Ranchi News: रसोई गैस की किल्लत का असर अब शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक साफ दिखने लगा है। गैस की अनिश्चित आपूर्ति के बीच लोग फिर से पारंपरिक साधनों की ओर लौटने लगे हैं। घरों और होटलों में अब खाना बनाने के लिए कोयला और लकड़ी का इस्तेमाल बढ़ गया है।
इस बढ़ती मांग का सीधा असर बाजार पर पड़ा है, जहां कोयले की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।
कोयले की कीमतों में बड़ा उछाल
होटल संचालक इरफान के मुताबिक पहले कोयला करीब 200 रुपये प्रति बोरा मिलता था, जो अब बढ़कर 400 से 500 रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि पहले कोयले की कीमत 7 से 8 रुपये प्रति किलो थी, लेकिन अब यह बढ़कर 15 से 18 रुपये प्रति किलो हो गई है।
होटल और ठेले वालों की बढ़ी निर्भरता
गैस की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल और ठेला-खोमचा चलाने वालों पर पड़ा है। मजबूरी में अब ये लोग बड़े पैमाने पर कोयले का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।
कर्बला चौक के टाल संचालक आनंद तिवारी बताते हैं कि फिलहाल वह कोयला करीब 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे हैं। उनके अनुसार सबसे ज्यादा खरीदारी होटल और ठेला-खोमचा वाले ही कर रहे हैं।
पारंपरिक व्यवस्था की ओर वापसी
रसोई गैस की किल्लत के चलते लोग एक बार फिर पुराने तरीकों को अपनाने लगे हैं। लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना अब आम होता जा रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां गैस की सप्लाई प्रभावित है।
हालांकि, इससे लोगों की परेशानी भी बढ़ी है, क्योंकि न सिर्फ मेहनत ज्यादा लग रही है बल्कि ईंधन की लागत भी तेजी से बढ़ रही है।

