Ranchi : सीएम हेमंत सोरेन ने आगामी जनगणना 2027 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने इस पत्र में आदिवासी समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग ‘पृथक सरना धर्म कोड’ को जनगणना के दूसरे चरण में शामिल करने का आग्रह किया है। सीएम ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह समाज की पहचान और अधिकार से जुड़ा विषय है। सही आंकड़े न होने पर योजनाओं का लाभ भी प्रभावित होता है।
इतिहास का दिया हवाला
उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि आजादी से पहले आदिवासियों की धार्मिक पहचान अलग से दर्ज होती थी, लेकिन स्वतंत्र भारत में यह व्यवस्था खत्म हो गई। सरना धर्म की पूजा पद्धति और प्रकृति आधारित आस्था इसे अन्य धर्मों से अलग बनाती है। सीएम ने कहा कि आज देश डिजिटल रूप से काफी आगे बढ़ चुका है। ऐसे में सरना धर्म के लिए अलग कोड देना पूरी तरह संभव है और इससे आंकड़ों का सही संकलन हो सकेगा।
माननीय प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी को पत्र लिखकर समस्त झारखंडवासियों की ओर से अपने पूर्व के वर्ष 2023 के आग्रह, माननीय झारखंड विधानसभा के संकल्प, आदिवासी समाज की भावना तथा झारखंड राज्य की आकांक्षा को ध्यान में रखते हुए जनगणना के द्वितीय चरण के लिए निर्धारित किए जाने… pic.twitter.com/b4u4olT80u
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) May 3, 2026
विधानसभा के संकल्प का जिक्र
उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड विधानसभा पहले ही सरना धर्म कोड के समर्थन में संकल्प पारित कर चुकी है, जो पूरे राज्य की भावना को दर्शाता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, 2011 की जनगणना में अलग कोड नहीं होने के बावजूद देश के करीब 50 लाख लोगों ने अपने धर्म के रूप में ‘सरना’ दर्ज किया था। यह आदिवासी समाज के अपने धर्म के प्रति गहरे जुड़ाव को दिखाता है।
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