Ranchi Crime News: झारखंड में बिजली और पर्यटन विभाग से जुड़े 116 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित घोटाले में CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना निवासी अराध्य सेनगुप्ता उर्फ अर्नव गांगुली के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में आरोपी की 9 करोड़ रुपये की हेराफेरी में संलिप्तता सामने आई है। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है।
फर्जी दस्तावेजों से रची गई साजिश
CID की जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी संस्थाओं को निशाना बनाया। इसके तहत Jharkhand Tourism Development Corporation Limited, Jharkhand Urja Utpadan Nigam Limited और Jharkhand State Electricity Employees Master Trust से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। नकली लेटरहेड, फर्जी हस्ताक्षर और जाली आदेश पत्रों के जरिए बैंकों में ऐसे खाते खोले गए, जो सरकारी खातों जैसे दिखते थे।
करोड़ों की हेराफेरी का खुलासा
जांच में सामने आया कि पर्यटन विभाग से करीब 10.40 करोड़ रुपये और बिजली विभाग व मास्टर ट्रस्ट से करीब 106 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। इस पूरे घोटाले की शुरुआत फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकिंग सिस्टम का दुरुपयोग कर की गई।
2024 में दर्ज हुआ था मामला
इस मामले को लेकर वर्ष 2024 में धुर्वा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे CID ने टेकओवर कर लिया और गहन जांच शुरू की।
कई अधिकारी और बैंक कर्मी जांच के घेरे में
इस घोटाले में कई अधिकारियों, बैंक कर्मियों और बिचौलियों की भूमिका सामने आई है। इनमें JTDCL के अधिकारी गिरिजा प्रसाद, आलोक कुमार, केनरा बैंक के सीनियर मैनेजर अमरजीत कुमार, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारी लोलस लकड़ा और स्वेता भगत समेत कई अन्य शामिल हैं। इसके अलावा बिचौलिया लोकेश्वर साह उर्फ लोकेश, समीर कुमार उर्फ रुद्र, नीलू नायक, संदीप कुमार, कुशल बनर्जी उर्फ अमित मुखर्जी, अरुण पांडेय, रोशन कुमार चतुर्वेदी और अमन कुमार शिर्सवाल के नाम भी सामने आए हैं।
जांच जारी, और खुलासे संभव
CID का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

