Pakistan Crisis: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब सीधे पाकिस्तान पर दिखने लगा है। ईरान और इज़रायल के बीच तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से पाकिस्तान में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। तेल की किल्लत अब सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रही। आटा-चावल और रोजमर्रा की चीजें भी महंगी होती जा रही हैं। महंगाई बढ़ रही है, कर्ज का बोझ बढ़ रहा है और हालात ऐसे हो गए हैं कि शहबाज़ शरीफ सरकार को कोरोना जैसे प्रतिबंध लागू करने पड़े हैं।
अब पाकिस्तान में रात 8 बजे के बाद बाजार बंद करने का आदेश दिया गया है। आइए पाकिस्तान संकट के 5 बड़े संकेत समझते हैं।
पहला संकट: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण वैश्विक तेल संकट गहराया है। इसका सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान पर पड़ा है।
सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की थी।
- पेट्रोल 458.41 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया
- डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया
जनता के विरोध के बाद सरकार ने राहत दी और पेट्रोल 80 रुपये कम कर 378 रुपये कर दिया। लेकिन इसके बावजूद आम लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुईं।
पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला और महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़ दी।
दूसरा संकट: कर्ज का बढ़ता बोझ
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कर्ज का दबाव लगातार बढ़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष समेत कई देशों से कर्ज लेने के बावजूद हालात सुधर नहीं रहे हैं। अब कर्ज लौटाने का दबाव बढ़ गया है और नया कर्ज देने को भी कोई तैयार नहीं है।
इस बीच संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से इस महीने के अंत तक 3.5 अरब डॉलर लौटाने को कहा है। इससे पाकिस्तान की मुश्किल और बढ़ गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक
- कुल कर्ज: 79,322 अरब पाकिस्तानी रुपये
- घरेलू कर्ज: 55,978 अरब रुपये
- विदेशी कर्ज: 23,344 अरब रुपये
- कुल कर्ज जीडीपी का करीब 70 प्रतिशत
तीसरा संकट: महंगाई की मार
तेल की कीमतों में उछाल का असर खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ा है।
- आटा महंगा
- दाल महंगी
- चावल महंगा
- दूध और ब्रेड महंगे
- खाने का तेल महंगा
पाकिस्तान में महंगाई बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गई है। फरवरी में यह 7 प्रतिशत थी।
इसके अलावा अफगानिस्तान के साथ तनाव के कारण आयात प्रभावित हुआ है, जिससे रोजमर्रा की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।
चौथा संकट: अर्थव्यवस्था पर खतरा
मिडिल ईस्ट युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।
पूर्व वित्त मंत्री हाफिज पाशा ने चेतावनी दी है कि अगर तेल की कीमत 100 डॉलर के पार रहती है, तो पाकिस्तान की जीडीपी पर 1 से 1.5 प्रतिशत तक नकारात्मक असर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि
- पेट्रोलियम आयात से 12 से 14 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है
- अगर तेल 120 डॉलर पार गया तो महंगाई 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है
पांचवां संकट: रात 8 बजे के बाद अंधेरा
तेल और गैस संकट के कारण पाकिस्तान सरकार को सख्त कदम उठाने पड़े हैं।
सरकार ने पहले ही
- सरकारी गाड़ियों में 60 प्रतिशत कटौती
- मंत्रियों और सांसदों की सैलरी में कटौती
- सरकारी खर्च में 20 प्रतिशत कटौती
- वर्चुअल मीटिंग के आदेश
- ऑनलाइन पढ़ाई का निर्देश
अब 7 अप्रैल से देश के ज्यादातर हिस्सों में बाजार और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे बंद करने का आदेश दिया गया है।
इसका मतलब है कि पाकिस्तान अब रात 8 बजे के बाद लगभग अंधेरे में डूब जाएगा।
बढ़ती जा रही है पाकिस्तान की मुश्किल
तेल संकट, महंगाई, कर्ज और आर्थिक दबाव ने पाकिस्तान को मुश्किल हालात में पहुंचा दिया है।
अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जारी रहा, तो पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल पड़ोसी देश में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं और सरकार के सामने बड़ी चुनौती खड़ी है।

