वक्फ मामलों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, धार्मिक और प्रशासनिक भूमिकाएं अलग

Supreme Court’s decision on Waqf matters : सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि वक्फ संस्थाओं में “सज्जादानशीन” और “मुतवल्ली” की भूमिकाएं अलग-अलग होती हैं। अदालत ने कहा कि सज्जादानशीन किसी दरगाह का आध्यात्मिक प्रमुख होता है, जबकि मुतवल्ली की भूमिका केवल प्रशासन और प्रबंधन तक सीमित रहती है।

न्यायमूर्ति MM Sundaresh और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने 2 अप्रैल को दिए अपने विस्तृत फैसले में कहा कि सज्जादानशीन की नियुक्ति एक धार्मिक मामला है। इसके विपरीत, मुतवल्ली का पद आध्यात्मिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक होता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि Waqf Act, 1995 के तहत सज्जादानशीन, जरूरत पड़ने पर मुतवल्ली का कार्य भी संभाल सकता है। लेकिन मुतवल्ली को सज्जादानशीन की भूमिका निभाने का अधिकार नहीं है।

पीठ ने कहा कि सज्जादानशीन का पद अक्सर परंपरा और वंशानुगत आधार पर तय होता है। मूल संस्थापक अपने उत्तराधिकारी को नामित कर सकता है, और आगे यह परंपरा जारी रहती है। अधिकांश मामलों में यह पद परिवार के भीतर ही चलता है।

Supreme Court ने यह भी माना कि किसी व्यक्ति को मुतवल्ली पद से हटाने का असर उसके अन्य अधिकारों या सज्जादानशीन के रूप में उसकी स्थिति पर नहीं पड़ता।

इस मामले में अदालत ने यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि सज्जादानशीन के पद से जुड़े विवादों की सुनवाई सिविल कोर्ट कर सकता है। कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि ऐसे मामलों का फैसला केवल वक्फ बोर्ड कर सकता है।

यह विवाद कर्नाटक के चन्नापटना स्थित एक दरगाह के सज्जादानशीन पद को लेकर था, जो लंबे समय से अदालत में लंबित था। Supreme Court ने मामले को फिर से हाईकोर्ट को भेजते हुए निर्देश दिया कि वह इसे गुण-दोष के आधार पर जल्द से जल्द, संभव हो तो 9 महीनों के भीतर निपटाए।

साथ ही, अदालत ने यह भी दोहराया कि मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं में ऐसे पदों का उत्तराधिकार आमतौर पर परंपरा, रिवाज या नामांकन के आधार पर तय होता है, न कि सख्त कानूनी उत्तराधिकार नियमों से।

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img