Women Reservation Bill: संसद में शुक्रवार को एकजुट विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “अंतरात्मा की आवाज़ पर वोट” देने की आखिरी समय की अपील और गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। दरअसल महिला आरक्षण बिल में यह प्रावधान जोड़ने की बात कही गई थी कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी। इस मुद्दे पर संसद में एनडीए को हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही विपक्ष ने सरकार को 12 साल में पहली बार विधायी हार का सामना करने पर मजबूर कर दिया क्योंकि प्रस्तावित कानून सदन में जरूरी दो-तिहाई वोट हासिल नहीं कर सका।
जरूरी वोट नहीं जुटा पाया महिला आरक्षण बिल
महिला आरक्षण बिल यानी संविधान के 131वें संशोधन से जुड़े इस प्रस्ताव के समर्थन में 298 वोट पड़े जबकि विरोध में 230 वोट दिए गए। बिल को पास कराने के लिए करीब 352 वोटों की जरूरत थी। बिल पास नहीं होने पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस मुख्य प्रस्ताव से जुड़े दो अन्य बिल भी वापस ले लिए जाएंगे। इनमें परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव भी शामिल है।
उन्होंने कहा,
“विपक्ष ने महिलाओं को सम्मान देने का ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। जब तक महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण नहीं मिल जाता, हम चैन से नहीं बैठेंगे।”
फडणवीस बोले — विपक्ष ने राजनीति चुनी
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा,
“उन्होंने प्रगति के बजाय राजनीति को चुना। उनका विरोध साफ दिखाता है कि वे आखिर किसके हित में काम कर रहे हैं।”
वोटिंग से पहले पीएम मोदी की भावुक अपील
वोटिंग से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसदों से अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि सांसद अपने परिवार की महिलाओं को याद करें और महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए सर्वसम्मति से बिल पास करें।
पीएम मोदी ने कहा,
“सरकार ने इस कानून से जुड़ी सभी आशंकाओं और गलतफहमियों को दूर कर दिया है। सभी चिंताओं का समाधान कर दिया गया है।” हालांकि यह पहली बार है जब मोदी सरकार का कोई बड़ा विधेयक संसद में पास नहीं हो सका। इससे पहले सरकार ने कृषि कानून जैसे मामलों में प्रस्ताव वापस लिया था, लेकिन संसद में हार का सामना नहीं करना पड़ा था।
विपक्ष का पलटवार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा,
“प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की महिला आरक्षण को परिसीमन प्रस्ताव से जोड़ने की कोशिश लोकसभा में ऐतिहासिक रूप से फेल हो गई है।”
ममता बनर्जी ने जताई चिंता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा,
“बीजेपी महिला आरक्षण के साथ परिसीमन बिल जोड़कर लोकसभा सीटों की संख्या करीब 850 तक बढ़ाना चाहती है। इससे देश टुकड़ों में बंट जाएगा।” उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी महिला आरक्षण का समर्थन करती है लेकिन परिसीमन के नाम पर साजिश मंजूर नहीं है।
स्टालिन का बड़ा बयान
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने कहा,
“तमिलनाडु ने दिल्ली को हरा दिया है। 23 अप्रैल को हम दिल्ली के अहंकार को और उसका समर्थन करने वालों को भी हराएंगे।”
केजरीवाल बोले — मोदी के अहंकार की हार
आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा,
“संसद में परिसीमन बिल फेल हुआ। यह मोदी के अहंकार की हार है।”
क्या विपक्ष महिला विरोधी है
यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान के एक दिन बाद सामने आया जिसमें उन्होंने विपक्ष से समर्थन की अपील की थी और चेतावनी दी थी कि अगर बिल का समर्थन नहीं हुआ तो विपक्ष को महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। अमित शाह ने दो दिनों की बहस के बाद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार हर राज्य में लोकसभा सीटों को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दक्षिण भारत के साथ भेदभाव के आरोपों को भी खारिज किया।
महिला सांसदों का विरोध प्रदर्शन
बिल पास न होने के बाद बीजेपी और एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में हल्की बारिश के बीच विरोध प्रदर्शन किया। बीजेपी ने कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के अन्य दलों को महिला विरोधी करार दिया। एनडीए नेताओं की बैठक भी हुई और विपक्ष के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है और इसे फिर से लाया जाएगा।

