Ranchi : राज्य में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और लोकभवन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। एक बार फिर लोक भवन ने नियुक्ति से जुड़ी फाइल सरकार को वापस कर दी है। इस बार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार होनी चाहिए और जिन उम्मीदवारों के खिलाफ FIR दर्ज है, उनकी नियुक्ति उचित नहीं मानी जा सकती।
इससे पहले भी फाइल लौटाई जा चुकी है। उस समय कहा गया था कि कुछ नाम सूचना आयुक्त बनने की योग्यता पूरी नहीं करते, क्योंकि उनका संबंध राजनीतिक पृष्ठभूमि से है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने वही नाम दोबारा यह कहते हुए भेजे कि सभी उम्मीदवार समाजसेवी हैं और योग्य हैं। सरकार की ओर से जिन नामों की अनुशंसा की गई थी, उनमें अनुज सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक शामिल हैं। इनमें से दो नामों पर आपत्ति जताई गई है, क्योंकि उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है और मामले अदालत में लंबित हैं।
लोकभवन ने स्पष्ट किया है कि आरटीआई एक्ट की धारा 15(6) के अनुसार राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को सूचना आयुक्त नहीं बनाया जा सकता। साथ ही यह भी कहा गया है कि बिना मुख्य सूचना आयुक्त के राज्य सूचना आयोग का गठन संभव नहीं है, जबकि इस पद के लिए कोई नाम नहीं भेजा गया है।
आगे की स्थिति
अब राज्य सरकार नए नामों के साथ प्रस्ताव भेज सकती है। इसके लिए सर्च कमेटी की बैठक बुलानी होगी। सरकार चाहे तो मुख्य सूचना आयुक्त के लिए भी नाम भेज सकती है या कानूनी सलाह के आधार पर पुराने नाम फिर से भेज सकती है। हालांकि, अगर वही नाम दोबारा भेजे जाते हैं, तो तीसरी बार फाइल लौटाना लोक भवन के लिए आसान नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ‘अंजलि भारद्वाज बनाम भारत संघ’ मामले में स्पष्ट किया है कि आयोग में अनुभवी, निष्पक्ष और विविध पृष्ठभूमि वाले लोगों की नियुक्ति होनी चाहिए। कोर्ट ने कहा है कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी और मेरिट आधारित होनी चाहिए। उम्मीदवार का रिकॉर्ड साफ होना चाहिए और वह स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने में सक्षम हो।
अब तक क्या हुआ
25 मार्च को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक हुई थी, जिसमें नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और मंत्री हफीजुल हसन शामिल हुए थे। बैठक में चार नामों पर सहमति बनी और फाइल राज्यपाल को भेजी गई। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने 10 अप्रैल को इस फाइल को वापस कर दिया था और राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले नामों पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद भी मामला सुलझ नहीं सका है।

