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कमजोर नेटवर्क की टेंशन खत्म, BSNL ने शुरू की Wi-Fi कॉलिंग सेवा

BSNL Launches Wi-Fi Calling Service : अक्सर घर के अंदर, ऑफिस के केबिन या बेसमेंट में मोबाइल नेटवर्क कमजोर हो जाता है, जिससे Call Drop और आवाज साफ न आने की समस्या बनी रहती है।

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इसी परेशानी को दूर करने के लिए भारतीय संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने देशभर के सभी सर्किलों में Voice over Wi-Fi सेवा को आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया है। इस सेवा को आमतौर पर Wi-Fi कॉलिंग कहा जाता है।

क्या है Wi-Fi कॉलिंग सेवा

Wi-Fi कॉलिंग का मतलब है कि कॉल मोबाइल टावर के सिग्नल से नहीं, बल्कि वाई-फाई नेटवर्क के जरिए कनेक्ट होगी।

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अगर आप BSNL का सिम इस्तेमाल करते हैं और आपके घर या ऑफिस में वाई-फाई कनेक्शन मौजूद है, तो आपका फोन उसी Wi-Fi के सहारे कॉल कर सकेगा। इसके लिए मजबूत मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं होगी।

कहां होगी सबसे ज्यादा मददगार

यह सेवा उन जगहों पर बेहद फायदेमंद साबित होगी, जहां अक्सर नेटवर्क कमजोर रहता है या सिग्नल बार-बार चला जाता है।

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खासतौर पर ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में, जहां Mobile Network की दिक्कत है लेकिन BSNL का Broadband Connection उपलब्ध है, वहां यह सुविधा लोगों के लिए राहत लेकर आएगी। इससे नेटवर्क पर दबाव भी कम होगा और Connectivity बेहतर होगी।

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कॉलिंग क्वालिटी और खर्च

Wi-Fi कॉलिंग के जरिए होने वाली कॉल में आवाज साफ और बेहतर क्वालिटी की होती है। इसके लिए किसी थर्ड पार्टी ऐप जैसे Whatsapp की जरूरत नहीं पड़ती। आप अपने फोन के सामान्य डायलर से ही कॉल कर सकते हैं।

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कॉल आपके मौजूदा मोबाइल नंबर से ही जाएगी और सामने वाले को भी वही नंबर दिखाई देगा। सबसे खास बात यह है कि BSNL इस सेवा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले रहा है, यानी यह पूरी तरह मुफ्त है।

कैसे करें Wi-Fi कॉलिंग शुरू

Wi-Fi कॉलिंग शुरू करने के लिए आपको अपने स्मार्टफोन की सेटिंग में जाना होगा। वहां सिम और नेटवर्क या कनेक्शन से जुड़े विकल्प में जाकर Wi-Fi कॉलिंग को चालू करना होगा। एक बार यह सुविधा ऑन होने के बाद, फोन अपने आप वाई-फाई नेटवर्क के जरिए कॉल करने लगेगा।

इन बातों का रखें ध्यान

Wi-Fi कॉलिंग के दौरान अगर वाई-फाई कनेक्शन बंद हो जाता है या Signal कमजोर पड़ता है, तो कॉल डिस्कनेक्ट हो सकती है।

इसलिए कॉल के समय स्थिर वाई-फाई कनेक्शन जरूरी है। आजकल के ज्यादातर नए Smartphones में यह सुविधा पहले से मौजूद होती है।

कहां लें मदद

अगर Wi-Fi कॉलिंग चालू करने में किसी तरह की परेशानी आती है, तो ग्राहक नजदीकी BSNL सेवा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा BSNL की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-1503 पर भी सहायता ली जा सकती है।

यहां मर्दों की एंट्री नहीं, खामोशी में सुकून ढूंढती औरतों का खास द्वीप

No Entry for Men Here : जरा कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की, जहां शोर-शराबा, दिखावा और दूसरों की नजरों का दबाव अचानक खत्म हो जाए। एक ऐसा द्वीप, जहां किसी को कुछ साबित नहीं करना पड़ता, न कोई भूमिका निभानी होती है।

Finland के तट के पास बसा एक अनोखा द्वीप ठीक इसी सोच को साकार करता है। यहां कोई बड़ा बोर्ड नहीं, कोई ऐलान नहीं, बस एक खामोश समझ है-यहां मर्दों की एंट्री नहीं है।

बाल्टिक सागर के बीच छिपा एक अलग ही संसार

Finland के दक्षिणी तट पर, हेलसिंकी से करीब 100 किलोमीटर दूर बाल्टिक सागर में स्थित SuperShe Island पहली नजर में किसी Film के सीन जैसा लगता है।

Men are not allowed here, a special island for women who find solace in silence.

ठंडा समंदर, चट्टानी किनारे और चारों तरफ फैले घने जंगल इस द्वीप को आम दुनिया से बिल्कुल अलग बना देते हैं। 8.4 एकड़ में फैला यह निजी द्वीप बाहर से भले ही शांत दिखता हो, लेकिन भीतर एक गहरी आज़ादी का एहसास देता है।

मर्दों पर पाबंदी, नफरत नहीं बल्कि सुकून के लिए

SuperShe Island का सबसे बड़ा नियम यही है कि यहां पुरुषों को आने की अनुमति नहीं है। यह फैसला किसी नफरत की भावना से नहीं, बल्कि महिलाओं को पूरी तरह केंद्र में रखने के लिए लिया गया है।

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यहां आने वाली महिलाएं बताती हैं कि बिना किसी दबाव और बिना परखी जाने वाली नजरों के वे खुद को ज्यादा आजाद महसूस करती हैं। बातचीत सहज हो जाती है और खामोशी भी बोझ नहीं, बल्कि राहत लगने लगती है।

कहां से आई इस द्वीप की सोच

इस अनोखे द्वीप की Kalpana Tech Industry की पूर्व सीईओ क्रिस्टीना रोथ ने की थी।

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फिनलैंड की प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित होकर उन्होंने ऐसा स्थान बनाने का सपना देखा, जहां महिलाएं खुद से दोबारा जुड़ सकें। यहां हर चीज दिखावे से दूर और भीतर की शांति के करीब रखी गई है।

सीमित लोग, खुला वक्त और बिना जल्दबाजी की जिंदगी

SuperShe Island पर एक समय में सिर्फ आठ महिलाएं ही ठहर सकती हैं। यहां योग, ध्यान, जंगलों में टहलना, कयाकिंग और पारंपरिक Finnish Aauna जैसी गतिविधियां होती हैं, लेकिन किसी सख्त समय-सारिणी के बिना। खाना स्थानीय और सेहतमंद होता है, जिसे जल्दबाजी नहीं बल्कि इत्मीनान से खाया जाता है।

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पहचान पीछे, इंसान आगे

इस द्वीप पर दुनिया के अलग-अलग कोनों से लेखक, कलाकार, Startup Founder and Professor आती हैं। यहां पहुंचते ही पद, पहचान और प्रोफाइल पीछे छूट जाती है।

SuperShe Island खुद को किसी रिसॉर्ट के रूप में पेश नहीं करता, बल्कि यह एक ऐसी जगह है, जहां महिलाएं खुद की आवाज सुन सकें।

खामोशी की जरूरत भी एक हक

SuperShe Island यह दिखाता है कि आज की भागदौड़ भरी दुनिया में महिलाएं सिर्फ ब्रेक नहीं चाहतीं, बल्कि खामोशी का हक भी मांगती हैं।

यह द्वीप उसी खामोश जरूरत का जवाब बनकर उभरता है, जहां सुकून किसी सुविधा से नहीं, बल्कि आज़ादी से मिलता है।

काला मोतिया, समय रहते पहचानें, एक बार गई नजर वापस नहीं आती

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Take Routine Eye Checkups Seriously : काला मोतिया यानी ग्लूकोमा एक गंभीर आंखों की बीमारी है, जिसमें एक बार अगर नजर चली जाए तो उसे वापस लाना संभव नहीं होता।

इस बीमारी का इलाज अंधेपन को ठीक करने के लिए नहीं, बल्कि आगे होने वाले नुकसान को रोकने के लिए किया जाता है। इसलिए Doctor समय पर जांच और सही डायग्नोसिस को सबसे ज्यादा जरूरी मानते हैं।

आई प्रेशर क्यों है इतना अहम

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डॉक्टरों के मुताबिक, ग्लूकोमा की जांच में Intraocular Pressure यानी आंखों के अंदर का दबाव बेहद अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि हर विजिट पर आई प्रेशर चेक किया जाता है, ताकि बीमारी की स्थिति और इलाज का असर समझा जा सके।

नॉर्मल प्रेशर के बावजूद भी हो सकता है ग्लूकोमा

आमतौर पर आंखों का सामान्य इंट्राओक्यूलर प्रेशर 11 से 21 mmHg के बीच माना जाता है।

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लेकिन यह जरूरी नहीं कि ज्यादा प्रेशर होने पर ही ग्लूकोमा हो। कई मामलों में कम दबाव के बावजूद Optic नर्व को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे नजर धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है।

सिर्फ प्रेशर नहीं, ये जांच भी हैं जरूरी

इसी कारण डॉक्टर सिर्फ आई प्रेशर पर निर्भर नहीं रहते।

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ऑप्टिक नर्व में आए Structural बदलाव, Visual Field में फंक्शनल बदलाव और गोनियोस्कोपी टेस्ट को भी उतनी ही अहमियत दी जाती है। Gonioscopy जांच से यह पता चलता है कि मरीज को किस तरह का ग्लूकोमा है।

सही इलाज के लिए सही डायग्नोसिस जरूरी

ग्लूकोमा का इलाज उसके प्रकार पर निर्भर करता है। इसलिए Intraocular Pressure, Optic नर्व की स्थिति, विजुअल फील्ड टेस्ट और गोनियोस्कोपी—ये चारों मिलकर बीमारी की सही तस्वीर सामने लाते हैं और उसी आधार पर इलाज तय किया जाता है।

40 साल के बाद नियमित जांच क्यों जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि भारत में लोग आंखों की रूटीन जांच को गंभीरता से नहीं लेते। 40 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार आई प्रेशर जरूर चेक करवाना चाहिए।

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खासतौर पर Diabetes के मरीज, जिनके परिवार में ग्लूकोमा की हिस्ट्री रही हो, या जो लंबे समय से स्टेरॉयड दवाएं ले रहे हों, उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव

Experts के मुताबिक, समय पर जांच और नियमित फॉलो-अप ही काला मोतिया से होने वाले स्थायी अंधेपन से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।

शुरुआती स्तर पर पहचान होने पर नजर को बचाया जा सकता है और बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है।

ग्रीस पोल प्रतियोगिता के साथ आनंद मेले का हुआ रंगीन समापन

Anand Mela Concludes with Colourful Celebrations : रांची के जैप वन मैदान में आयोजित चार दिवसीय आनंद मेले का समापन ग्रीस पोल प्रतियोगिता (Greece Pole Contest) के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।

मेले के अंतिम दिन लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। समापन अवसर पर कई रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डीआईजी एस. कार्तिक और SSP राकेश रंजन शामिल हुए। दोनों अतिथियों का स्वागत नेपाल की पारंपरिक ढाका टोपी, अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ देकर किया गया।

ग्रीस पोल देखने उमड़ी भीड़, बच्चों में दिखा खास उत्साह

ग्रीस पोल प्रतियोगिता को देखने के लिए दोपहर से ही जैप वन मैदान में लोगों की भारी भीड़ जुटने लगी थी। जैसे-जैसे प्रतियोगिता शुरू हुई, पोल के चारों ओर दर्शकों की संख्या बढ़ती गई।

सैकड़ों दर्शकों ने तालियां बजाकर प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया। छोटे बच्चे भी खुशी से उछलते-कूदते नजर आए और पूरे मन से प्रतियोगिता का आनंद लेते दिखे।

इस वर्ष प्रतियोगिता में Gorkha Boys, Line Boys और बंदे ग्रुप की तीन टीमों ने हिस्सा लिया। पहले राउंड में सभी टीमों को दो-दो मिनट का समय दिया गया।

दूसरे राउंड में दो-दो खिलाड़ियों को डेढ़ मिनट मिला, जबकि तीसरे राउंड में तीन-तीन खिलाड़ियों को तीस सेकंड में पोल चढ़ने की चुनौती दी गई।

कड़ी टक्कर के बाद गोरखा ब्वॉयज बनी विजेता टीम

ग्रीस लगे पोल पर चढ़ना आसान नहीं था। खिलाड़ी बार-बार फिसलकर नीचे गिरते रहे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दर्शकों की तालियां और उत्साह खिलाड़ियों के लिए हौसले का काम कर रही थीं।

मुकाबले को और रोमांचक बनाने के लिए अंत में समय सीमा 30 से बढ़ाकर 45 सेकंड कर दी गई।

कड़ी मेहनत और टीमवर्क के दम पर गोरखा ब्वॉयज ने प्रतियोगिता में जीत हासिल की।

विजेता टीम को पुरस्कार स्वरूप 25 किलो का बकरा और 10 किलो फल भेंट किए गए। ग्रीस पोल प्रतियोगिता के साथ आनंद मेले का समापन खुशी, रोमांच और यादगार पलों के साथ हुआ।

रामगढ़ में घूस लेते पकड़ा गया डाक ओवरसियर, CBI की बड़ी कार्रवाई

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CBI takes Major Action : केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने झारखंड के रामगढ़ जिले में रिश्वतखोरी के एक मामले में बड़ी कार्रवाई की है। CBI ने रामगढ़ के डाक ओवरसियर प्रभु मुंडा को 15 हजार रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

आरोपी ओवरसियर पर आरोप है कि वह एक ग्रामीण डाक सेवक से रामगढ़ मुख्यालय में योगदान (Joining) कराने के बदले 30 हजार रुपये की रिश्वत मांग रहा था।

ग्रामीण डाक सेवक की शिकायत से खुला मामला

CBI को इस मामले की जानकारी तब मिली, जब पीड़ित ग्रामीण डाक सेवक ने लिखित शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत में बताया गया कि डाक ओवरसियर प्रभु मुंडा उसे रामगढ़ मुख्यालय में योगदान कराने के लिए लगातार 30 हजार रुपये की मांग कर रहा है। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए।

जांच के दौरान दोनों के बीच हुई बातचीत में यह तय हुआ कि पहले 15 हजार रुपये दिए जाएंगे और बाकी 15 हजार रुपये बाद में लिए जाएंगे। इसके बाद CBI ने आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी (joining) दर्ज की और जाल बिछाया।

योजनाबद्ध तरीके से गिरफ्तारी

आठ जनवरी को सीबीआई की टीम ने पूरी योजना के साथ कार्रवाई की। जैसे ही प्रभु मुंडा ने 15 हजार रुपये की रिश्वत ली, सीबीआई ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार (Arrest) कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद CBI की टीम आरोपी को रांची लेकर आई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है।

CBI इस मामले में आगे की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इसमें कोई और व्यक्ति भी शामिल है या नहीं।

455 दिन की देरी पड़ी भारी, झारखंड हाईकोर्ट ने बोकारो के DLAO पर लगाया ₹1 लाख का निजी जुर्माना

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455-Day Delay Proves Costly : झारखंड हाईकोर्ट (Jharkhand High Court) ने राज्य सरकार द्वारा दायर रिव्यू याचिका को खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने इसे गैर-जरूरी बताते हुए कहा कि यह याचिका सिर्फ अदालती कार्रवाई से बचने के लिए दाखिल की गई थी।

इस मामले में बोकारो के जिला भू-अर्जन पदाधिकारी (DLAO) पर ₹1 लाख का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया गया है, जिसे उन्हें अपनी जेब से चुकाना होगा।

455 दिन बाद दाखिल हुई याचिका पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने 455 दिनों की लंबी देरी के बाद यह रिव्यू याचिका दाखिल की।

यह याचिका तब दायर की गई, जब जमीन मालिक की ओर से पुराने आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई थी। अदालत ने साफ कहा कि यह कदम केवल अवमानना से बचने के लिए उठाया गया।

जमीन अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर पुराना विवाद

यह मामला बोकारो जिले के मौजा राधानगर की लगभग 2 एकड़ जमीन से जुड़ा है। यह जमीन वर्ष 1988-89 में सरकार की एक योजना के तहत अनुसूचित जाति के लाभार्थी लखी बाउरी को दी गई थी।

बाद में इस जमीन को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को रेलवे साइडिंग और डिपो बनाने के लिए दे दिया गया, लेकिन जमीन मालिक को मुआवजा नहीं मिला।

BPCL की राशि को लेकर सरकार की दलील खारिज

राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि BPCL द्वारा जमा की गई ₹91.13 लाख की रकम मुआवजा नहीं, बल्कि सलामी और लगान थी, क्योंकि जमीन गैर मजरुआ थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि जब मुआवजे के बराबर राशि जमा हो चुकी है, तो उसे सही मालिक को देना सरकार की जिम्मेदारी है।

समय पर भुगतान नहीं हुआ तो बढ़ सकती है मुश्किल

कोर्ट ने आदेश दिया है कि बोकारो के DLAO को दो सप्ताह के भीतर ₹1 लाख का जुर्माना लखी बाउरी को देना होगा।

यदि तय समय पर भुगतान नहीं किया गया, तो इस मामले की रिपोर्ट संबंधित खंडपीठ को भेजी जाएगी, जिससे अधिकारी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

पटना में बेकाबू थार का तांडव, सड़क किनारे खड़े लोगों को कुचला, गाड़ी फूंकी गई

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Uncontrollable Thar’s rampage in Patna: राजधानी पटना के दानापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत गोला रोड पर बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा (Tragic Road Accident) हो गया।

तेज रफ्तार और अनियंत्रित थार गाड़ी ने सड़क के किनारे खड़े 6 से अधिक लोगों को कुचल दिया। अचानक हुए इस हादसे से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग इधर-उधर भागने लगे।

घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया

हादसे में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने बिना देरी किए सभी घायलों को इलाज के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) पहुंचाया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इस घटना में एक व्यक्ति की मौत भी हुई है, हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

हादसे के बाद चालक फरार, लोगों का फूटा गुस्सा

घटना के तुरंत बाद थार चालक गाड़ी छोड़कर मौके से फरार हो गया। इस बीच खबर फैलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर जुट गए। घायलों की हालत देखकर लोगों में आक्रोश बढ़ता गया।

गुस्साए लोगों ने थार वाहन में आग लगा दी, जिससे कुछ ही मिनटों में गाड़ी धू-धू कर जलने लगी और पूरी तरह जलकर राख हो गई।

दमकल और पुलिस ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही दानापुर थाना की पुलिस और दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक वाहन पूरी तरह जल चुका था।

पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को शांत कराने की कोशिश की और स्थिति को नियंत्रित किया।

जांच में जुटी पुलिस, इलाके में अतिरिक्त बल तैनात

फिलहाल पुलिस थार वाहन के मालिक और फरार चालक की पहचान करने में जुटी हुई है। हालात को देखते हुए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।

पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के खतरों को उजागर करता है।

बिहार में कड़ाके की ठंड और घना कोहरा, जनजीवन पूरी तरह प्रभावित

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Severe Cold and Dense Fog Engulf Bihar : बिहार में इस समय ठंड ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घने कोहरे की वजह से पूरे राज्य में जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।

सुबह के समय सूरज देर से निकल रहा है और शाम को जल्दी ढल जा रहा है। दिन में धूप निकलने के बावजूद उसमें इतनी गर्मी नहीं है कि लोगों को राहत मिल सके।

ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं और अधिकतर लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।

जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में हो रही बर्फबारी (Snowfall) का असर बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे मैदानी राज्यों में साफ तौर पर देखा जा रहा है।

कोहरे की वजह से सड़कों पर थमी रफ्तार

घने कोहरे का असर यातायात पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सुबह के समय सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। कई इलाकों में Visibility बेहद कम हो गई है और 50 मीटर से ज्यादा दूरी तक कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है।

कोहरे के कारण सड़क पर चलने वाले राहगीर और वाहन अचानक नजर नहीं आते, जिससे हादसों का खतरा बढ़ गया है। ऐसे हालात में वाहन चालक बहुत सावधानी से गाड़ी चला रहे हैं।

तापमान में भारी गिरावट, कई जिलों में सर्दी का रिकॉर्ड

मौसम विभाग India Meteorological Department (IMD) के अनुसार राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया है।

शेखपुरा में न्यूनतम तापमान 5.2 डिग्री सेल्सियस, किशनगंज में 5.8 डिग्री और गया जी में 6 डिग्री Celsius Record किया गया है।

वहीं भागलपुर के सबौर में तापमान गिरकर 4.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस मौसम का अब तक का सबसे कम तापमान माना जा रहा है।

ऑरेंज अलर्ट और सर्द हवाओं की चेतावनी

मौसम विभाग ने गुरुवार को बिहार के सभी जिलों के लिए कोल्ड-डे और घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

विभाग का कहना है कि राज्य के कई हिस्सों में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चल सकती हैं।

इससे कनकनी और ठिठुरन और बढ़ेगी। सुबह और शाम के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है।

बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी की सलाह

मौसम विभाग (Meteorological Department) ने लोगों से ठंड से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की अपील की है। खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों और बीमार लोगों को घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है।

गर्म कपड़े पहनने, अलाव का सुरक्षित उपयोग करने और अनावश्यक यात्रा से बचने को कहा गया है। ठंड का यह दौर अभी कुछ दिन और जारी रहने की संभावना है।

पटना AIIMS में 50 लाख के गबन का खुलासा, चीफ कैशियर निलंबित

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Chief Cashier Suspended : पटना स्थित AIIMS Patna से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 50 लाख रुपये के गबन की आशंका जताई गई है।

यह मामला संस्थान के आंतरिक Audit के दौरान उजागर हुआ। ऑडिट में वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ी पाई गई, जिसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।

आंतरिक ऑडिट में सामने आई बड़ी अनियमितता

जानकारी के अनुसार, अकाउंट ऑफिसर पीयूष आनंद द्वारा किए गए आंतरिक Audit के दौरान कैश बुक, भुगतान रजिस्टर, रसीदों और बैंक खातों का मिलान किया गया। इस प्रक्रिया में कई जगहों पर अंतर पाया गया।

शुरुआती जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लेन-देन बिना जरूरी दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति के किए गए थे।

सबसे गंभीर बात यह रही कि लगभग 50 लाख रुपये की राशि का स्पष्ट और संतोषजनक हिसाब ऑडिट टीम को नहीं मिल सका। इसी वजह से गबन की आशंका जताई गई।

चीफ कैशियर पर लगे गंभीर आरोप

ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर एम्स के चीफ कैशियर अनुराग अमन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए AIIMS प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की।

संस्थान की ओर से जारी Press Release में कहा गया कि पहली नजर में ही वित्तीय अनियमितता के ठोस संकेत मिले हैं और इस तरह की लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

तत्काल प्रभाव से निलंबन और विभागीय जांच

मामला सामने आने के बाद एम्स प्रशासन ने चीफ कैशियर अनुराग अमन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

जांच के दौरान संबंधित सभी कर्मचारियों को किसी भी तरह की वित्तीय जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है, ताकि जांच निष्पक्ष रूप से की जा सके।

हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिस राशि के गबन की बात सामने आई है, वह पैसा वापस कर दिया गया है।

भविष्य में सख्ती और मजबूत ऑडिट सिस्टम

एम्स प्रशासन का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसमें सेवा से बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है। जरूरत पड़ने पर मामला पुलिस को भी सौंपा जाएगा।

भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए वित्तीय प्रक्रियाओं को और सख्त किया जाएगा और Audit प्रणाली को मजबूत बनाया जाएगा। फिलहाल जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

UP SIR पर सियासी संग्राम, चुनाव आयोग ने अखिलेश के आरोपों को बताया निराधार

Political Battle over UP SIR : उत्तर प्रदेश में चल रही SIR (विशेष मतदाता सूची संशोधन) प्रक्रिया को लेकर सियासत तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार योगी सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने आरोप लगाया है कि लगभग तीन करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं और यह सब मुख्यमंत्री के इशारे पर किया गया है।

अखिलेश के आरोपों से बढ़ा विवाद

अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के आदेश पर मतदाता सूची (Voter List) में नाम काटे और जोड़े हैं।

उन्होंने मुख्यमंत्री के एक पुराने बयान का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि अगर पहले बेईमानी नहीं हो रही थी, तो अब क्यों हो रही है, या फिर पहले ही सब गलत था।

इस बयान के बाद चुनाव आयोग ने भी कड़ा जवाब दिया। आयोग ने “भेड़िया आया” वाली कहानी का उदाहरण देते हुए कहा कि न पहले कोई बेईमानी हो रही थी और न ही अब हो रही है।

आयोग का कहना है कि ऐसे आरोप बार-बार लगाए जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और है।

ड्राफ्ट सूची और नाम जोड़ने पर सवाल

ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद सामने आया कि लगभग तीन करोड़ नाम सूची से हटाए गए हैं। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पहले चार करोड़ नाम कटने की बात कही थी। बाद में आयोग ने करीब एक करोड़ नाम जल्दबाजी में जोड़ दिए।

समाजवादी पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री के बयान के बाद अचानक एक करोड़ नाम कहां से आ गए।

अखिलेश यादव ने चेतावनी दी कि चुनाव आयोग को अदालत में इन सवालों का जवाब देना पड़ेगा और वहां बच पाना आसान नहीं होगा।

चुनाव आयोग का पक्ष

चुनाव आयोग के CEO ने social media platform x पर सफाई देते हुए लिखा कि आयोग पहले भी सक्रिय था, आज भी है और आगे भी रहेगा।

उन्होंने बताया कि नवंबर के दूसरे सप्ताह में सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठक हुई थी, जिसमें सपा समेत कई दलों ने दो हफ्ते का अतिरिक्त समय देने की मांग की थी।

इसके बाद 12 नवंबर को दिए गए एक इंटरव्यू में CEO ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है, क्योंकि ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 2.97 करोड़ से अधिक नाम हटाए जा रहे थे।

अतिरिक्त समय में क्या हुआ

CEO के अनुसार, इस 15 दिन के अतिरिक्त समय में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों को उन मतदाताओं की सूची दी गई थी, जिनके नाम हटने वाले थे। इस दौरान केवल 8 से 9 लाख लोगों के नाम ही ड्राफ्ट मतदाता सूची में दोबारा जोड़े जा सके।

इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भी गर्माने की संभावना है।