West Bengal politics : सुप्रीम कोर्ट (SC) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि किसी मुख्यमंत्री का केंद्रीय एजेंसी की जांच में हस्तक्षेप करना एक “असाधारण स्थिति” है और यह लोकतंत्र के लिए खतरा पैदा करता है।
यह टिप्पणी उस समय आई, जब कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। ED ने ममता बनर्जी और राज्य के कुछ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। एजेंसी का आरोप है कि छापेमारी के दौरान जांच में बाधा डाली गई।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि इस मामले को केवल केंद्र और राज्य के बीच का विवाद नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ कहा कि वह राज्य में हो रही वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं कर सकता।
कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों को कथित रूप से घेरने और बंधक बनाने की घटनाओं पर भी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाएं गंभीर हैं और इन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान Solicitor General Tushar Mehta ने आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान मिली आपत्तिजनक सामग्री को मुख्यमंत्री अपने साथ ले गईं। इस पर Court ने सवाल उठाया कि क्या कोई मंत्री जांच में हस्तक्षेप कर सकता है और इसे सिर्फ केंद्र-राज्य विवाद बता सकता है।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत नहीं, बल्कि अनुच्छेद 131 के तहत सुना जाना चाहिए। उनका कहना था कि यह केंद्र और राज्य के बीच का मामला है।
Court ने इस दलील पर भी सवाल उठाए और कहा कि मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं। यह कोई साधारण मामला नहीं, बल्कि एक असाधारण स्थिति है, जहां जमीनी हकीकत को ध्यान में रखना जरूरी है।

