Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) को कड़ा झटका देते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने तथ्यों को छुपाने और गुमराह करने की कोशिश पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोक दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि यह रकम चार हफ्ते के अंदर जमा करनी होगी, जो बाद में याचिकाकर्ता राम प्रकाश साव को दी जाएगी।
“पहले माना, फिर मुकर गए”, कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने JAC के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि JAC ने पहले खुद माना कि मामला पुराने फैसले से कवर होता है, लेकिन बाद में उसी बात से मुकर गया। यह सीधा-सीधा कोर्ट को कमजोर करने और गुमराह करने की कोशिश है।
रिटायरमेंट के पैसे के लिए लड़ाई
दरअसल, यह पूरा मामला एक रिटायर्ड कर्मचारी राम प्रकाश साव के बकाया भुगतान से जुड़ा है। उन्होंने अपने हक के पैसे के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अधूरी जानकारी देकर आदेश लेने की कोशिश
हाईकोर्ट ने पाया कि JAC ने न सिर्फ अपना बयान बदला, बल्कि पहले के खारिज हो चुके मामलों की जानकारी भी कोर्ट से छुपाई। अदालत ने इसे “misadventure” बताते हुए कहा कि यह न्याय प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है।
अदालत का साफ संदेश, कोर्ट को हल्के में मत लो
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कर दिया कि इस तरह की चालाकी अब नहीं चलेगी। न्यायालय के साथ ईमानदारी जरूरी है, वरना ऐसे ही सख्त फैसले सामने आते रहेंगे।

