दोगुने दाम पर यूरिया खरीदने की मजबूरी, अब भारत ने निकाला होर्मुज संकट का तोड़; रूस करेगा मदद

Iran and US War: ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में संकट का असर सिर्फ तेल और गैस पर ही नहीं, बल्कि उर्वरकों की सप्लाई पर भी पड़ा है। भारत को हाल ही में यूरिया दोगुनी कीमत पर खरीदना पड़ा। अब इस समस्या से निपटने के लिए भारत ने बड़ा कदम उठाया है। खबर है कि भारत और रूस मिलकर 2 अरब डॉलर की लागत से नया यूरिया उत्पादन संयंत्र लगाने की तैयारी कर रहे हैं।

भारत-रूस मिलकर लगाएंगे यूरिया प्लांट

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट भारत और रूस के बीच उर्वरक क्षेत्र का बड़ा समझौता माना जा रहा है। यह संयंत्र रूस की यूरालकेम और भारत की इंडियन पोटाश, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) और नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (NFL) के संयुक्त उद्यम के रूप में लगाया जाएगा। संभावना है कि यह प्लांट रूस के टोलियाट्टी शहर में स्थापित होगा।

दो साल में तैयार हो सकता है प्लांट

इंडियन पोटाश के प्रबंध निदेशक पीएस गहलौत ने बताया कि यूरिया संयंत्र अगले दो साल के भीतर तैयार हो सकता है। प्रस्तावित प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता 20 लाख टन यूरिया होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि सरकारी कंपनी प्रोजेक्ट्स एंड डेवलपमेंट इंडिया, जो इस संयुक्त उद्यम की सलाहकार है, उसने प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट भी सौंप दी है। अब इंडियन पोटाश, RCF और NFL जल्द इस रिपोर्ट पर अंतिम फैसला ले सकते हैं।

भारत के लिए बनेगा स्थायी सप्लाई स्रोत

गहलौत के मुताबिक, यह नया संयंत्र भारत के लिए यूरिया की सुनिश्चित सप्लाई का मजबूत स्रोत बनेगा। इससे भविष्य में वैश्विक संकट के दौरान भारत को महंगे दाम पर यूरिया खरीदने की मजबूरी कम हो सकती है।

दोगुनी कीमत पर खरीदना पड़ा यूरिया

23 अप्रैल को रॉयटर्स की रिपोर्ट में बताया गया था कि मध्य पूर्व संघर्ष की वजह से सप्लाई में रुकावट आई। इसके चलते भारत ने इस साल की शुरुआत में चुकाई गई कीमत से लगभग दोगुनी कीमत पर यूरिया आयात करने पर सहमति दी। भारत एक ही टेंडर में रिकॉर्ड 25 लाख मीट्रिक टन यूरिया आयात करने जा रहा है। यह देश के सालाना यूरिया आयात का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है।

दूसरे देशों को हो सकती है किल्लत

मुंबई के उर्वरक उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि भारत ने अपनी सप्लाई तो सुरक्षित कर ली है, लेकिन अब दूसरे देशों को यूरिया के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है। क्योंकि उत्पादकों ने अपनी बड़ी खेप भारत को देने का फैसला कर लिया है। इससे वैश्विक बाजार में सप्लाई और कम हो सकती है और कीमतें और बढ़ सकती हैं।

भारत की आयात पर निर्भरता बढ़ रही

भारत दुनिया का सबसे बड़ा यूरिया आयातक है। देश में यूरिया उत्पादन काफी हद तक प्राकृतिक गैस पर निर्भर है, जिसका बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है। रेटिंग एजेंसी ICRA का अनुमान है कि 2030 तक भारत की कुल खपत में यूरिया आयात पर निर्भरता बढ़कर करीब 30% तक पहुंच सकती है। इसी वजह से भारत अब रूस, बेलारूस और मोरक्को जैसे देशों से उर्वरक आयात बढ़ाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

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