Legislative Assembly Election: पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस बार वोटिंग ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पश्चिम बंगाल में पहले चरण के दौरान शाम 7 बजे तक 91.83% मतदान हुआ, जबकि तमिलनाडु में इसी समय तक 84.73% वोटिंग दर्ज की गई। ये दोनों राज्यों में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान प्रतिशत है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस पर खुशी जताते हुए कहा कि दोनों राज्यों के मतदाताओं को सलाम है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के बाद पहली बार इतना ज्यादा मतदान हुआ है और चुनाव आयोग हर वोटर को नमन करता है।
पिछले चुनाव के मुकाबले काफी बढ़ी वोटिंग
आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में इस बार 84.73% मतदान हुआ, जो 2021 के 71.8% से करीब 12.8% ज्यादा है। वहीं पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 91.83% वोटिंग हुई, जो 2021 के 84.6% से लगभग 7% ज्यादा है। शाम 5 बजे तक ही पश्चिम बंगाल में 89.93% मतदान हो चुका था, जो 2021 के 77.99% के मुकाबले करीब 11.91% ज्यादा था। इससे साफ है कि इस बार लोगों में वोटिंग को लेकर खासा उत्साह देखा गया।
ज्यादा वोटिंग से किसे होगा फायदा?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में हुई वोटिंग का फायदा किसी एक पार्टी को ज्यादा मिल सकता है। अगर ऐसा होता है, तो किसी दल की बड़ी जीत तय मानी जा सकती है। अब सबकी नजर 4 मई पर है, जब नतीजे सामने आएंगे। तभी पता चलेगा कि जनता ने बदलाव के लिए वोट किया है या फिर मौजूदा सरकार को ही दोबारा मौका दिया है। फिलहाल, भीषण गर्मी के बावजूद लोगों का घरों से निकलकर वोट डालना राज्य की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है।
उत्तर बंगाल में पहले बीजेपी का रहा दबदबा
अगर पिछले चुनाव की बात करें तो 2021 में उत्तर बंगाल की 54 सीटों पर बीजेपी का मजबूत प्रदर्शन रहा था। पार्टी ने कूचबिहार उत्तर, अलीपुरद्वार और फालाकाटा जैसी सीटों पर बड़ी जीत दर्ज की थी। कालचीनी सीट पर तो बीजेपी की जीत का अंतर करीब 15% तक रहा था। इसकी एक बड़ी वजह राजबंशी और मतुआ समुदाय का समर्थन था। साथ ही चाय बागान मजदूरों के मुद्दों ने भी बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाया था। वहीं टीएमसी इस इलाके में सिर्फ 5 सीटें ही जीत पाई थी, वो भी कम अंतर से।

