जंग का असर आम जिंदगी पर: पेट्रोल, सड़क, बीयर और रोजमर्रा की चीजें हुईं प्रभावित

New Delhi News: ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव भले ही मिडिल ईस्ट तक सीमित दिख रहा हो, लेकिन इसका असर भारत के बाजार, फैक्ट्रियों और आम लोगों की जिंदगी तक पहुंच गया है। यह सिर्फ एक जंग नहीं, बल्कि सप्लाई चेन पर पड़ा बड़ा झटका है, जिसने रोजमर्रा की चीजों को प्रभावित कर दिया है।तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट आने से कई इंडस्ट्री की लागत बढ़ गई है। कहीं सड़क बनाने के लिए डामर कम पड़ रहा है, तो कहीं बीयर की बोतल और कैन की कमी की खबरें आ रही हैं। यहां तक कि कंडोम और पैकेजिंग उद्योग भी प्रभावित होने लगे हैं।यह असर सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं है। कच्चे माल से लेकर तैयार सामान तक पूरी सप्लाई चेन कमजोर पड़ रही है। अब सवाल यह है कि अगर जंग लंबी चली, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर कितना गहरा होगा।

कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर पर असर

ईरान-अमेरिका तनाव का सबसे पहले असर ऊर्जा लागत पर पड़ा है। LNG और ईंधन महंगे होने से सीमेंट, स्टील और टाइल्स बनाने वाली फैक्ट्रियों की लागत बढ़ गई है। गुजरात के मोरबी जैसे इंडस्ट्रियल क्लस्टर में सिरेमिक यूनिट्स की रफ्तार धीमी हो गई है। इससे बिल्डर्स के लिए प्रोजेक्ट महंगे हो गए हैं और कई प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है। नतीजतन घर बनाना महंगा होता जा रहा है और रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव बढ़ रहा है।

कंडोम इंडस्ट्री पर भी संकट

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर भारत के करीब 7,000 से 8,000 करोड़ रुपये के कंडोम उद्योग पर भी पड़ रहा है। पेट्रोकेमिकल सप्लाई प्रभावित होने से सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया जैसे कच्चे माल की कमी हो गई है। इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है और आने वाले समय में कीमतें बढ़ने या उपलब्धता कम होने की आशंका है।

ग्लास इंडस्ट्री पर बड़ा असर, बीयर-दवाइयों की बोतलों की कमी

ग्लास इंडस्ट्री पूरी तरह गैस पर निर्भर होती है। मिडिल ईस्ट से गैस सप्लाई प्रभावित होने से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जैसे ग्लास हब में कई भट्टियां बंद हो गई हैं या कम क्षमता पर चल रही हैं। उत्पादन में 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट देखी जा रही है। इसका असर सिर्फ चूड़ियों पर नहीं, बल्कि बीयर, दवाइयों और परफ्यूम की बोतलों पर भी पड़ रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, बोतलों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। कागज के कार्टन, लेबल और पैकेजिंग सामग्री भी महंगी हो गई है। एल्युमिनियम आयात में देरी से कैन की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है।

स्टील और मेटल इंडस्ट्री पर दबाव

स्टील और मेटल इंडस्ट्री ऊर्जा पर निर्भर होती है। LPG और ईंधन महंगे होने से छोटे और मंझोले प्लांट दबाव में आ गए हैं।
एल्युमिनियम और अन्य धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर और मशीनरी सेक्टर की लागत बढ़ गई है। इससे पूरे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ रहा है।

केमिकल और प्लास्टिक इंडस्ट्री भी प्रभावित

केमिकल और प्लास्टिक उद्योग तेल से बनने वाले नाफ्था जैसे कच्चे माल पर निर्भर करते हैं। तेल महंगा होने से इनकी लागत भी बढ़ गई है।इसका असर प्लास्टिक पैकेजिंग, FMCG प्रोडक्ट्स और रोजमर्रा के सामान पर पड़ रहा है। शैम्पू, पैकेज्ड फूड और अन्य उपभोक्ता उत्पाद महंगे हो सकते हैं।

खेती और कृषि सप्लाई पर असर

जंग का असर खेती तक पहुंच गया है। पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स प्रभावित होने से बीज और खाद की सप्लाई में देरी हो रही है।
कई कंपनियों को पैकेजिंग सामग्री की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अगर स्थिति लंबी चली, तो इसका असर फसल चक्र और पैदावार पर पड़ सकता है।

शिपिंग और ट्रेड पर बढ़ा खतरा

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। यहां तनाव बढ़ने से शिपिंग कंपनियों की लागत और बीमा खर्च बढ़ गया है। इसका असर एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर पड़ा है और शिपिंग रेट्स में उछाल आया है। इससे सामान महंगा होने के साथ डिलीवरी में भी देरी हो रही है।

MSME सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार

छोटे और मंझोले उद्योग इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। कच्चा माल महंगा होने, गैस-बिजली की लागत बढ़ने और ऑर्डर घटने से कई यूनिट्स बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। इसका असर रोजगार पर भी पड़ रहा है और कई जगह उत्पादन घटाना पड़ा है।

फूड और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री भी प्रभावित

LPG और ईंधन महंगे होने से रेस्टोरेंट की लागत बढ़ गई है। कई रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू महंगे कर दिए हैं या कुछ आइटम हटाने पड़े हैं।इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है।

एविएशन सेक्टर पर असर

एयरलाइंस के लिए सबसे बड़ा खर्च एविएशन टर्बाइन फ्यूल होता है। तेल की कीमत बढ़ते ही एयरलाइंस की लागत बढ़ गई है। कई एयरलाइंस टिकट महंगे करने या फ्लाइट्स कम करने पर विचार कर रही हैं। इससे यात्रियों पर असर पड़ सकता है।

पेट्रोल-डीजल भी हो सकता है महंगा

ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। सप्लाई प्रभावित होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव देखने को मिल रहा है। सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए एक्साइज ड्यूटी कम की है। इससे सरकार को राजस्व में घाटा उठाना पड़ रहा है, ताकि आम आदमी पर बोझ कम पड़े।

रेमिटेंस और रोजगार पर भी असर

खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय मजदूरों पर भी असर पड़ा है। कई प्रोजेक्ट्स रुकने से रोजगार प्रभावित हुआ है और कुछ लोग भारत लौटने लगे हैं। इससे भारत को मिलने वाली रेमिटेंस पर भी दबाव पड़ सकता है।

जंग का असर हर सेक्टर तक पहुंचा

आसान शब्दों में कहें तो ईरान-अमेरिका तनाव अब भारत की अर्थव्यवस्था के लगभग हर सेक्टर को प्रभावित कर रहा है। यह सिर्फ तेल संकट नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन पर पड़ा असर है। अगर यह तनाव लंबा चलता है, तो महंगाई बढ़ने और आर्थिक सुस्ती का खतरा और गहरा सकता है।

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