Canada: कनाडा का इमिग्रेशन सिस्टम इन दिनों चर्चा में है और इसका असर भारतीय परिवारों पर भी दिखने लगा है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां भारतीय मूल की एक महिला को कनाडा में शरण मिल गई, लेकिन उसके पति और 5 साल के बेटे को देश छोड़ने का आदेश दे दिया गया। इस फैसले ने पूरे परिवार को टूटने के कगार पर ला दिया।
एक परिवार पर टूट पड़ा बड़ा संकट
भारतीय मूल के रवि चौहान अपने परिवार के साथ कनाडा में रह रहे थे। उनकी पत्नी को पहले ही शरणार्थी का दर्जा मिल चुका था, लेकिन कनाडा सरकार ने रवि चौहान और उनके 5 साल के बेटे को डिपोर्ट करने का आदेश दे दिया। इसका मतलब यह था कि मां कनाडा में रहेगी और पिता-बेटे को देश छोड़ना होगा। ऐसी स्थिति में परिवार का दोबारा मिलना लगभग नामुमकिन हो सकता था।
सामान्य जांच के बहाने बुलाया, शुरू कर दी डिपोर्ट प्रक्रिया
मामले ने तब गंभीर मोड़ लिया जब रवि चौहान को मॉन्ट्रियल स्थित कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी के ऑफिस में बुलाया गया। उन्हें लगा कि यह सामान्य जांच होगी, लेकिन वहां अचानक डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। रवि को अलग कमरे में ले जाया गया, जिससे उनका छोटा बेटा डर गया। इसके बाद उन्हें 48 घंटे तक हिरासत में रखा गया। बाद में उनकी पत्नी ने बड़ी मुश्किल से 4000 डॉलर जुटाकर जमानत करवाई। इस पूरी घटना का बच्चे पर भी गहरा असर पड़ा।
बेटे को पिता से अलग नहीं करना चाहती मां
रवि की पत्नी ने भावुक होकर कहा कि वह अपने बेटे को उसके पिता से अलग नहीं कर सकती। उनका कहना है कि बच्चे को मां और पिता दोनों की जरूरत होती है। परिवार पहले विजिट वीजा पर कनाडा आया था और बाद में यहीं बस गया। उनका बेटा मॉन्ट्रियल के स्कूल में पढ़ता है और वहां की जिंदगी में ढल चुका है।
आखिरी समय पर मिली एक महीने की राहत
इस मामले में आखिरी समय पर राहत मिली। एक संघीय मंत्री के हस्तक्षेप के बाद रवि और उनके बेटे का डिपोर्टेशन फिलहाल रोक दिया गया है। 23 मार्च 2026 को पिता-बेटे को कनाडा से बाहर भेजा जाना था, लेकिन उससे कुछ दिन पहले सरकार ने कार्रवाई टाल दी। यह राहत फिलहाल सिर्फ एक महीने के लिए दी गई है।
केस की दोबारा समीक्षा की उम्मीद
परिवार के वकील स्टीवर्ट इस्तवानफी का कहना है कि इस एक महीने में केस की दोबारा समीक्षा हो सकती है और परिवार को साथ रखने का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि यह मामला कनाडा के इमिग्रेशन सिस्टम की खामियों को भी उजागर करता है।
कई परिवारों के सामने आ रही ऐसी ही समस्या
वकीलों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि हाल के समय में ऐसे मामलों में तेजी आई है, जहां परिवार के कुछ सदस्यों को शरण मिलती है और बाकी को डिपोर्ट कर दिया जाता है। इससे कनाडा की फैमिली री यूनिफिकेशन नीति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
PR मिलने में लग सकते हैं 10 साल
पहले आमतौर पर परिवार को स्थायी निवास मिलने तक कनाडा में रहने दिया जाता था। लेकिन अब यह स्थिति बदलती नजर आ रही है। क्यूबेक में स्थायी निवास मिलने में करीब 10 साल तक लग सकते हैं और इस दौरान शरणार्थी अपने देश भी नहीं लौट सकते।
अधिकारी का बयान भी चौंकाने वाला
मामले में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। CBSA के एक अधिकारी ने कहा कि सिर्फ बच्चे के हित का हवाला देकर डिपोर्टेशन नहीं रोका जा सकता। अधिकारी ने यह भी सुझाव दिया कि परिवार फोन, सोशल मीडिया या किसी तीसरे देश में मिलकर संपर्क बनाए रख सकता है।
धमकियों के बाद भारत से आया था परिवार
जानकारी के मुताबिक, यह परिवार 2023 में भारत से धमकियों और हमलों के बाद कनाडा आया था। महिला को सितंबर 2024 में शरणार्थी का दर्जा मिला था। रवि और उनकी पत्नी की मुलाकात तब हुई थी जब पत्नी नर्स के रूप में रवि की मां की देखभाल कर रही थीं। बाद में 2020 में दोनों ने शादी कर ली।
परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी भी रवि पर
रवि ने कहा कि उनकी पत्नी अभी भी पुराने अनुभवों से उबर नहीं पाई है। अगर उन्हें कनाडा छोड़ना पड़ा, तो उनकी देखभाल करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने बताया कि उनका बेटा और पत्नी दोनों ही इस स्थिति से तनाव में हैं।
सरकार ने क्या कहा
सरकार का कहना है कि किसी एक व्यक्ति को शरण मिलने से उसके परिवार को स्वतः सुरक्षा नहीं मिलती। बाकी सदस्यों को अलग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इमिग्रेशन विभाग के मुताबिक, डिपोर्टेशन का फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाता है।
2027 तक 4000 लोगों को निकालने की तैयारी
इस बीच एक और अहम जानकारी सामने आई है। कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी ने 2027 तक करीब 4000 लोगों को देश से बाहर करने का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में वकीलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि शरणार्थी परिवारों को अलग होने से बचाने के लिए नई नीति बनाई जाए।

