तेल संकट में रूस बना भारत का सहारा, होर्मुज में रुके यूएई-सऊदी टैंकर

Strait of Hormuz: अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ जंग के बाद मध्य पूर्व से तेल सप्लाई प्रभावित हो गई है। होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आने वाला तेल लगभग रुक गया है। ऐसे में भारत के लिए रूस सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आया है। रूस ने सप्लाई बढ़ाकर भारत की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई है।

मार्च में भारत का तेल आयात घटा

इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक भारत ने मार्च में करीब 45 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया। यह फरवरी के मुकाबले कम रहा। मध्य पूर्व से सप्लाई घटने के कारण भारत के कुल तेल आयात में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि इस दौरान रूस से आयात बढ़ने से स्थिति संभली रही।

रूस से तेल आयात हुआ लगभग दोगुना

मार्च में रूस से भारत का तेल आयात फरवरी के मुकाबले लगभग दोगुना होकर 22.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। वहीं मध्य पूर्व से तेल सप्लाई 61 प्रतिशत गिरकर 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई। इस तरह रूस भारत के लिए सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया और भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।

होर्मुज स्ट्रेट लगभग ठप

होर्मुज स्ट्रेट से आमतौर पर दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की तेल सप्लाई गुजरती है। लेकिन 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से यह मार्ग लगभग ठप हो गया है। पिछले दो महीनों में बहुत कम तेल टैंकर भारत पहुंचे हैं। शनिवार को भारत के झंडे वाले दो जहाजों पर हमला भी किया गया, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

इराक और यूएई से तेल खरीद में भारी गिरावट

मार्च में भारत के कुल आयात में मध्य पूर्वी तेल की हिस्सेदारी घटकर 26.3 प्रतिशत पर आ गई, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है। इराक और संयुक्त अरब अमीरात से सप्लाई कई सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई। इसके चलते भारतीय रिफाइनरियों ने रूस से तेल खरीद तेज कर दी।

अमेरिका ने दी रूसी तेल खरीद की छूट

अमेरिका ने ईरान युद्ध के कारण बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए रूसी तेल खरीद पर छूट दी। इसके बाद भारत ने समुद्र में उपलब्ध रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी। ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को इस छूट को एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। इससे भारत को बड़ी राहत मिली है और उम्मीद है कि रूस से तेल आयात आगे भी बढ़ेगा।

रूस टॉप सप्लायर बना, अफ्रीका से भी बढ़ी खरीद

मार्च में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना रहा। इसके बाद सऊदी अरब दूसरे स्थान पर रहा। मध्य पूर्व से सप्लाई कम होने के कारण भारत ने अफ्रीकी देशों से भी तेल खरीद बढ़ाई। अंगोला तीसरे स्थान पर पहुंच गया। इसके बाद यूएई और इराक का स्थान रहा।

ओपेक देशों की हिस्सेदारी घटी

मध्य पूर्व से कम आयात की वजह से भारत के कुल तेल आयात में ओपेक देशों की हिस्सेदारी घटकर 29 प्रतिशत पर आ गई, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है। हालांकि पहले अमेरिकी दबाव के कारण भारत ने रूस से तेल खरीद कम कर दी थी। लेकिन अब छूट मिलने के बाद रूस से आयात फिर बढ़ गया है और रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया है।

Hot this week

बुंडू में सड़क हादसा, महिला समेत दो लोग घायल

Bundu Road Accident : बुंडू थाना क्षेत्र के NH-33...

देवघर एम्स में बढ़ीं सुविधाएं, अब MSC मेडिकल की पढ़ाई भी शुरू होग

AIIMS Deoghar: झारखंड के देवघर स्थित AIIMS देवघर लगातार...

झारखंड में JTET-2026 के लिए आवेदन शुरू, 21 मई तक मौका

JTET 2026 : झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी...

Topics

बुंडू में सड़क हादसा, महिला समेत दो लोग घायल

Bundu Road Accident : बुंडू थाना क्षेत्र के NH-33...

झारखंड में JTET-2026 के लिए आवेदन शुरू, 21 मई तक मौका

JTET 2026 : झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी...

धनबाद के कतरास में आग का कहर, पूरा घर जलकर खाक

Dhanbad Fire News : धनबाद जिले के कतरास थाना...

ज्वेलरी दुकान में लूट की कोशिश नाकाम, दो आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार

Ramgarh Crime News: रजरप्पा थाना क्षेत्र के चितरपुर मोड़...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img