Iran and Israel War: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि उनका देश अपने परमाणु अधिकारों पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती देते हुए कहा कि किसी भी देश को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि ईरान क्या कर सकता है और क्या नहीं। राष्ट्रपति पेजेशकियान ने कहा —
“ट्रंप कहते हैं कि ईरान अपने न्यूक्लियर अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता, लेकिन यह नहीं बताते कि आखिर किस जुर्म में। वो कौन होते हैं किसी देश के अधिकार छीनने वाले।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है।
परमाणु हथियार पर टकराव जारी
अमेरिका का कहना है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना चाहता है। वहीं ईरान लगातार यह कह रहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा, लेकिन अपने न्यूक्लियर कार्यक्रम पर किसी भी तरह की पाबंदी स्वीकार नहीं करेगा। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यह उसका अधिकार है।
“ईरान जंग नहीं चाहता, लेकिन पीछे नहीं हटेगा”
राष्ट्रपति पेजेशकियान ने यह भी कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता। लेकिन अगर उस पर दबाव बनाया गया तो वह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के लिए कदम उठा रहा है और कोशिश कर रहा है कि यह टकराव सम्मानजनक तरीके से खत्म हो। ईरान का मौजूदा रुख दो हिस्सों में नजर आ रहा है। एक तरफ वह बातचीत के लिए तैयार है। दूसरी तरफ वह यह भी संकेत दे रहा है कि जरूरत पड़ी तो वह मुकाबले के लिए तैयार है।
अमेरिका पर समुद्री डकैती का आरोप
हाल के दिनों में ईरान की तरफ से कुछ नरम संकेत भी मिले हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज स्ट्रेट को कमर्शियल जहाजों के लिए खोलने की बात कही थी। लेकिन इसके तुरंत बाद ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अलग रुख अपनाते हुए पाबंदी जारी रखने की बात कही। साथ ही अमेरिका पर समुद्र में डकैती यानी पायरेसी का आरोप लगाया।
बातचीत की तैयारी, लेकिन सख्त संदेश
अलग-अलग बयानों से साफ है कि ईरान इस पूरे मामले में अपने पास ज्यादा विकल्प रखना चाहता है। वह एक तरफ बातचीत में मजबूत स्थिति बनाना चाहता है। दूसरी तरफ दबाव भी बनाए रखना चाहता है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का एक और दौर होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में राष्ट्रपति पेजेशकियान का यह बयान साफ संकेत माना जा रहा है कि ईरान बातचीत करेगा, लेकिन अपने अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

