पहलगाम के गुनहगारों का कैसे हुआ अंत, 250 किलोमीटर पीछा कर आतंकियों को किया ढेर

Pahalgam Attack Anniversary: जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है। इस हमले में 26 पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हमले के बाद भारतीय सेना, पुलिस और जांच एजेंसियों ने मिलकर लंबा ऑपरेशन चलाया और करीब 250 किलोमीटर तक पीछा करने के बाद तीनों आतंकियों को मार गिराया। यह ऑपरेशन सुरक्षा बलों की सबसे लंबी और सटीक कार्रवाई में से एक माना जा रहा है।

22 अप्रैल 2025 को हुआ था खौफनाक हमला

22 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 1 बजे बैसरन घाटी में तीन आतंकियों ने पर्यटकों पर हमला किया। आतंकियों ने तीन अलग अलग दिशाओं से फायरिंग की। हमले के दौरान पर्यटकों से धर्म पूछा गया और फिर नजदीक से गोली मार दी गई। हमले में 26 लोगों की मौत हो गई। हमले के बाद तीनों आतंकी मौके से भागने में सफल रहे। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर ए तैयबा से जुड़े द रेजिस्टेंट फोर्स ने ली थी।

हमले के बाद शुरू हुई बड़ी जांच

हमले के तुरंत बाद बैसरन घाटी को बंद कर दिया गया। जम्मू कश्मीर पुलिस ने तीन आतंकियों के पोस्टर जारी किए और उन पर 20 20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया। बाद में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई। NIA ने घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच और डिजिटल मैपिंग कराई। मौके से खून से सने कपड़े, खाली कारतूस और अन्य सबूत जुटाए गए। मोबाइल फोन का डंप डेटा भी निकाला गया। जांच के दौरान 3 हजार से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई और 1055 घंटे तक बयान दर्ज किए गए। बैसरन घाटी से निकलने वाले 58 रास्तों की भी जांच की गई।

दो महीने बाद मिली पहली बड़ी कामयाबी

हमले के दो महीने बाद 22 जून 2025 को बशीर अहमद और परवेज अहमद को गिरफ्तार किया गया। दोनों ने बताया कि आतंकी हमले से एक दिन पहले उनके ठिकाने पर आए थे। उनके पास एक M9 राइफल और दो AK 47 राइफल थीं। इनसे पूछताछ के बाद आतंकियों की गतिविधियों और भागने के रास्तों के बारे में अहम जानकारी मिली।

सेना ने शुरू किया ऑपरेशन महादेव

हमले के दिन ही सेना ने ऑपरेशन महादेव शुरू कर दिया था। सेना, पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ने दक्षिणी कश्मीर के जंगलों में बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सैकड़ों किलोमीटर तक जंगलों की तलाशी ली गई। खुफिया इनपुट मिला कि आतंकी हापथनगर, बगमाड़ और त्राल होते हुए दाचीगाम के जंगलों की ओर बढ़ रहे हैं।

ड्रोन और सेंसर से की गई निगरानी

ऑपरेशन के दौरान ड्रोन, रिमोट विमान, इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। धीरे धीरे आतंकियों का दायरा कम किया गया और उनके भागने के रास्ते बंद कर दिए गए।

93 दिन तक चला पीछा

10 जुलाई 2025 को नई जानकारी मिलने के बाद ऑपरेशन तेज कर दिया गया। लिडवास, हरवान और दाचीगाम में संयुक्त अभियान चलाया गया। 22 जुलाई को सेंसर के जरिए आतंकियों की लोकेशन की पुष्टि हुई। करीब 93 दिनों तक 250 किलोमीटर पीछा करने के बाद आतंकियों का घेरा 25 वर्ग किलोमीटर तक सीमित कर दिया गया।

28 जुलाई 2025 को मारे गए तीनों आतंकी

28 जुलाई 2025 को सेना की 4 पैरा यूनिट ने ऑपरेशन संभाला। जवानों ने 10 घंटे में 3 किलोमीटर का कठिन रास्ता पैदल तय किया ताकि आतंकियों को भनक न लगे। इसके बाद मुठभेड़ में तीनों आतंकियों को मार गिराया गया। उनकी पहचान सुलेमान उर्फ फैजल जट्ट, अफगान और जिब्रान के रूप में हुई। तीनों पाकिस्तानी आतंकी लश्कर ए तैयबा से जुड़े थे और कई हमलों में शामिल थे।

हथियारों से हुआ बड़ा खुलासा

आतंकियों के पास से एक M 9 राइफल और दो AK 47 बरामद हुईं। इन हथियारों की फॉरेंसिक जांच चंडीगढ़ में कराई गई। जांच में पुष्टि हुई कि पहलगाम हमले में इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल हुआ था। आतंकियों के पास से पाकिस्तान में बनी चॉकलेट भी मिली।

NIA ने दाखिल की 1597 पन्नों की चार्जशीट

करीब 8 महीने की जांच के बाद 15 दिसंबर 2025 को NIA ने 1597 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में 7 लोगों को आरोपी बनाया गया और लश्कर ए तैयबा तथा TRF को भी शामिल किया गया। जांच में सामने आया कि हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी।

कौन है मास्टरमाइंड साजिद जट्ट

इस हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तानी आतंकी साजिद जट्ट बताया गया। वह लश्कर ए तैयबा और TRF का टॉप कमांडर है। साजिद जट्ट पाकिस्तान के कसूर जिले का रहने वाला है और कई नामों से जाना जाता है। NIA ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है।

इन हमलों में भी सामने आया नाम

  • धांगरी नरसंहार जनवरी 2023 राजौरी
  • IAF काफिले पर हमला मई 2024 पुंछ
  • रियासी बस हमला जून 2024
  • पहलगाम हमला अप्रैल 2025

जांच एजेंसियों के मुताबिक साजिद जट्ट घाटी में भर्ती, फंडिंग और घुसपैठ का जिम्मा संभालता है और उसे कश्मीर में सक्रिय सबसे खतरनाक आतंकियों में गिना जाता है।

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