इजरायल और ईरान युद्ध में अब तेल के बाद दवा, खाद और खाने पर संकट

Middle East War: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब वैश्विक संकट का रूप लेता जा रहा है। तेल और गैस की किल्लत के बाद अब इसका असर दवाओं, खाद और खाने-पीने की चीजों तक पहुंचने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

तेल और LPG सप्लाई पर गहराया संकट

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक सप्लाई चेन पर बड़ा असर पड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20% तेल परिवहन के लिए अहम है। कतर के बड़े एलएनजी प्लांट पर हमले की खबर के बाद कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका असर भारत समेत कई देशों में दिख रहा है, जहां LPG की किल्लत और ईंधन महंगा होने से लोग परेशान हैं।

दवाओं की कीमतों में उछाल

युद्ध का असर अब दवा बाजार पर भी दिखने लगा है। दिल्ली के भागीरथी दवा बाजार में दवाओं की लागत बढ़ती नजर आ रही है। दिल्ली ड्रग ट्रेडर्स एसोसिएशन के अनुसार दवाओं के लिए कच्चा माल विदेशों से आता है और आयात लागत बढ़ने से कीमतों पर असर पड़ा है। एल्युमिनियम और प्लास्टिक की कीमत बढ़ने से पैकेजिंग महंगी हो गई है, जिससे दवाओं की कुल कीमत भी बढ़ रही है। बुखार और डायबिटीज जैसी आम दवाएं भी इससे प्रभावित हो रही हैं।

खाद संकट की आशंका

मिडिल ईस्ट संकट का असर खाद (फर्टिलाइजर) सप्लाई पर भी पड़ सकता है। प्राकृतिक गैस पर निर्भर फर्टिलाइजर उत्पादन पर पहले ही दबाव बढ़ चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार होर्मुज क्षेत्र में तनाव के चलते कई फर्टिलाइजर प्लांट बंद हो चुके हैं या बंद होने की कगार पर हैं। चीन द्वारा यूरिया निर्यात पर रोक लगाने से स्थिति और बिगड़ सकती है, जिससे वैश्विक खाद संकट गहरा सकता है।

खाने-पीने की चीजों पर असर

खाद की कमी का सीधा असर खाद्य उत्पादन पर पड़ता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया के करीब आधे खाद्य उत्पादन में फर्टिलाइजर का इस्तेमाल होता है। ऐसे में सप्लाई में बाधा आने से खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी आ सकती है।
पहले से ही तेल और गैस संकट के कारण होटल-रेस्टोरेंट और रोजमर्रा के खाद्य पदार्थों पर महंगाई बढ़ने लगी है।

आगे और बढ़ सकता है संकट

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका असर और व्यापक हो सकता है। तेल से शुरू हुआ यह संकट अब दवा, खाद और खाने तक पहुंच चुका है, जो आने वाले समय में आम लोगों की जेब पर बड़ा असर डाल सकता है।

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