New Delhi: आम आदमी पार्टी (AAP) के दो-तिहाई राज्यसभा सांसदों के BJP में जाने की खबर ने भले ही पार्टी नेतृत्व को चौंकाया हो, लेकिन जिस नाम ने सबसे बड़ा राजनीतिक झटका दिया, वह संदीप पाठक का है। अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार और BJP के सबसे मुखर आलोचकों में गिने जाने वाले संदीप पाठक का पाला बदलना पार्टी के भीतर किसी बड़े भूचाल से कम नहीं माना जा रहा है। एक वरिष्ठ AAP नेता ने कहा, “हम कई झटकों के लिए तैयार थे, लेकिन संदीप पाठक का BJP में जाना कभी सोचा भी नहीं था।” पाठक केजरीवाल के इतने करीबी थे कि जेल में उनसे मिलने की अनुमति पाने वाले सिर्फ तीन लोगों में उनका नाम शामिल था। बाकी दो नाम सुनीता केजरीवाल और बिभव कुमार के थे।
केजरीवाल के ‘चाणक्य’ माने जाते थे संदीप पाठक
2022 के बाद संदीप पाठक AAP के संगठनात्मक ढांचे के सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरे। सर्वे, डेटा और चुनावी गणित पर आधारित उनकी रणनीतियों के चलते उन्हें पार्टी में केजरीवाल का ‘चाणक्य’ कहा जाने लगा। पार्टी के भीतर उनकी तुलना BJP के अमित शाह से की जाती थी। शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल की गैरमौजूदगी के दौरान पाठक ने न सिर्फ संगठन संभाला, बल्कि कांग्रेस के साथ कठिन राजनीतिक बातचीत भी की, खासकर हरियाणा को लेकर। लेकिन 2025 की शुरुआत से ही पाठक और केंद्रीय नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ने लगी।
2025 के बाद बदलने लगी पूरी सियासत
दिल्ली चुनाव 2025 AAP के लिए निर्णायक साबित हुए, लेकिन यहीं से संदीप पाठक की पकड़ कमजोर होने लगी। पार्टी के भीतर ही उनकी रणनीतियों पर सवाल उठने लगे। उन पर ‘ओवरप्रॉमिस और अंडरडिलीवर’ करने के आरोप लगे। इसके बाद उन्हें कई अहम फैसलों से धीरे-धीरे दूर कर दिया गया। इसी दौरान आम आदमी पार्टी और राघव चड्ढा के बीच टकराव भी खुलकर सामने आने लगा।
राघव चड्ढा को हटाने से शुरू हुई बगावत
इस कहानी की शुरुआत 2 अप्रैल 2026 से हुई, जब AAP ने राज्यसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर राघव चड्ढा को अचानक पद से हटा दिया। उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को यह जिम्मेदारी दी गई। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी कहा कि चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आने लगी। सिर्फ राघव चड्ढा ही नहीं, कई अन्य नेता भी इस फैसले से असहज थे।
24 अप्रैल को हुआ बड़ा राजनीतिक धमाका
24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए। उनके साथ 6 और AAP राज्यसभा सांसदों ने भी पार्टी छोड़ दी। यह संख्या पार्टी में दो-तिहाई से अधिक टूट को दिखाती है। माना जा रहा था कि यह स्थिति 2026 के मध्य तक पहुंचेगी, लेकिन अप्रैल की एक गर्म दोपहर में सब कुछ अचानक बदल गया, जब AAP के सात सांसदों ने बीजेपी में विलय का ऐलान कर दिया। इन सात नामों में संदीप पाठक का शामिल होना सबसे ज्यादा चौंकाने वाला था।
आखिरी 24 घंटे में क्या हुआ
सूत्रों के मुताबिक, BJP में जाने वाले सात सांसदों में से एक ने 23 अप्रैल को ही AAP के एक वरिष्ठ नेता से लंबी बातचीत की थी। पार्टी को अंदेशा जरूर था कि कुछ नेता जा सकते हैं, लेकिन यह समझ नहीं आया कि उन्हीं बैठकों में शामिल नेता खुद भी जाने की तैयारी कर रहे थे। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय की अशोक मित्तल पर कार्रवाई, स्वाति मालीवाल का पहले से पार्टी से टकराव और हरभजन सिंह से संपर्क न हो पाना—इन सबने पार्टी की स्थिति को और कमजोर कर दिया।
AAP के लिए सबसे बड़ा नुकसान क्यों हैं संदीप पाठक
पार्टी के भीतर संदीप पाठक का जाना सबसे ज्यादा दर्दनाक माना जा रहा है। एक ओर जहां पार्टी लंबे समय तक उनका बचाव करती रही, वहीं कुछ नेताओं का मानना है कि दिल्ली चुनाव में उनकी रणनीतियां फेल हुईं, जिसके बाद उन्हें धीरे-धीरे किनारे कर दिया गया। अब AAP राज्यसभा के मुख्य सचेतक एनडी गुप्ता के जरिए एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत कार्रवाई की तैयारी कर रही है। हालांकि इससे वास्तविक राजनीतिक नुकसान की भरपाई होती नहीं दिख रही।
कौन हैं संदीप पाठक
छत्तीसगढ़ में शुरुआती पढ़ाई करने वाले संदीप पाठक कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर चुके हैं। साल 2016 में वे IIT दिल्ली में असिस्टेंट प्रोफेसर बने थे। कुछ समय बाद उनकी मुलाकात अरविंद केजरीवाल से हुई। बताया जाता है कि उन्होंने पंजाब को लेकर AAP के लिए एक बड़ा सर्वे किया था। आम आदमी पार्टी पंजाब में पहला चुनाव हार गई, लेकिन संदीप पाठक पर केजरीवाल का भरोसा मजबूत हो गया। इसके बाद उन्होंने IIT दिल्ली की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह राजनीति में उतर गए।
2022 के पंजाब चुनाव की रणनीति भी उन्होंने ही तैयार की, जिसमें AAP को बड़ी जीत मिली और सरकार बन गई। इसके बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया। जब अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और संजय सिंह जेल में थे, तब संगठन की पूरी जिम्मेदारी लगभग संदीप पाठक के कंधों पर थी। सुनीता केजरीवाल एक तरफ से मोर्चा संभाल रही थीं, लेकिन राजनीतिक मोर्चे पर संदीप पाठक ही सबसे सक्रिय थे। X पर लिखे अपने बायो के मुताबिक, वह AAP के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) और छत्तीसगढ़ के प्रभारी भी थे। लेकिन अब वह राघव चड्ढा के साथ बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।
30 दिनों में AAP को तीन बड़े झटके
महज एक महीने के भीतर AAP ने राष्ट्रीय संगठन महासचिव, केजरीवाल के सबसे करीबी रणनीतिकार और राज्यसभा के डिप्टी लीडर—तीनों को खो दिया है। संदीप पाठक का बीजेपी में जाना सिर्फ एक दल-बदल नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे AAP की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं और संगठनात्मक रीढ़ पर सीधा प्रहार माना जा रहा है। यह झटका आने वाले दिनों में पार्टी की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है।

