Jharkhand zoo project: झारखंड में वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दुमका और गिरिडीह में दो नए चिड़ियाघर (new zoo) बनाए जाने की तैयारी चल रही है। इन चिड़ियाघरों में करीब 200 वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में रखने की योजना है।
मिली जानकारी के अनुसार इन वन्यजीवों को देश के विभिन्न वन क्षेत्रों और नेशनल पार्कों से लाया जाएगा। नए स्थान पर लाने से पहले इन्हें दलमा और सारंडा के रेस्क्यू सेंटर में रखा जाएगा, ताकि वे यहां की जलवायु के अनुसार खुद को ढाल सकें। सारंडा में एक नई सफारी बनाने की भी योजना है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि बाघ और चीता जैसे जानवर नए माहौल में आसानी से नहीं ढलते। अगर उन्हें अनुकूल वातावरण नहीं मिलता, तो उनकी जान को खतरा हो सकता है। हाल ही में कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए चीतों की मौत के बाद वन्यजीवों के ट्रांसपोर्ट और देखभाल के नियम और सख्त किए गए हैं।
सरकार इन नए चिड़ियाघरों में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था (Medical System) भी सुनिश्चित करेगी। इसके लिए वन्यजीव संस्थान से तकनीकी सहायता मांगी गई है और दुमका व गिरिडीह में पशु अस्पताल स्थापित किए जाएंगे।
योजना के तहत, दोनों जगहों पर करीब सात बाघ रखने की तैयारी है। वहीं, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान से चीते लाने को लेकर भी केंद्र सरकार से बातचीत चल रही है।
विशेषज्ञों ने निर्देश दिया है कि चिड़ियाघरों (zoos) में जानवरों के लिए प्राकृतिक वातावरण तैयार किया जाए। इसके लिए साल के पेड़ लगाए जाएंगे और बड़े पत्थरों को भी रखा जाएगा, ताकि वन्यजीव अपने प्राकृतिक माहौल जैसा अनुभव कर सकें।

