Jharkhand Gas Shortage: खाड़ी देशों में जारी संघर्ष के कारण देश में LPG की कमी का असर अब झारखंड में भी साफ दिखने लगा है। गैस की किल्लत बढ़ने से लोग अब खाना पकाने के वैकल्पिक साधनों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं।
कोडरमा जिले में LPG की कमी के चलते लोग इंडक्शन चूल्हे, लकड़ी, उपले और गौ-काष्ठ जैसे पारंपरिक ईंधनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। स्थानीय दुकानदार मनोज कुमार के अनुसार, पहले जहां महीने में एक-दो Induction चूल्हे बिकते थे, अब रोजाना 20 से 25 ग्राहक खरीदारी के लिए आ रहे हैं।
बढ़ती मांग के कारण बाजार में Induction चूल्हों की आपूर्ति भी प्रभावित हो रही है। दुकानदारों का कहना है कि थोक विक्रेताओं से पर्याप्त माल नहीं मिल पा रहा है, जिससे ग्राहकों को इंतजार करना पड़ रहा है।
Induction चूल्हे को लोग सुरक्षित, किफायती और तेज विकल्प मान रहे हैं। यह कम समय में खाना पकाता है और प्रदूषण भी कम करता है, जिससे इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।
इधर, कोडरमा में गौशाला समिति (Cowshed Committee) द्वारा तैयार किए जा रहे गौ-काष्ठ की मांग भी काफी बढ़ गई है। पहले इसका उपयोग मुख्य रूप से धार्मिक कार्यों में होता था, लेकिन अब लोग इसे LPG के विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। गौ-काष्ठ गोबर, लकड़ी या कोयले के बुरादे से तैयार किया जाता है, जिसे मशीन से आकार देकर सुखाया जाता है।
धनबाद में भी गैस संकट गहराता जा रहा है। यहां गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। झरिया की एक गैस एजेंसी में शनिवार को लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। तेज गर्मी के कारण एक महिला लाइन में ही बेहोश होकर गिर पड़ी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से गैस की आपूर्ति अनियमित है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। इसी वजह से लोग तेजी से इंडक्शन और इंफ्रा चूल्हों की ओर बढ़ रहे हैं।
धनबाद के इलेक्ट्रॉनिक दुकानदारों के अनुसार, पहले जहां महीने में 15 से 20 इंडक्शन चूल्हे बिकते थे, वहीं अब पिछले एक महीने में 150 से अधिक यूनिट की बिक्री हो चुकी है। मांग इतनी बढ़ गई है कि बाजार में स्टॉक की कमी होने लगी है।
दुकानदारों का कहना है कि Solar Cooker का उपयोग अभी भी बहुत कम है और ज्यादातर लोग इंडक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक चूल्हों को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।

