Mumbai : अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को समय से पहले रिहाई की मांग में बड़ा झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसकी याचिका खारिज करते हुए किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस कमल खाता की खंडपीठ ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सलेम को सजा में किसी प्रकार की छूट नहीं दी जा सकती।
केंद्र और राज्य सरकार का विरोध
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह सुनवाई योग्य नहीं है। वहीं, राज्य सरकार ने भी सलेम के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों का हवाला देते हुए रिहाई का विरोध किया। अबू सलेम 1993 के मुंबई बम धमाकों सहित कई गंभीर मामलों में दोषी है। उसके खिलाफ आतंकवाद, हत्या और जबरन वसूली जैसे आरोप हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अपराधों को देखते हुए उसे किसी तरह की रियायत नहीं दी जा सकती।
25 साल की सजा की शर्त
सलेम को पुर्तगाल से प्रत्यर्पण के बाद भारत लाया गया था, जहां समझौते के तहत उसे 25 साल से अधिक सजा नहीं दी जा सकती। यह अवधि 10 नवंबर 2030 को पूरी होगी। इससे पहले सलेम सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था, जहां उसे राहत नहीं मिली। कोर्ट ने कहा था कि उसने समाज के लिए कोई सकारात्मक कार्य नहीं किया है, इसलिए सजा में छूट नहीं दी जा सकती।
क्या थी सलेम की मांग
अबू सलेम ने अपनी याचिका में अच्छे व्यवहार और जेल में बिताए समय के आधार पर सजा में छूट देते हुए समय से पहले रिहाई की मांग की थी।

