Ranchi : पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण देश में एलपीजी गैस की कमी का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखने लगा है। इसी को लेकर सोमवार को रांची जिला प्रशासन और झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के बीच एक अहम बैठक हुई। बैठक में पेट्रोलियम मंत्रालय की नई गाइडलाइन की जानकारी दी गई और गैस की कमी से उद्योगों पर पड़ रहे असर पर चर्चा की गई।
बैठक में कई व्यवसायियों ने अपनी परेशानी खुलकर रखी। ब्रेड व्यवसायी दिनेश कुमार ने कहा कि अगर स्थिति ऐसी ही रही तो उन्हें एक सप्ताह के भीतर अपना कारोबार बंद करना पड़ सकता है, क्योंकि गैस की कमी के कारण उत्पादन प्रभावित हो रहा है। करीब दो घंटे तक चली इस बैठक में व्यवसायियों ने घरेलू गैस की किल्लत और एजेंसियों की मनमानी पर नाराजगी जताई। उन्होंने शहर में कालाबाजारी रोकने और गैस सिलेंडर की होम डिलीवरी सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही, लंबी कतारों से राहत दिलाने और जल्द से जल्द घर-घर पीएनजी गैस सुविधा उपलब्ध कराने की अपील की गई।
डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए फिलहाल संकट जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा है। उन्होंने सभी से धैर्य और आपसी सहयोग बनाए रखने की अपील की। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि आगे चलकर पेट्रोल और डीजल की भी कमी हो सकती है, इसलिए वैकल्पिक ईंधन पर ध्यान देना जरूरी है। व्यवसायियों ने सुझाव दिया कि शहर में सीमित मात्रा में कोयला उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग जगहों पर डिपो खोले जाएं। इस पर डीसी ने कहा कि इस प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को जेल भेजा जाएगा। हाल ही में एक मामले में शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई भी की गई है।
डीसी ने कहा कि गैस की कमी का असर उद्योगों पर पड़ रहा है, जिससे बेरोजगारी बढ़ सकती है और इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा। इस दौरान एमएसएमई के सहायक निदेशक गौरव कुमार ने बताया कि केंद्र सरकार हालात पर नजर रखे हुए है और जल्द ही व्यवसायियों की मदद के लिए टोल-फ्री नंबर और ईमेल सुविधा शुरू की जाएगी। झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आदित्य मलहोत्रा ने जिला प्रशासन की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि वैश्विक हालात को देखते हुए इस समय धैर्य और बेहतर समन्वय ही सबसे जरूरी है।

