ट्रंप पर हमले से ज्यादा खतरनाक निकलीं अफवाहें, किसी ने इजरायल को जिम्मेदार बताया तो किसी ने कहा सरकारी स्टंट

Washington: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हमले की कोशिश के बाद सोशल मीडिया पर सच से ज्यादा झूठ तेजी से फैलने लगा। घटना के कुछ ही मिनटों में कई तरह की साजिश वाली थ्योरी सामने आ गईं, जिनमें किसी ने इसे ट्रंप का खुद का ड्रामा बताया तो किसी ने इजरायल की साजिश कहा। असल घटना से ज्यादा चर्चा इन अफवाहों की होने लगी, जिसने एक बार फिर गलत सूचना के बढ़ते खतरे को सामने ला दिया।

हमले के बाद 4 बड़े झूठ फैलाए गए

पहला दावा यह किया गया कि ट्रंप ने अपनी गिरती लोकप्रियता सुधारने के लिए पूरी घटना खुद रची। दूसरा दावा था कि इस हमले के पीछे इजरायल का हाथ है। तीसरे झूठ में एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें हमलावर जैसा दिखने वाला एक शख्स इजरायली सेना (IDF) की स्वेटशर्ट पहने नजर आया। दावा किया गया कि यह तस्वीर उसके डिलीट किए गए इंस्टाग्राम अकाउंट से ली गई है। चौथा दावा यह फैलाया गया कि गोलीबारी से पहले इजरायल में हमलावर कोल एलन के नाम को हजारों बार सर्च किया गया था।

गलत सूचना अब सबसे बड़ा संकट

पहले लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना मुश्किल होता था, लेकिन अब सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोगों तक बहुत तेजी से गलत जानकारी पहुंच रही है। लोग अब यह समझने में उलझे रहते हैं कि कौन सी खबर सही है और कौन सी फर्जी। DISA 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन मौजूद 62% सामग्री गलत या भ्रामक श्रेणी में आ चुकी है। न्यूजगार्ड के अनुसार, मई 2025 तक 1,200 से ज्यादा AI से बनाई गई फर्जी न्यूज वेबसाइट्स सक्रिय थीं। यूरोपीय संसद का अनुमान है कि 2026 तक डीपफेक वीडियो की संख्या 80 लाख से ज्यादा हो सकती है।

WEF ने गलत सूचना को बताया सबसे बड़ा खतरा

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2026 में कहा गया है कि सभ्यता के सामने सबसे बड़ा अल्पकालिक खतरा युद्ध, जलवायु परिवर्तन या आर्थिक संकट नहीं, बल्कि गलत सूचना और भ्रामक जानकारी है। रिपोर्ट के अनुसार, झूठ इतनी तेजी से फैल रहा है कि उसे रोकने वाले सिस्टम पीछे छूटते जा रहे हैं।

सच क्या है?

यह तय है कि ट्रंप के करीब गोलीबारी की घटना वास्तविक थी। कोल एलन नाम का व्यक्ति भी वास्तविक है। एक सीक्रेट सर्विस एजेंट को सीने में गोली लगी थी, लेकिन बुलेटप्रूफ जैकेट की वजह से उसकी जान बच गई। यानी घटना सच थी, लेकिन उसके आसपास फैलाई गई कई कहानियां झूठी थीं।

लोग इतनी जल्दी झूठ पर भरोसा क्यों करते हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में सिर्फ 16% लोग अपनी संघीय सरकार पर भरोसा करते हैं, जबकि सिर्फ 26% लोग बड़े समाचार मीडिया पर विश्वास करते हैं। ऐसे माहौल में जब लोगों का सिस्टम पर भरोसा कम हो, तब साजिश की थ्योरी तेजी से फैलती है। विशेषज्ञों का कहना है कि झूठ फैलाने वाले टूल अब ज्यादा तेज, सस्ते और असरदार हो गए हैं, जबकि उन्हें पकड़ने वाले सिस्टम कमजोर पड़ते जा रहे हैं। यही वजह है कि आज गलत सूचना सिर्फ एक अफवाह नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है।

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