HRA in 8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के लिए सुझाव देने की आखिरी तारीख 30 अप्रैल नजदीक आ रही है। आयोग दिल्ली, पुणे जैसे शहरों में बैठकों की तैयारी कर रहा है। इसी बीच NC-JCM (स्टाफ साइड) ने लंबी चर्चा के बाद तैयार किया गया कॉमन मेमोरेंडम आयोग को सौंप दिया है। इस मेमोरेंडम में लेवल-1 कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग की गई है। इसके साथ ही पे-लेवल की संख्या 18 से घटाकर 7 करने का भी प्रस्ताव रखा गया है। इन मांगों के अलावा हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA में भी बड़ी बढ़ोतरी की मांग की गई है।
HRA में आमूलचूल बदलाव की मांग
छोटे शहरों के कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा
नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने सरकार को दिए गए कॉमन मेमोरेंडम में HRA में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर ये मांगें मान ली जाती हैं तो पे-लेवल 1 से लेकर पे-लेवल 18 तक के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल आ सकता है। खास बात यह है कि छोटे शहरों यानी Z श्रेणी में रहने वाले कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की संभावना जताई जा रही है।
अभी कितना मिलता है HRA
DA बढ़ने के साथ बदली थीं दरें
7वें वेतन आयोग के अनुसार जब महंगाई भत्ता 25 प्रतिशत पार हुआ था तब HRA की दरें 24, 16 और 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 27, 18 और 9 प्रतिशत कर दी गई थीं। जब महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है तो HRA की दरें X, Y और Z श्रेणी के शहरों के लिए क्रमशः 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 10 प्रतिशत लागू हो जाती हैं। अभी महंगाई भत्ता 50 प्रतिशत से ऊपर है इसलिए यही दरें लागू हैं।
सरकार ने न्यूनतम HRA भी तय किया हुआ है। न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये के हिसाब से
- X श्रेणी के शहरों के लिए 5,400 रुपये
- Y श्रेणी के शहरों के लिए 3,600 रुपये
- Z श्रेणी के शहरों के लिए 1,800 रुपये तय हैं।
NC-JCM ने क्या नई मांग रखी
किराया बढ़ने का दिया तर्क
NC-JCM का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में घरों का किराया और रहने का खर्च तेजी से बढ़ा है। इसलिए 8वें वेतन आयोग में HRA की दरें बढ़ाई जानी चाहिए।
साथ ही यह भी मांग की गई है कि HRA को सीधे महंगाई भत्ते से जोड़ा जाए ताकि महंगाई बढ़ने पर HRA अपने आप बढ़ जाए।
नई प्रस्तावित दरें इस तरह हैं
- X श्रेणी के शहरों के लिए 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत
- Y श्रेणी के शहरों के लिए 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत
- Z श्रेणी के शहरों के लिए 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत
किस कैटेगरी में कौन-से शहर आते हैं
HRA तय करने के लिए शहरों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है
- X श्रेणी यानी 50 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर
दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, पुणे जैसे बड़े महानगर - Y श्रेणी यानी 5 लाख से 50 लाख आबादी वाले शहर
लखनऊ, जयपुर, पटना, नागपुर, इंदौर, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहर - Z श्रेणी यानी 5 लाख से कम आबादी वाले शहर
देश के बाकी सभी छोटे शहर और ग्रामीण इलाके
छोटे शहरों के कर्मचारियों की सबसे ज्यादा मौज
अगर NC-JCM की मांगें मान ली जाती हैं तो छोटे शहरों में रहने वाले कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। Z श्रेणी के कर्मचारियों को HRA में सीधे 20 प्रतिशत तक का अतिरिक्त फायदा मिल सकता है। यानी दिल्ली, मुंबई, पटना, लखनऊ, इंदौर जैसे बड़े शहरों के कर्मचारियों को तो फायदा होगा ही, लेकिन प्रतिशत के हिसाब से छोटे शहरों में काम करने वाले कर्मचारियों को ज्यादा लाभ मिलने की संभावना है।

