Iran-Israel War: दुनिया में कहीं भी युद्ध या बड़ा तनाव शुरू होते ही एक सवाल बार-बार सुनने को मिलता है, क्या भारत के पास सिर्फ 20–25 दिनों का तेल बचा है? क्या अगर सप्लाई रुक गई तो गाड़ियां सड़कों पर खड़ी हो जाएंगी?
असल में भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए ऐसी चिंता उठना स्वाभाविक है। लेकिन सच्चाई यह है कि भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी ऊर्जा सुरक्षा को काफी मजबूत कर लिया है, जिससे अचानक तेल खत्म होने जैसी स्थिति बनने की संभावना बेहद कम हो गई है।
असल में कितना है तेल का भंडार
3 मार्च 2026 को सरकारी सूत्रों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में बताया गया कि भारत के पास करीब 25 दिनों का कच्चा तेल रिजर्व मौजूद है। इसके अलावा पेट्रोल, डीजल और दूसरे रिफाइंड ईंधनों का भी लगभग 25 दिन का अतिरिक्त स्टॉक है।
यानी कुल मिलाकर देश के पास लगभग 50 दिनों तक अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने की क्षमता है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की आशंका के बीच यह जानकारी सामने आई थी।
संसद में क्या बोले पेट्रोलियम मंत्री
फरवरी 2026 में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया था कि स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व और कमर्शियल स्टॉक को मिलाकर भारत के पास करीब 74 दिनों की तेल जरूरतों को पूरा करने की क्षमता है।
ये आंकड़े पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल और इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के मानकों के आधार पर तय किए जाते हैं।
कमर्शियल स्टॉक भी है मजबूत
एनालिसिस फर्म केप्लर के अनुमान के मुताबिक भारत के पास करीब 100 मिलियन बैरल कमर्शियल क्रूड स्टॉक मौजूद है। देश की रोजाना करीब 5 मिलियन बैरल खपत को देखते हुए यह भंडार लगभग 40 से 45 दिनों तक चल सकता है।
कहां-कहां से आता है भारत का तेल
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी तेल खरीद की रणनीति बदल दी है। अब देश सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भर नहीं है बल्कि कई अलग-अलग क्षेत्रों से तेल खरीद रहा है। इसे ऑयल बास्केट डाइवर्सिफिकेशन कहा जाता है।
रूस बना सबसे बड़ा सप्लायर
फरवरी 2026 तक रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। भारत के कुल आयात का लगभग 35 से 38 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता है। 2025 में भारत रोजाना करीब 1.40 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद रहा था।
इराक और सऊदी अरब भी बड़े साझेदार
इराक भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 18 से 20 प्रतिशत है। वहीं सऊदी अरब की हिस्सेदारी करीब 13 से 15 प्रतिशत के आसपास है। इन देशों के साथ लंबे समय के तेल आपूर्ति समझौते भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करते हैं।
अमेरिका और नए देश भी बने सप्लायर
पिछले कुछ सालों में अमेरिका भी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। फरवरी 2026 तक इसकी हिस्सेदारी करीब 8 से 10 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात, ब्राजील और गुयाना जैसे देशों से भी भारत तेल खरीद बढ़ा रहा है।
जमीन के नीचे छिपा तेल का बड़ा भंडार
आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत ने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तैयार किया है। इसमें जमीन के नीचे विशाल गुफाओं में लाखों टन कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है। आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में करीब 1.33 मिलियन मीट्रिक टन, कर्नाटक के मंगलुरु में लगभग 1.5 मिलियन मीट्रिक टन और पाडुर में करीब 2.5 मिलियन मीट्रिक टन तेल स्टोर करने की क्षमता है।
अब बनेंगे और बड़े भंडारण केंद्र
सरकार इस परियोजना के दूसरे चरण पर भी काम कर रही है। इसके तहत ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पाडुर में नए भंडारण केंद्र बनाए जाने की योजना है। इसका मकसद यही है कि वैश्विक सप्लाई में बाधा आने पर भी देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो।
भविष्य के लिए क्या है भारत की रणनीति
भारत धीरे-धीरे तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। सरकार पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय कर चुकी है।
इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है और ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य के ईंधन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
डर से ज्यादा मजबूत है व्यवस्था
कुल मिलाकर देखा जाए तो भारत के पास तेल खत्म होने का खतरा उतना बड़ा नहीं है जितना अक्सर चर्चा में दिखाया जाता है। मजबूत भंडार, कई देशों से सप्लाई और नई ऊर्जा रणनीतियों की वजह से भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लगातार मजबूत बना रहा है।

