।

नगर निगम का कहना है कि यह जमीन सार्वजनिक उपयोग के लिए है, इसलिए इसे खाली कराना जरूरी था।

सरकारी जमीन पर बने थे दुकान और मकान

नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, कई लोगों ने सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के दुकानें और मकान बना लिए थे। इनमें से कुछ जगहों पर लंबे समय से व्यापार भी किया जा रहा था।

इससे न केवल सरकारी जमीन पर कब्जा बढ़ता जा रहा था, बल्कि इलाके में अव्यवस्था भी फैल रही थी। स्थानीय लोगों को भी आने-जाने में परेशानी हो रही थी।

पहले दी गई सूचना, फिर हुई कार्रवाई

नगर निगम ने कार्रवाई से पहले अतिक्रमण करने वालों को जगह खाली करने की सूचना दी थी। इसके बाद तय समय सीमा पूरी होने पर अवैध निर्माण हटाने का काम शुरू किया गया।

अभियान के दौरान कच्ची और पक्की दोनों तरह की दुकानों और मकानों को तोड़ा गया। पूरी प्रक्रिया में नगर निगम की टीम मौके पर मौजूद रही।

आगे भी जारी रहेगा अभियान

नगर निगम अधिकारियों (Municipal Officials) ने साफ कहा है कि यह जमीन निगम की है और इसे आम जनता के हित में सुरक्षित रखना जरूरी है।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भविष्य में भी शहर के अन्य इलाकों में ऐसे ही अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाए जाएंगे, ताकि सार्वजनिक जमीन का सही उपयोग हो सके।

यह अभियान शहर को व्यवस्थित और साफ-सुथरा बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

लाखों किसानों का कर्ज माफ, हजारों करोड़ की राशि जारी

Loans of Lakhs of Farmers Waived : राज्य सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए कर्ज माफी योजना (Amnesty Plan) के तहत लाखों किसानों का ऋण माफ कर दिया है।

अब तक प्रदेश के 4 लाख 82 हजार 192 किसानों का कर्ज माफ किया जा चुका है। इस योजना के लिए सभी जिलों में कुल 1826.81 करोड़ रुपये की राशि बांटी गई है। इससे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत होने में मदद मिलेगी।

e-KYC और भुगतान की स्थिति

कर्ज माफी योजना के तहत 5 लाख 1 हजार 528 किसानों का e-KYC पूरा हो चुका है। हालांकि, कुछ तकनीकी और अन्य कारणों से 17,924 किसानों का भुगतान अभी विफल रहा है।

इसके अलावा 1,412 किसानों के ऋण माफी की प्रक्रिया अभी चल रही है। सरकार लगातार इन मामलों को सुलझाने का प्रयास कर रही है ताकि सभी पात्र किसानों को लाभ मिल सके।

छह जिलों को 100 करोड़ से ज्यादा की मदद

राज्य के छह जिलों में किसानों के कर्ज माफी के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है। इनमें

देवघर: 137.54 करोड़ रुपये

पूर्वी सिंहभूम: 106.32 करोड़ रुपये

गढ़वा: 127.44 करोड़ रुपये

हजारीबाग: 110.12 करोड़ रुपये

पलामू: 151.57 करोड़ रुपये

रांची: 109.72 करोड़ रुपये

इन जिलों में बड़ी संख्या में किसानों को सीधा लाभ मिला है।

देवघर में सबसे ज्यादा ई-केवाईसी

e-KYC के मामले में देवघर जिला सबसे आगे है, जहां 36,466 किसानों का e-KYC पूरा हो चुका है। इसके बाद पलामू, रांची, दुमका और हजारीबाग जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में किसानों ने e-KYC कराया है।

कुल मिलाकर, यह योजना झारखंड के किसानों के लिए एक बड़ी मदद साबित हो रही है और आने वाले समय में बाकी बचे किसानों को भी इसका पूरा लाभ मिलने की उम्मीद है।

प्रकृति और युवा शक्ति का संदेश , CM हेमंत सोरेन की शुभकामनाएं

0

Best wishes From CM Hemant Soren: झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren ने राज्यवासियों को प्रकृति और लोक संस्कृति से जुड़े प्रमुख त्योहार सोहराय, टुसू परब और मकर संक्रांति की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।

उन्होंने कहा कि ये पर्व प्रकृति से हमारे गहरे रिश्ते और आपसी मेल-जोल का प्रतीक हैं। मुख्यमंत्री ने कामना की कि ये Celebration सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आएं तथा राज्य के लोग स्वस्थ और प्रसन्न रहें।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि ऐसे लोक पर्व समाज को जोड़ने का काम करते हैं और हमें अपनी परंपराओं को सहेजने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इन त्योहारों के माध्यम से लोगों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और आपसी भाईचारा (Friendly Environment) और मजबूत होगा।

राष्ट्रीय युवा दिवस पर युवाओं को प्रेरणा का संदेश

इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ने Swami Vivekananda को भी याद किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवाओं के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहे हैं।

राष्ट्रीय युवा दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने सभी युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) के विचार आज भी युवाओं को आगे बढ़ने और देश के निर्माण में योगदान देने की सीख देते हैं।

झारखंड BJP को जल्द मिलेगा नया अध्यक्ष, संगठनात्मक चुनाव अंतिम दौर में

0

Jharkhand BJP will soon get a New President : झारखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) में चल रहे संगठनात्मक चुनाव अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गए हैं।

पार्टी के प्रदेश चुनाव अधिकारी Dr. Pradeep Verma ने चुनाव से जुड़ा पूरा कार्यक्रम घोषित कर दिया है।

इस घोषणा के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि झारखंड BJP की कमान किस नेता को सौंपी जाएगी।

पार्टी द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार 13 जनवरी को नामांकन की प्रक्रिया होगी। उसी दिन नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी का काम भी पूरा कर लिया जाएगा।

इसके अगले दिन यानी 14 जनवरी को पार्टी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलेगा और साथ ही राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के नामों की भी घोषणा की जाएगी।

दो दिन में पूरी होगी चुनावी प्रक्रिया

चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 13 जनवरी को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक नामांकन दाखिल किया जाएगा। इसके बाद 2 बजे से 3 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच होगी और शाम 3 बजे से 5 बजे तक नाम वापस लेने का समय तय किया गया है।

14 जनवरी को औपचारिक रूप से नए प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के नाम घोषित कर दिए जाएंगे।

इस पूरी चुनाव प्रक्रिया में केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव को चुनाव अधिकारी बनाया गया है, जबकि Dr. Pradeep Verma प्रदेश चुनाव अधिकारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

अब देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड BJP का अगला नेतृत्व किसे मिलता है।

रेल हादसे की बड़ी साजिश नाकाम, समय रहते बची यात्रियों की जान

0

Big Conspiracy to Cause Train Tccident Fails : पाकुड़ जिले में एक बड़ी आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) को समय रहते नाकाम कर दिया गया।

हावड़ा रेलवे डिवीजन (Howrah Railway Division) के अंतर्गत आने वाले रामपुरहाट–गुमानी रेलखंड पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुंचाया था।

यह घटना कोटालपोखर और तिलभीट्टा रेलवे स्टेशनों के बीच Down Route पर हुई, जहां करीब आधा दर्जन कंक्रीट स्लीपर क्षतिग्रस्त पाए गए।

समय पर कार्रवाई से टला बड़ा रेल हादसा

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यदि यह तोड़फोड़ समय पर सामने नहीं आती, तो एक बड़ा रेल हादसा हो सकता था।

इससे न केवल यात्रियों की जान को खतरा होता, बल्कि रेलवे को भी भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता। ट्रैक पर स्लीपर के टूटने से ट्रेन के पटरी से उतरने की आशंका बनी हुई थी।

सूचना मिलते ही मचा हड़कंप

घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल और गवर्नमेंट रेलवे पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे।

अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और क्षतिग्रस्त स्लीपरों को देखा। इसके साथ ही स्थानीय रेलवे स्टाफ और आसपास मौजूद लोगों से भी पूछताछ की गई।

GRP में दर्ज हुई शिकायत

इस मामले में रेलवे के Senior Section Engineer उज्जवल कुमार ने जीआरपी थाने में लिखित शिकायत दी है। शिकायत के आधार पर जीआरपी ने अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ कांड संख्या 1/2026 दर्ज कर लिया है।

जांच में जुटी पुलिस और आरपीएफ

फिलहाल पुलिस और आरपीएफ की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस तोड़फोड़ के पीछे कौन लोग शामिल हैं और उनका मकसद क्या था।

रेलवे प्रशासन ने भी ट्रैक की सुरक्षा और निगरानी को और कड़ा करने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

तीन साल से ठप मानवाधिकार आयोग, 3 हजार के करीब मामले लंबित

0

Human Rights Commission stalled for Three Years: झारखंड में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए बनाई गई संवैधानिक संस्था झारखंड राज्य मानवाधिकार आयोग (Jharkhand State Human Rights Commission) पिछले तीन वर्षों से लगभग निष्क्रिय पड़ी हुई है।

वर्ष 2023 के बाद से आयोग में न तो अध्यक्ष हैं और न ही सदस्य सचिव।

मौजूदा स्थिति यह है कि आयोग के नाम पर केवल कुछ कर्मचारी काम कर रहे हैं, जबकि निर्णय लेने और सुनवाई करने वाला कोई जिम्मेदार पदाधिकारी मौजूद नहीं है। इसी कारण आयोग के पास इस समय करीब 2,944 मामले लंबित हैं।

न्याय की राह में अटका आयोग

राज्य के अलग-अलग हिस्सों से पुलिस अत्याचार, आदिवासी अधिकारों के उल्लंघन, महिलाओं और बच्चों के साथ अन्याय तथा अन्य मानवाधिकार हनन (Human Rights Abuses) से जुड़ी शिकायतें लगातार आयोग तक पहुंच रही हैं।

लेकिन अध्यक्ष और सदस्यों के अभाव में न तो इन मामलों की नियमित सुनवाई हो पा रही है और न ही सरकार को कोई सिफारिश भेजी जा रही है। अधिकतर शिकायतें सिर्फ दर्ज होकर फाइलों में बंद पड़ी हैं।

इससे पीड़ित (Victim) लोग वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा करने को मजबूर हैं और मानवाधिकार संरक्षण की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

आयोग का अब तक का सफर

Jharkhand State Human Rights Commission का गठन वर्ष 2011 में किया गया था। इसके पहले अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति नारायण राय बने थे, जिनका कार्यकाल पांच वर्ष का रहा।

इसके बाद मणिपुर के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस आर.आर. प्रसाद को नौ महीने के लिए अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

फिर राज्यपाल के प्रधान सचिव रहे एस.के. सतपाठी को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, जिनका कार्यकाल 5 मार्च 2023 तक रहा। इसके बाद से आयोग बिना अध्यक्ष और सदस्य सचिव के ही काम कर रहा है।

आंकड़े खुद बयां कर रहे हैं हालात

आयोग में दर्ज और निपटाए गए मामलों के आंकड़े भी इसकी बदहाली को दिखाते हैं।
2018 में 945 मामले दर्ज हुए, लेकिन केवल 91 का निपटारा हुआ।

2019 में 641 मामलों में से सिर्फ 20 निपटे।
2020 में 717 में से 78,
2021 में 715 में से 252,
और 2022 में 158 में से 112 मामलों का ही निपटारा हो सका।
वहीं 2023, 2024 और 2025 में दर्ज सैकड़ों मामलों का अब तक कोई निपटारा नहीं हो पाया है।

इस स्थिति से साफ है कि यदि जल्द नियुक्तियां नहीं हुईं, तो मानवाधिकारों की रक्षा सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह जाएगी।

बुढ़मू में विवाद, ग्रामीणों ने युवक पर मतांतरण और तनाव फैलाने का लगाया आरोप

0

Dispute in Budhmu: बुढ़मू प्रखंड के मक्का हुटपई (Mecca Hutpai) गांव में उस समय तनाव का माहौल बन गया, जब स्वशासन पड़हा सरकार युवा संगठन के नेता रोहन कुजुर पर ग्रामीणों ने मतांतरण कराने और गांव में नफरत फैलाने का आरोप लगाया।

ग्रामीणों का कहना है कि वह आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहा था। स्थिति बिगड़ती देख ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और बुढ़मू पुलिस को सौंप दिया।

गांव में नफरत फैलाने का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार, रोहन कुजुर योजनाबद्ध तरीके से गांव में आकर लोगों को बांटने का प्रयास कर रहा था।

आरोप है कि उसने गांव में पोस्टर चिपकाए और अपने भाषणों व गतिविधियों से सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। इससे गांव में तनाव की स्थिति बनने लगी और लोग चिंतित हो गए।

ग्रामीणों की सतर्कता से टली बड़ी घटना

हालात गंभीर होते देख मक्का हुटपई के ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र हो गए। आत्मसुरक्षा (Self Protection) के उद्देश्य से उन्होंने रोहन कुजुर को घेर लिया और तुरंत पुलिस को सूचना दी।

बुढ़मू पुलिस मौके पर पहुंची, आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की और पुलिस की मौजूदगी में उसे गांव से बाहर भेज दिया गया।

पहले भी लग चुके हैं आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। इससे पहले ओझासाड़म पंचायत में भी रोहन कुजुर पर इसी तरह के आरोप लग चुके हैं।

वहां भी उस पर “पड़हा सरकार भारत” के नाम पर दो समुदायों में फूट डालने और पाहन के खेत में जबरन धान की कटाई कराकर गांव में तनाव पैदा करने का आरोप लगाया गया था।

ग्राम सभा का सख्त फैसला

इस घटना को गंभीरता से लेते हुए मक्का हुटपई गांव में ग्राम सभा की आपात बैठक बुलाई गई।

बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब बुढ़मू प्रखंड में कोई भी बाहरी व्यक्ति बिना ग्राम सभा की अनुमति के गांव में प्रवेश नहीं कर सकेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला गांव की शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए लिया गया है।

पूर्व विधायक की गतिविधियों से कोयला आपूर्ति बाधित, राज्य में बिजली संकट की आशंका

0

Coal Supply Disrupted: झारखंड के चट्टी बरियातु कोयला क्षेत्र में इन दिनों विधि-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इसका सीधा असर कोयला उत्पादन (Coal Production) और ढुलाई पर पड़ रहा है।

इस क्षेत्र से कोयला लेने वाली NTPC ने हजारीबाग जिला प्रशासन को पत्र लिखकर गंभीर चिंता जताई है।

कंपनी का कहना है कि हालात ऐसे बने हुए हैं कि नॉर्थ कर्णपुरा थर्मल पावर स्टेशन तक कोयले की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है। यदि यह स्थिति बनी रही तो राज्य में बिजली संकट पैदा हो सकता है।

कोयला आपूर्ति रुकने से बिजली पर असर

NTPC के अनुसार, चट्टी बरियातु कोल माइनिंग प्रोजेक्ट से कोयला न मिलने की वजह से North Karanpura Thermal Power Station के संचालन पर खतरा मंडरा रहा है।

बिजली उत्पादन में कमी आने से आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है।

कर्मचारियों और ट्रांसपोर्टरों को डराने का आरोप

NTPC द्वारा लिखे गए पत्र में बताया गया है कि पिछले करीब दस दिनों से परियोजना क्षेत्र में लगातार अशांति बनी हुई है।

आरोप है कि एक पूर्व विधायक अपने समर्थकों के साथ खदान स्थल पर पहुंचकर काम कर रहे कर्मचारियों और Transporters को डराते-धमकाते हैं। धरना-प्रदर्शन और दबाव के कारण खनन और परिवहन का काम ठीक से नहीं हो पा रहा है।

कंपनी का कहना है कि धमकियों के कारण कर्मचारी भय के माहौल में काम कर रहे हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है।

कोयला उत्पादन और ढुलाई रुकने से केवल बिजली ही नहीं, बल्कि राज्य सरकार को मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हो रहा है।

NTPC ने जिला प्रशासन से मांग की है कि चट्टी बरियातु कोल परियोजना क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि काम सामान्य रूप से चल सके।

सड़क पर दीवार बनाकर ढुलाई रोके जाने का मामला

हाल ही में पूर्व विधायक Yogendra Saw द्वारा सड़क पर दीवार खड़ी कर दिए जाने से कोयले की ढुलाई पूरी तरह ठप हो गई थी। जब दीवार हटाने की कोशिश हुई तो वे वहीं कुर्सी लगाकर बैठ गए।

सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और समझाने का प्रयास किया। बात नहीं बनने पर पुलिस ने उन्हें वहां से हटाकर ढुलाई शुरू कराई।

आरोप है कि इसके बाद वे अपनी पत्नी और समर्थकों के साथ तीर-धनुष लेकर खदान परिसर में घुस गए और कर्मचारियों को डराकर उत्पादन कार्य में बाधा डाली। इस पूरे मामले से प्रशासन और कंपनी दोनों की चिंता बढ़ गई है।

हर दिन 350 बच्चे लापता, देश के लिए गंभीर चेतावनी

350 Children Go Missing Every Day : देश में बच्चों के लापता होने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जो समाज और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में भारत में 18 वर्ष से कम उम्र के कुल 1,27,874 बच्चे लापता हुए।

इसका मतलब है कि देश में औसतन हर दिन लगभग 350 बच्चे अपने घरों से गुम हो रहे हैं।

कुछ राहत, लेकिन चिंता अभी बाकी

इन डराने वाले आंकड़ों के बीच राहत की बात यह है कि वर्ष 2022 में 80,561 बच्चों को सकुशल बरामद कर लिया गया। फिर भी, 47,313 बच्चे अब भी लापता हैं।

ये आंकड़े यह बताते हैं कि समस्या केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि हजारों परिवार आज भी अपने बच्चों की राह देख रहे हैं।

संक्षिप्त आंकड़े

कुल लापता बच्चे: 1,27,874

कुल बरामद बच्चे: 80,561

अब भी लापता: 47,313

इन राज्यों में सबसे ज्यादा बच्चे हुए लापता

NCRB के आंकड़ों के अनुसार, कुछ राज्यों में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले चुकी है।

पश्चिम बंगाल पहले स्थान पर है, जहां 19,540 बच्चे लापता हुए।

इसके बाद मध्यप्रदेश (15,087) और बिहार (12,600) का स्थान आता है।

अन्य राज्यों में दिल्ली (1,880), तमिलनाडु (8,876), ओडिशा (7,565), राजस्थान (7,412), उत्तर प्रदेश (5,924), महाराष्ट्र (5,393) और छत्तीसगढ़ (5,210) शामिल हैं।

झारखंड 20वें स्थान पर, फिर भी खतरा बरकरार

झारखंड की बात करें तो राज्य लापता बच्चों के मामलों में देश में 20वें स्थान पर है। यहां से 748 बच्चे लापता हुए, जिनमें से 335 बच्चों को बरामद कर लिया गया है।

हालांकि संख्या अन्य राज्यों से कम है, लेकिन मानव तस्करी का खतरा यहां अब भी गंभीर बना हुआ है।

लड़कियां ज्यादा होती हैं शिकार

विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड के ग्रामीण इलाकों की लड़कियां अक्सर मानव तस्करी, घरेलू काम या झूठे रोजगार के वादों में फंस जाती हैं। कई मामलों में वे यौन शोषण और तस्करी का भी शिकार हो जाती हैं।

इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार और पुलिस द्वारा Operation Smile जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं।

इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि समाज की जागरूकता और परिवारों की सतर्कता के बिना इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल है।