ट्रंप ने यूक्रेन से हाथ खींचे तो यूरोप पर बढ़ा बोझ, एक साल में 9 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च

Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI): रूस-यूक्रेन युद्ध को 4 साल हो चुके हैं। वहीं अमेरिका-इजरायल, ईरान तनाव, चीन-ताइवान विवाद और भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया भर में रक्षा खर्च को तेजी से बढ़ा दिया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनियाभर की सरकारों ने सेना पर 2.9 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए। यह 2024 के मुकाबले 2.9% ज्यादा है। यह लगातार 11वां साल है जब मिलिट्री खर्च में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

ट्रंप के फैसले से यूरोप पर बढ़ा दबाव

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका ने यूक्रेन के लिए नई सैन्य मदद को मंजूरी नहीं दी। इसका सीधा असर यूरोप पर पड़ा। 2024 में यूरोप ने 694 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए थे, जो 2025 में बढ़कर 792 अरब डॉलर हो गए। यानी सिर्फ एक साल में 98 अरब डॉलर (करीब 9.25 लाख करोड़ रुपये) ज्यादा खर्च करना पड़ा। यानी ट्रंप के फैसले के बाद यूरोप की जेब पर बड़ा असर पड़ा।

अमेरिका का सैन्य खर्च घटा

2025 में अमेरिका का सैन्य खर्च 7.5% घटकर 954 अरब डॉलर रह गया। इसकी सबसे बड़ी वजह यूक्रेन को नई सैन्य सहायता नहीं देना रही। हालांकि इससे पहले तीन सालों में अमेरिका यूक्रेन को 127 अरब डॉलर की मदद दे चुका था। फिर भी अमेरिका ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन को रोकने और पश्चिमी गोलार्ध में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए रक्षा क्षमताओं पर निवेश जारी रखा।

2026 में फिर बढ़ सकता है अमेरिकी खर्च

SIPRI के प्रोग्राम डायरेक्टर नान तियान के मुताबिक, अमेरिका में रक्षा खर्च में आई यह कमी अस्थायी है। उन्होंने बताया कि 2026 के लिए अमेरिकी संसद ने 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा रक्षा बजट को मंजूरी दी है, जो 2027 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

रूस और यूक्रेन दोनों का रिकॉर्ड खर्च

2025 में रूस का सैन्य खर्च 5.9% बढ़कर 190 अरब डॉलर हो गया। वहीं यूक्रेन ने 20% बढ़ोतरी के साथ 84.1 अरब डॉलर खर्च किए। यूक्रेन अपनी GDP का 40% सिर्फ सेना पर खर्च कर रहा है, जो बेहद बड़ा आंकड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर युद्ध जारी रहता है तो 2026 में दोनों देशों का रक्षा खर्च और बढ़ सकता है।

NATO देशों ने भी बढ़ाया बजट

2025 में NATO के 29 यूरोपीय देशों ने मिलकर 559 अरब डॉलर खर्च किए। जर्मनी ने अपना रक्षा बजट 24% बढ़ाकर 114 अरब डॉलर कर दिया, जबकि स्पेन ने 50% बढ़ोतरी के साथ 40.2 अरब डॉलर खर्च किए। रिपोर्ट के अनुसार, 1953 के बाद NATO देशों में रक्षा खर्च की यह सबसे तेज बढ़ोतरी है।

मिडिल ईस्ट में भी बढ़ा सैन्य खर्च

मिडिल ईस्ट में कुल रक्षा खर्च सिर्फ 0.1% बढ़ा, लेकिन इजरायल और तुर्की ने अपने खर्च में बड़ी बढ़ोतरी की। इजरायल का सैन्य खर्च 4.9% बढ़कर 48.3 अरब डॉलर हो गया, जबकि तुर्की ने 7.2% बढ़ोतरी के साथ 30 अरब डॉलर खर्च किए। वहीं ईरान का खर्च लगातार दूसरे साल घटा और 7.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

भारत-चीन-पाकिस्तान ने भी बढ़ाया खर्च

चीन ने 2025 में अपना सैन्य खर्च 7.4% बढ़ाकर 336 अरब डॉलर कर दिया। यह लगातार 31वां साल है जब चीन ने रक्षा बजट बढ़ाया है। भारत ने 92.1 अरब डॉलर रक्षा पर खर्च किए, जो 2024 के मुकाबले 8.9% ज्यादा है। भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बना हुआ है। पाकिस्तान का रक्षा खर्च 11% बढ़कर 11.9 अरब डॉलर पहुंच गया। भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले साल बढ़े तनाव और सैन्य टकराव के बाद दोनों देशों के रक्षा बजट में बढ़ोतरी देखी गई।

2026 में भी जारी रह सकती है बढ़ोतरी

SIPRI के रिसर्चर शियाओ लियांग के मुताबिक, दुनिया में बढ़ती जंग, अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल तनाव की वजह से देश लगातार हथियारों और सेना पर ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 और उसके बाद भी रक्षा खर्च में बढ़ोतरी जारी रह सकती है।

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