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ईरान में नया खतरा! कुर्द लड़ाकों की एंट्री की तैयारी, पुरानी दुश्मनी फिर बनी बड़ी चुनौती

Iran and Israil War: अमेरिका और इजरायल के हमलों से जूझ रहे ईरान के सामने अब एक और चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। खबर है कि कुर्द लड़ाके ईरान के अंदर घुसने की तैयारी कर रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका इन कुर्द लड़ाकों को गुपचुप तरीके से हथियार देने की योजना बना रहा है। इसी वजह से ईरान की शक्तिशाली सेना IRGC ने कुर्द लड़ाकों के ठिकानों पर हमले भी किए हैं।

ईरान और कुर्दों की दुश्मनी नई नहीं

कुर्द समुदाय और ईरानी शासन के बीच टकराव का इतिहास काफी पुराना है। 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान की नई सरकार ने कुर्द विद्रोहियों के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान चलाया था। उस दौरान कई कुर्द कस्बे और गांव तबाह कर दिए गए थे। हजारों लोग मारे गए और लाखों कुर्दों को सीरिया और इराक की ओर पलायन करना पड़ा।

शाह के दौर में भी कुर्दों पर दमन

इस्लामिक क्रांति से पहले शाह मोहम्मद रजा पहलवी के शासनकाल में भी कुर्द समुदाय खुद को हाशिए पर महसूस करता था। सांस्कृतिक और राजनीतिक अधिकारों की कमी के कारण कुर्दों ने कई बार विद्रोह किया। इसी संघर्ष के बीच एक समय ऐसा भी आया जब कुर्दों ने ईरान से अलग एक देश बनाने की घोषणा कर दी थी।

जब बना था ‘रिपब्लिक ऑफ महाबाद’

22 जनवरी 1946 को कुर्द नेता काज़ी मुहम्मद ने ईरान के उत्तर-पश्चिमी इलाके महाबाद में एक अलग देश की घोषणा की थी, जिसे रिपब्लिक ऑफ महाबाद या रिपब्लिक ऑफ कुर्दिस्तान कहा गया। काज़ी मुहम्मद लंबे समय से कुर्दों की स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहे थे और उसी आंदोलन के तहत उन्होंने यह कदम उठाया।

सोवियत समर्थन से खड़ा हुआ था नया देश

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही थी। उसी दौर में सोवियत संघ के समर्थन से कुर्द विद्रोहियों ने उत्तरी ईरान के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया। इसके बाद कुर्द नेताओं ने इन इलाकों को अलग देश के रूप में घोषित कर दिया। कोमाला-ए-जियान-ए-कुर्द नाम के संगठन ने इस गणराज्य के गठन में अहम भूमिका निभाई और काज़ी मुहम्मद इसके राष्ट्रपति बने।

कम संसाधनों के बावजूद हुई अच्छी शुरुआत

रिपब्लिक ऑफ महाबाद ने सीमित संसाधनों के बावजूद कई बड़े कदम उठाए। कुर्द भाषा में शिक्षा को बढ़ावा दिया गया, साहित्य प्रकाशित हुआ और महिलाओं की शिक्षा पर भी जोर दिया गया। इस नए देश ने अपनी सेना भी बनाई, जिसे पेशमर्गा कहा गया।

सिर्फ एक साल में खत्म हो गया देश

हालांकि यह देश ज्यादा समय तक टिक नहीं सका। शीत युद्ध की राजनीति में बदलाव के बाद सोवियत संघ ने अपना समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद दिसंबर 1946 में ईरानी सेना ने महाबाद पर फिर से कब्जा कर लिया। कुर्द भाषा के स्कूल बंद कर दिए गए, किताबें जला दी गईं और पूरे प्रशासन को खत्म कर दिया गया।

कुर्द राष्ट्रपति को दे दी गई फांसी

काज़ी मुहम्मद को गिरफ्तार कर लिया गया और संक्षिप्त मुकदमे के बाद 31 मार्च 1947 को उन्हें अन्य कुर्द नेताओं के साथ फांसी दे दी गई। इसके साथ ही रिपब्लिक ऑफ महाबाद का अंत हो गया।

आज भी जिंदा है कुर्दिस्तान का सपना

भले ही यह गणराज्य सिर्फ एक साल चला, लेकिन इसने कुर्द आंदोलन पर गहरा असर छोड़ा। आज भी तुर्की, ईरान, इराक और सीरिया में फैले कुर्द समुदाय के बीच अलग कुर्दिस्तान बनाने की मांग समय-समय पर उठती रहती है। हालांकि बदलती अंतरराष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों के कारण यह सपना अब भी काफी जटिल और दूर नजर आता है।

रैपर से PM पद के दावेदार! नेपाल चुनाव में छाए बालेन शाह, युवाओं के नए चेहरे पर टिकी नजर

Gen-Z Nepal: नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद अब नई सरकार के लिए मतदान कराया गया है। इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की हो रही है। 35 साल के बालेन शाह ने झापा-5 सीट से चुनाव लड़ने के लिए मेयर पद से इस्तीफा दे दिया था। अब उन्हें नेपाल के अगले प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदारों में गिना जा रहा है और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता काफी ज्यादा है।

विवादों से भी रहा गहरा नाता

बालेन शाह का राजनीतिक सफर जितना तेज रहा है, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा है। नवंबर 2025 में उनके एक फेसबुक पोस्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी थी। उस पोस्ट में उन्होंने अमेरिका, भारत और चीन समेत नेपाल के बड़े राजनीतिक दलों के खिलाफ तीखी और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। बाद में पोस्ट हटा लिया गया, लेकिन उसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इससे पहले वे सिंह दरबार को आग लगाने की धमकी देकर भी विवादों में आ चुके हैं।

कौन हैं बालेन शाह?

बालेन शाह का असली नाम बालेंद्र शाह है। वे एक आयुर्वेदिक डॉक्टर के बेटे हैं और बचपन से ही कविता और संगीत में रुचि रखते थे। यही रुचि आगे चलकर रैप म्यूजिक में बदल गई। अमेरिका के मशहूर रैपर्स टुपैक शकुर और 50 सेंट से प्रभावित होकर उन्होंने नेपाल के संगीत जगत में अपनी अलग पहचान बनाई।

उन्होंने नेपाल से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और भारत के कर्नाटक स्थित विश्वेश्वरैया तकनीकी विश्वविद्यालय से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। 2019 में उनका गाना ‘बलिदान’ काफी लोकप्रिय हुआ था, जिसमें उन्होंने नेपाल की राजनीति और व्यवस्था पर तीखा हमला बोला था।

निर्दलीय जीत से राजनीति में बनाई पहचान

बालेन शाह ने “परिवर्तन का समय” के नारे के साथ निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काठमांडू मेयर का चुनाव जीतकर सबको चौंका दिया था। मेयर रहते हुए उन्होंने शहर में अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की, हालांकि इस दौरान रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ कठोर रवैये को लेकर उनकी आलोचना भी हुई।

अब RSP के साथ मैदान में

दिसंबर 2025 में बालेन शाह ने रबी लामिछाने की अगुवाई वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) जॉइन कर ली। इसके बाद पार्टी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया।

आर्थिक सुधार और रोजगार पर फोकस

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने अपने घोषणापत्र में आर्थिक सुधारों को प्राथमिकता दी है। पार्टी का दावा है कि वह 12 लाख नई नौकरियां पैदा करेगी और युवाओं के विदेश पलायन को रोकेगी। साथ ही नेपाल की प्रति व्यक्ति आय को 1,447 डॉलर से बढ़ाकर 3,000 डॉलर करने और देश की जीडीपी को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

महंगी कार को लेकर भी हुई आलोचना

चुनाव प्रचार के दौरान बालेन शाह उस समय भी चर्चा में आ गए जब वे झापा-5 में करीब 4 करोड़ नेपाली रुपये की लैंड रोवर डिफेंडर कार में घूमते नजर आए। आलोचकों का कहना है कि वे खुद को पारंपरिक नेताओं से अलग बताते हैं, लेकिन उनकी जीवनशैली अब उन्हीं जैसी हो गई है।

नतीजों पर टिकी नेपाल की नजर

अब पूरा नेपाल चुनाव नतीजों का इंतजार कर रहा है। एक रैपर और सोशल मीडिया स्टार से संभावित प्रधानमंत्री तक का बालेन शाह का सफर इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी बन गया है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या नेपाल का युवा वर्ग उन्हें सच में सत्ता की कुर्सी तक पहुंचा पाता है या नहीं।

DJ बजाने को लेकर झड़प, चाकू से हमला, एक भाई की मौत, दो गंभीर

Jharkhand New: गिरिडीह नगर थाना क्षेत्र के हुट्टीबाजार–दास मुहल्ला में DJ बजाने को लेकर शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते खूनी झड़प में बदल गया। चार युवकों ने तीन सगे भाइयों पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इस हमले में 30 वर्षीय अजय दास की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके दो भाई गंभीर रूप से घायल हो गए।

बच्चों के विवाद से शुरू हुई मारपीट

बताया जा रहा है कि होली के दूसरे दिन गुरुवार देर रात DJ बजाने को लेकर पहले बच्चों के बीच विवाद हुआ। बात बढ़ते-बढ़ते दो पड़ोसियों के बीच झड़प में बदल गई। इसी दौरान कुछ युवकों ने गुस्से में तीनों भाइयों पर चाकू से हमला कर दिया।

दो भाई अस्पताल में भर्ती

हमले में अजय दास की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उसके दो भाई राजेश दास और प्रदुम्न दास गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

हमले के बाद आरोपी फरार

घटना में रॉबिन दास, रोनित दास, रोहित, रवि दास समेत एक अन्य युवक के शामिल होने की बात सामने आई है। वारदात के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए।

पुलिस जांच में जुटी, छापेमारी जारी

घटना की सूचना मिलते ही DSP नीरज सिंह और नगर थाना प्रभारी रतन कुमार सिंह सदर अस्पताल पहुंचे और परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली। DSP ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। वहीं नगर थाना प्रभारी ने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए देर रात से लगातार छापेमारी की जा रही है और जल्द ही सभी को पकड़ लिया जाएगा।

जेल में बंद IAS विनय चौबे ने हाईकोर्ट में लगाई जमानत की गुहार

Jharkhand High Court: हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में जेल में बंद IAS अधिकारी विनय चौबे ने झारखंड हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। इस याचिका पर शुक्रवार को न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

वरिष्ठ अधिवक्ता ने रखा पक्ष

सुनवाई के दौरान विनय चौबे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर. एस. मजूमदार ने अदालत में उनका पक्ष रखा। अदालत ने ACB से पूरे मामले में विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है। अब अगली सुनवाई में अदालत इस मामले में आगे की कार्रवाई पर फैसला लेगी।

ACB पहले ही दाखिल कर चुकी है चार्जशीट

गौरतलब है कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इस मामले में पहले ही विनय चौबे के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। एजेंसी ने प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद रांची स्थित ACB थाने में कांड संख्या 11/2025 दर्ज किया था। जांच के दौरान कई अहम दस्तावेज और गवाहों के बयान जुटाए गए हैं।

जमीन घोटाले में संलिप्तता का दावा

ACB की जांच में यह दावा किया गया है कि हजारीबाग की वन भूमि से जुड़े कथित जमीन घोटाले में विनय चौबे की भूमिका सामने आई है। एजेंसी के मुताबिक जमीन के अवैध हस्तांतरण और सौदे में कई लोगों की संलिप्तता पाई गई है।

कुल 73 लोगों को बनाया गया आरोपी

इस मामले में विनय चौबे के करीबी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचल अधिकारी शैलेश कुमार और ब्रोकर विजय सिंह समेत कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।

रांची में फिर बम से उड़ाने की धमकी, पासपोर्ट ऑफिस को लेकर मचा हड़कंप

Ranchi News: राजधानी रांची में एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिलने से पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस बार रातू रोड स्थित ग्लैक्सिया मॉल में चल रहे पासपोर्ट कार्यालय को निशाना बनाने की धमकी दी गई है। जानकारी के मुताबिक अज्ञात अपराधियों ने ईमेल के जरिए यह धमकी भेजी, जिसमें पासपोर्ट ऑफिस को बम से उड़ाने की बात कही गई।

मौके पर पहुंची पुलिस और बम निरोधक दस्ता

धमकी भरा मेल मिलते ही पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। कोतवाली DSP प्रकाश सोय के नेतृत्व में पुलिस टीम और बम निरोधक दस्ता मौके पर पहुंचा। इसके बाद पासपोर्ट कार्यालय और पूरे मॉल परिसर में सघन जांच शुरू की गई।

घंटों चली तलाशी, नहीं मिला कोई संदिग्ध सामान

पुलिस और BDS टीम ने पासपोर्ट ऑफिस के अंदर और आसपास के इलाके की बारीकी से तलाशी ली। मॉल के अलग-अलग हिस्सों में भी जांच अभियान चलाया गया। कई घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के दौरान कहीं से भी कोई संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली।

साइबर टीम जुटी, ईमेल भेजने वाले की तलाश

हालांकि धमकी को गंभीरता से लेते हुए पुलिस जांच जारी रखे हुए है। अब उस ईमेल की तकनीकी जांच की जा रही है, जिसके जरिए धमकी दी गई थी। साइबर टीम की मदद से यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि मेल किसने और कहां से भेजा।

पहले भी मिल चुकी है ऐसी धमकी

गौरतलब है कि इससे पहले भी रांची में इसी तरह की धमकी सामने आ चुकी है। कुछ समय पहले रांची सिविल कोर्ट और समाहरणालय को भी ईमेल के जरिए बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी। उस समय भी आरडीएक्स से विस्फोट की बात कही गई थी, लेकिन जांच में कोई विस्फोटक नहीं मिला था।

हिंद महासागर में बड़ा सैन्य टकराव!, अमेरिका ने डुबोया ईरानी युद्धपोत, भारत की बढ़ी चिंता

US Iran War: हिंद महासागर में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। यह हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुआ, जो श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र के दायरे में आता है। इस घटना के बाद भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों की चिंता बढ़ गई है।

श्रीलंका नौसेना ने बचाए 32 ईरानी नाविक

श्रीलंका की नौसेना ने पुष्टि की है कि डूबते जहाज से 32 ईरानी नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि जहाज के कई अन्य चालक दल के सदस्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं। घटना के बाद श्रीलंका में भी इसको लेकर राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर सवाल उठने लगे हैं।

श्रीलंका सांसद नमल राजपक्षे ने जताई चिंता

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए श्रीलंका के सांसद नमल राजपक्षे ने इसे गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि भले ही युद्ध कहीं और हो रहा हो, लेकिन इसकी हलचल हिंद महासागर में दिखाई दे रही है, जो श्रीलंका के तट से केवल करीब 40 समुद्री मील दूर है। उनके मुताबिक यह स्थिति श्रीलंका के साथ-साथ भारत के लिए भी चिंता का विषय है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह घटना

भारत के नजरिए से यह मामला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंद महासागर भारत के लिए व्यापार, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति का सबसे बड़ा रास्ता है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्ग से आयात करता है। ऐसे में अगर इस इलाके में सैन्य तनाव बढ़ता है, तो समुद्री व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

सरकार से जवाब मांग रहे श्रीलंका के सांसद

नमल राजपक्षे ने श्रीलंका सरकार से सवाल किया है कि क्या उसे इस अमेरिकी कार्रवाई की पहले से जानकारी थी। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को इसकी जानकारी थी, तो यह बताया जाना चाहिए कि जनता और संसद से इसे क्यों छिपाया गया। वहीं अगर सरकार को कोई जानकारी नहीं थी, तो यह और भी गंभीर बात है कि इतने बड़े सैन्य ऑपरेशन की जानकारी देश को नहीं मिली।

अमेरिका ने पनडुब्बी से किया हमला

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पुष्टि की है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी युद्धपोत पर टॉरपीडो से हमला किया था। वहीं अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारी जनरल डैन केन ने इस कार्रवाई को ऐतिहासिक बताया है।

आपात संदेश के बाद शुरू हुआ बचाव अभियान

श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने बताया कि जहाज की ओर से सुबह आपात संदेश भेजा गया था। इसके बाद बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक युद्धपोत पूरी तरह समुद्र में डूब चुका था।

हिंद महासागर में बदल रहा शक्ति संतुलन

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में बदलते शक्ति संतुलन का संकेत भी है। अगर ऐसी घटनाएं बढ़ती हैं, तो भारत को अपनी समुद्री सुरक्षा, कूटनीति और ऊर्जा आपूर्ति की रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।

थानों में ताले!, चेकपोस्ट खाली… आखिर किस भरोसे रांची सुरक्षित?

Police Stations are Locked is Ranchi : झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों अपराध के बढ़ते ग्राफ को लेकर गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।

शहर में लगातार हत्या, गैंगवार, अपहरण, दुष्कर्म, गोलीबारी और चोरी जैसी वारदातें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था (Security System) किसके भरोसे चल रही है?

हैरानी की बात यह है कि शहर की प्रमुख चौक-चौराहों पर रात के समय पुलिस की मौजूदगी लगभग शून्य नजर आ रही है। जगह-जगह Barricading तो की गई है, लेकिन पुलिस जवानों की तैनाती कहीं दिखाई नहीं देती।

SSP के दावे और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर

12 फरवरी की देर रात रांची SSP राकेश रंजन ने खुद शहर का दौरा किया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि राजधानी के प्रमुख चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग कर जवानों की तैनाती की गई है और रातभर सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।

लेकिन न्यूज़ रैप के क्राइम रिपोर्टर की सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात की ग्राउंड रिपोर्ट ने इन दावों की पोल खोल दी।

रिपोर्टर ने रात 12 बजे से सुबह 4 बजे तक शहर के विभिन्न इलाकों का मुआयना किया, जहां चौक-चौराहों पर बैरिकेडिंग तो मिली, लेकिन पुलिसकर्मी नदारद दिखे।

इन इलाकों में पूरी तरह गायब रही पुलिस

ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान Radisson Blu से फिरायालाल चौक तक, हरमू चौक से रातू रोड चौक तक, मौलाना आजाद कॉलोनी से नामकुम तक, सदाबहार चौक से पुराने हाईकोर्ट तक और पटेल चौक से बहुबाजार चौक तक पुलिस का एक जवान तक तैनात नहीं मिला।

ना कोई गश्ती वाहन नजर आया, ना पीसीआर की सक्रियता।

डोरंडा में PCR जवान सोते मिले

कचहरी चौक से पहले और कांटाटोली चौक पर पीसीआर वाहन जरूर तैनात दिखा, लेकिन डोरंडा थाना क्षेत्र में मेकॉन लिमिटेड के पास खड़ी पीसीआर में जवान सोते नजर आए।

यह दृश्य राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

देर रात बंद मिले लोअर बाजार और अरगोड़ा थाना के गेट

मुआयना के दौरान Reporter जब लोअर बाजार थाना और अरगोड़ा थाना पहुंचे, तो वहां भारी लापरवाही देखने को मिली।

दोनों थानों के मुख्य गेट देर रात बंद मिले और ताला लटका हुआ था।

अब सवाल यह उठता है कि अगर रात में किसी पीड़ित को तत्काल मदद चाहिए, तो वह आखिर जाए कहां?

बैरिकेडिंग सिर्फ दिखावा, पुलिस तैनाती गायब

 

शहर में रेडिसन ब्लू से Firayalal Chowk तक कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई है, लेकिन पुलिस जवानों की तैनाती न के बराबर है।

कडरू ओवरब्रिज से सहजानंद चौक, किशोरगंज से रातू रोड, कचहरी चौक से लालपुर और नामकुम से डोरंडा तक कहीं भी पुलिस पेट्रोलिंग करती नहीं दिखी।

रात में सो रही रांची पुलिस, सुरक्षा के दावे हवा-हवाई

राजधानी की सुरक्षा Ranchi Police की जिम्मेदारी है, लेकिन हालात यह हैं कि रात में आम लोग जहां अपने घरों में सोते हैं, वहीं पुलिस भी गहरी नींद में नजर आती है। ऐसे में अपराधियों के हौसले बुलंद होना स्वाभाविक है।

इंसान जैसा रोबोट! छूने पर गर्म, देखने पर जिंदा, शंघाई में ‘MOYA’ ने मचाया हंगामा

‘MOYA’ Created a stir in Shanghai: चीन के शंघाई में दिखाया गया नया रोबोट Moya (मोया) इन दिनों खूब चर्चा में है। यह सिर्फ चलने-फिरने वाली मशीन नहीं है, बल्कि देखने और व्यवहार करने में लगभग इंसान जैसा लगता है।

पहली नजर में यह Robot कम और असली इंसान ज्यादा दिखता है। इसकी आंखों का हिलना, सिर घुमाना और हल्की मुस्कान लोगों को हैरान कर रही है।

छूने पर भी मिलता है इंसानी एहसास

मोया को इस तरह बनाया गया है कि सामने खड़ा व्यक्ति इसे मशीन न समझे। इसकी स्किन हल्की गर्म रखी गई है, ताकि छूने पर इंसानी जैसा एहसास हो।

जब कोई इससे बात करता है, तो यह आंखों से संपर्क बनाता है और सामने वाले की तरफ ध्यान से देखता है। यही वजह है कि लोग इसे देखकर दंग रह जा रहे हैं।

कैमरे और AI से चलता है पूरा सिस्टम

इस रोबोट के अंदर High-Tech Cameras और सेंसर लगे हैं, जो सामने वाले के चेहरे और हरकतों को पहचानते हैं। AI सिस्टम उस जानकारी को Process करता है और उसी हिसाब से रोबोट के चेहरे और शरीर की हलचल तय करता है।

बाहर से यह सब बहुत नेचुरल लगता है, लेकिन असल में यह पहले से सेट किए गए Pattern पर काम करता है -यह खुद कुछ महसूस नहीं करता।

अस्पताल और बुजुर्ग देखभाल में उपयोगी हो सकता है

कई Experts मानते हैं कि ऐसे रोबोट अस्पतालों, बुजुर्गों की देखभाल और कस्टमर सर्विस में काम आ सकते हैं। अगर मशीन इंसान जैसी लगे और बात करे, तो लोगों को ज्यादा सहज महसूस होगा।

लोग इमोशनल जुड़ाव बनाने लगे, यहीं बड़ा सवाल?

Social Media पर कुछ लोग इसे “कम्पैनियन रोबोट” की तरह देखने लगे हैं। जब रोबोट की स्किन गर्म हो और वह इंसान की तरह देखे और React करे, तो लोगों को अपनापन महसूस हो सकता है।

यहीं से बड़ा सवाल खड़ा होता है – क्या हम मशीनों से भावनात्मक रिश्ता बनाने की तरफ बढ़ रहे हैं?

अभी पूरी तरह इंसान जैसा दिमाग नहीं

तकनीकी तौर पर मोया अभी इंसानी सोच के करीब नहीं है। यह चेहरे के भाव और आवाज के Tone को पहचान सकता है, लेकिन गहरी भावनाएं समझना इसके लिए मुश्किल है। इसलिए यह फिलहाल सीमित कामों में ही ठीक से काम कर पाएगा।

घर-घर में दिखेगा या नहीं?

अभी ऐसे Robot बहुत महंगे हैं। इन्हें बनाने के लिए खास Hardware, sensors, and advanced AI systems चाहिए।

शुरुआत में ये रिसर्च सेंटर, अस्पताल या बड़े संस्थानों में ही दिखेंगे। बाद में टेक सस्ती होगी, तब आम लोगों तक पहुंच सकती है।

बड़े बदलाव पर बड़े सवाल?

मोया जैसे रोबोट दिखाते हैं कि मशीनें अब सिर्फ फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं रहीं। वे धीरे-धीरे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में आ रही हैं।

यह Technology फायदेमंद भी है, लेकिन डर भी है कि कहीं इंसानी रिश्तों की जगह मशीनें न ले लें। इस पर बहस अभी शुरू हुई है।

Epstein की डिनर पार्टी की तस्वीर से हड़कंप, मस्क और जकरबर्ग एक ही टेबल पर

Epstein Dinner Party Photo Sparks Uproar : जेफरी Epstein मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। अब एक पुरानी लेकिन बेहद सनसनीखेज तस्वीर सामने आई है, जिसने दुनियाभर में हलचल मचा दी है।

इस फोटो में दुनिया के दो बड़े टेक अरबपति Elon Musk और मार्क जकरबर्ग जेफरी Epstein की आलीशान Dinner Party में एक ही टेबल पर बैठे नजर आ रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह तस्वीर 2015 की बताई जा रही है, जब Epstein पहले ही यौन अपराध के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था।

यानी उस समय मस्क और जकरबर्ग को यह पता था कि एपस्टीन किस तरह के आरोपों का सामना कर रहा है, फिर भी वे उसकी पार्टी में शामिल हुए।

फोटो में क्या दिख रहा है?

सामने आई तस्वीर में Elon Musk Cameras की ओर देखते हुए दिख रहे हैं, जबकि मार्क जकरबर्ग कुछ गंभीर मुद्रा में बैठे नजर आते हैं।

बताया जा रहा है कि यह तस्वीर खुद एपस्टीन ने खींची थी और 3 अगस्त 2015 को अपने ही ईमेल पर भेजी थी।

Epstein ने बाद में दावा किया था कि इस पार्टी में LinkedIn के Co-founder Reid Hoffman और PayPal के को-फाउंडर पीटर थिएल भी मौजूद थे। एक अन्य ईमेल में इस पार्टी को “वाइल्ड” यानी बेहद रंगीन और विवादित बताया गया था।

मस्क के पुराने दावे पर सवाल

यह तस्वीर सामने आने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि Elon Musk पहले कह चुके थे कि वे कभी भी एपस्टीन की पार्टियों में शामिल नहीं हुए। 31 जनवरी को किए गए एक ट्वीट में मस्क ने यहां तक कहा था कि एपस्टीन से जुड़े अपराधियों पर मुकदमा चलना चाहिए।

अब यह तस्वीर उनके दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है, क्योंकि इसमें वे साफ तौर पर एपस्टीन की पार्टी में बैठे नजर आ रहे हैं।

एपस्टीन फाइल्स में और भी बड़े नाम

एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों में सिर्फ मस्क और जकरबर्ग ही नहीं, बल्कि कई और बड़े चेहरों के नाम भी सामने आए हैं। Microsoft के Co-founder Bill Gates का नाम भी एपस्टीन फाइल्स में आया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे भी एपस्टीन की पार्टियों में शामिल हुए थे और रूसी लड़कियों से मुलाकात की थी।

कुछ दस्तावेजों में यह भी दावा किया गया है कि एपस्टीन ने गेट्स के लिए दवाओं का इंतजाम किया था, ताकि संबंध बनाने के बाद उन्हें किसी बीमारी का सामना न करना पड़े।

गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन का नाम भी इन फाइल्स में सामने आया है।

कहा गया है कि उन्होंने एपस्टीन के निजी द्वीप का दौरा किया था और वहां घिसलेन मैक्सवेल से मुलाकात की थी। 2003 के एक ईमेल में मैक्सवेल ने उस डिनर को “सामान्य और आरामदायक” बताया था।

मामला क्यों गंभीर हो रहा है?

नई तस्वीर ने यह बहस फिर से तेज कर दी है कि क्या बड़े अरबपतियों को एपस्टीन के अपराधों की पूरी जानकारी थी और फिर भी वे उसके करीब रहे। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कुछ प्रभावशाली लोग इस पूरे मामले से अब तक बचते आए हैं।

फिलहाल इस मामले पर जांच और चर्चा दोनों तेज हो गई हैं, और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव में हलचल तेज, रांची से 13 वकील मैदान में

Jharkhand State Bar Council elections : झारखंड स्टेट बार काउंसिल के Elections को लेकर माहौल गरमा गया है। Ranchi District Bar Association से इस बार तीन महिला वकीलों समेत कुल 13 अधिवक्ता चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं।

नामांकन के पहले दिन मंगलवार को 8 अधिवक्ताओं ने अपना पर्चा दाखिल कर दिया, जबकि बाकी उम्मीदवार बुधवार को नामांकन करेंगे।

पहले दिन किसने भरा नामांकन?

मंगलवार को सबसे पहले अधिवक्ता अनिल कुमार सिंह महाराणा ने अपना नामांकन दाखिल किया।

नामांकन के बाद उन्होंने कहा कि उनका मकसद वकीलों के हितों की रक्षा करना, बार काउंसिल की गरिमा बढ़ाना और युवा अधिवक्ताओं के लिए बेहतर मौके उपलब्ध कराना है।

इसके अलावा डॉ. रबिंद्र कुमार, पवन रंजन खत्री, रवि रंजन, अभिषेक कुमार भारती, मुमताज अहमद खान, भरत चंद्र महतो और महिला अधिवक्ता ज्योति आनंद ने भी नामांकन दाखिल किया।

इन सभी ने कहा कि अगर उन्हें मौका मिलता है तो वे अधिवक्ताओं की समस्याएं दूर करने, कल्याणकारी योजनाएं लागू कराने और न्यायिक प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में काम करेंगे।

आज और नामांकन, मुकाबला होगा दिलचस्प

निवर्तमान सदस्य संजय कुमार विद्रोही और प्रितांशु कुमार सिंह समेत अन्य उम्मीदवार बुधवार को अंतिम दिन अपना नामांकन दाखिल करेंगे। माना जा रहा है कि मुकाबला इस बार काफी कड़ा और दिलचस्प होगा।

कब होगा मतदान?

State Bar Council के लिए 12 मार्च को मतदान होगा। इसके लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। पूरे राज्य के अधिवक्ता इस चुनाव में वोट डालेंगे।

कितने वोटर तय करेंगे किस्मत?

झारखंड में कुल 25,001 अधिवक्ता मतदाता हैं।

हाईकोर्ट के मतदाता: 4,665

रांची जिला बार के मतदाता: 3,539