‘सोची-समझी साजिश’ बताकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, SIR अधिकारियों को बंधक बनाने पर बंगाल सरकार को फटकार

Supreme Court: पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को घेरकर बंधक बनाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है और राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने विरोध प्रदर्शन से जुड़ी रिपोर्ट का संज्ञान लिया, जिसमें न्यायिक अधिकारियों को घंटों तक घेरकर रखा गया था। चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हें देर रात सख्त आदेश जारी करना पड़ा, तभी प्रशासन हरकत में आया। उन्होंने यह भी बताया कि जिस अधिकारी को घेरा गया था, उसका 5 साल का बच्चा भी घर में मौजूद था। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल को देश का “सबसे ज्यादा ध्रुवीकृत” राज्य बताते हुए इस घटना को चुनावी प्रक्रिया में लगे अधिकारियों का मनोबल गिराने की पहले से सोची-समझी कोशिश बताया।

‘राज्य में हर बात सियासी नजरिए से होती है’

पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “दुर्भाग्य से आपके राज्य में हर कोई सियासी नजरिए से बात करता है। क्या आपको लगता है कि हमें नहीं पता कि उपद्रवी कौन हैं। मैं रात 2 बजे तक हर चीज पर नजर रख रहा था। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

शीर्ष अधिकारियों को भी लगाई फटकार

चीफ जस्टिस ने मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और जिला मजिस्ट्रेट समेत राज्य के शीर्ष अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने पूछा कि पहले से जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों की सुरक्षित निकासी क्यों सुनिश्चित नहीं की गई।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक घेराव दोपहर करीब 3.30 बजे शुरू हुआ। महापंजीयक ने प्रशासन को तुरंत कार्रवाई के लिए कहा, लेकिन रात 8.30 बजे तक कोई कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद गृह सचिव से संपर्क किया गया। डीजीपी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के साथ ग्रुप कॉल कर जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने पत्र लिखकर बताया कि न जिला मजिस्ट्रेट और न ही पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे थे। इसके बाद राज्य के डीजीपी और गृह सचिव को तलब करना पड़ा।

सीजेआई ने कहा कि यह घटना न्यायिक अधिकारियों को हतोत्साहित करने और प्रक्रिया को बाधित करने की शर्मनाक कोशिश थी। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव, डीजीपी और गृह सचिव का रवैया बेहद निंदनीय रहा।

बंगाल में विवाद की वजह क्या है

दरअसल, एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद बंगाल में कई जगह विपक्ष ने वोटर लिस्ट से नाम हटाने के आरोप लगाए हैं। इसे लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। मालदा में एसआईआर से जुड़े न्यायिक अधिकारी के घेराव का मामला बीजेपी ने भी उठाया।

अमित मालवीय ने लगाए गंभीर आरोप

बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कालीचक-II बीडीओ कार्यालय को घेर लिया गया था। प्रदर्शनकारियों ने एनएच-12 जाम कर दिया, जिससे उत्तर और दक्षिण बंगाल का संपर्क बाधित हो गया।

उन्होंने दावा किया कि तीन महिलाओं समेत सात न्यायिक अधिकारी कार्यालय के अंदर फंसे रहे। हालात इतने तनावपूर्ण थे कि बाहर निकलना मुश्किल हो गया था। कई जगह सड़कें जाम कर दी गई थीं, जिससे आना-जाना खतरनाक हो गया था।

प्रशासनिक हस्तक्षेप की बताई गई जरूरत

अमित मालवीय ने कहा कि जिला न्यायाधीश के निर्देश पर अधिकारियों ने एक साथ रहने का फैसला किया, ताकि जोखिम कम हो सके। लेकिन हालात लगातार बिगड़ते गए और तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप की जरूरत थी।

उन्होंने कहा कि सभी अधिकारियों की सुरक्षित निकासी के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाने चाहिए थे। साथ ही उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को इस तरह ध्वस्त होने नहीं दिया जा सकता।

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