Middle East War: मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका-इजरायल के बीच टकराव की वजह से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों और कार्गो जहाजों पर हमलों की खबरों ने हालात और तनावपूर्ण बना दिए हैं।
ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि इस अहम समुद्री रास्ते पर किस देश का अधिकार है, क्या यहां से गुजरने वाले जहाजों को कोई टैक्स देना पड़ता है और इसका संचालन कैसे होता है।
दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना गहरा है कि दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर भी आसानी से गुजर सकते हैं। इस रास्ते का इस्तेमाल मिडिल-ईस्ट के बड़े तेल और गैस उत्पादक देश करते हैं। इनमें इराक, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं। यहां से निकला तेल एशिया, यूरोप और दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंचता है।
किस देश का कितना हक
संयुक्त राष्ट्र के समुद्री नियमों के मुताबिक कोई भी देश अपनी तटरेखा से करीब 12 समुद्री मील तक के समुद्री क्षेत्र पर नियंत्रण रख सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का सबसे संकरा हिस्सा पूरी तरह ईरान और ओमान के क्षेत्रीय जल में आता है। इस वजह से यहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट की जिम्मेदारी भी मुख्य रूप से इन दोनों देशों की मानी जाती है।
कैसे होता है इस समुद्री रास्ते का मैनेजमेंट
इस जलडमरूमध्य का संचालन अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और सैन्य निगरानी के मिश्रण से होता है। यह नियम संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून समझौते (UNCLOS) के तहत तय किए गए हैं। इन नियमों के मुताबिक किसी भी देश को अपने जलक्षेत्र से गुजरने वाले विदेशी जहाजों को सुरक्षित ट्रांजिट देने की अनुमति देनी होती है।
हालांकि, ईरान ने इस संधि पर हस्ताक्षर तो किए थे, लेकिन उसके संसद ने इसे पूरी तरह मंजूरी नहीं दी है।
क्या जहाजों को देना पड़ता है कोई टैक्स या टोल
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है, इसलिए सामान्य हालात में यहां से गुजरने वाले जहाजों से कोई टोल या शुल्क नहीं लिया जाता। कुछ रिपोर्ट्स में यह जरूर कहा गया है कि ईरान की संसद में ऐसा कानून लाने की चर्चा है, जिससे जहाजों से टोल वसूला जा सके। लेकिन अभी तक ऐसा कोई नियम लागू नहीं हुआ है।
क्यों नहीं लगाया जा सकता टोल
अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक प्राकृतिक समुद्री रास्तों पर टोल नहीं लगाया जा सकता। टोल आम तौर पर मानव-निर्मित नहरों जैसे स्वेज नहर और पनामा नहर पर लिया जाता है, क्योंकि ये पूरी तरह एक ही देश के नियंत्रण में होती हैं।
अगर कोई देश इस अंतरराष्ट्रीय मार्ग पर जबरन टोल लगाने या आवाजाही रोकने की कोशिश करता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाएगा और अन्य देश हस्तक्षेप कर सकते हैं।

