UAE: खाड़ी क्षेत्र के अहम देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने तेल उत्पादक देशों के बड़े संगठन OPEC और OPEC+ से बाहर निकलने का आधिकारिक फैसला कर लिया है। UAE का यह कदम काफी चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि इससे दशकों से चले आ रहे वैश्विक तेल संतुलन में बड़ा बदलाव आ सकता है। इस फैसले का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
59 साल पुराना साथ क्यों टूटा?
UAE साल 1967 से OPEC का सदस्य रहा है। यानी लगभग 59 साल पुराना साथ अब खत्म हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। UAE लंबे समय से ज्यादा तेल उत्पादन करना चाहता था, क्योंकि उसके पास उत्पादन बढ़ाने की पूरी क्षमता है। लेकिन OPEC के नियमों के कारण वह अपनी मर्जी से तेल उत्पादन नहीं बढ़ा पा रहा था। यही सबसे बड़ी वजह बनी।
ईरान तनाव ने और बढ़ाई परेशानी
दूसरी तरफ, ईरान के साथ बढ़ता तनाव और खाड़ी क्षेत्र में अस्थिर हालात ने भी इस फैसले को तेज कर दिया। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बीच UAE ने अपना रास्ता अलग कर लिया, जिससे तेल की वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ी चिंता
यह फैसला ऐसे समय आया है जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर गंभीर तनाव बना हुआ है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव की वजह से यहां रुकावटें पैदा हो रही हैं। तेल ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है, जिससे सप्लाई चेन पर असर पड़ रहा है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत जैसे बड़े तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह खबर राहत भी हो सकती है और चिंता भी बढ़ा सकती है। अगर UAE OPEC से बाहर आने के बाद अपना तेल उत्पादन बढ़ाता है, तो कच्चे तेल की कीमतें नीचे आ सकती हैं। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की संभावना बन सकती है। लेकिन दूसरी तरफ OPEC में फूट और मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध जैसे हालात बाजार में अस्थिरता भी बढ़ा सकते हैं।
सस्ता तेल या बढ़ती चिंता?
ईरान-इजरायल तनाव, अमेरिका की भूमिका और खाड़ी क्षेत्र की अस्थिरता पहले ही वैश्विक बाजार को प्रभावित कर रही है। ऐसे में UAE का OPEC छोड़ना आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि UAE आगे कितना उत्पादन बढ़ाता है और इसका भारत की जेब पर कितना असर पड़ता है।

