NRDU Gandhinagar : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने कहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक जटिल और बहुआयामी विषय है, जिसमें कई कारक शामिल होते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी देश की ताकत का सही आकलन करते समय उसके लोगों की इच्छाशक्ति (Willpower) को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डोभाल ने गांधीनगर स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति Draupadi Murmu भी मौजूद थीं।
सुरक्षा में कई तत्वों की भूमिका
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में सैन्य शक्ति, तकनीक, प्राकृतिक संसाधन, कूटनीति और मानव संसाधन जैसे कई पहलू शामिल होते हैं। लेकिन इन सबके बीच सबसे अहम भूमिका देश के लोगों की आंतरिक शक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति की होती है।
इतिहास से दिए उदाहरण
डोभाल ने वैश्विक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि सोवियत-अफगान युद्ध, वियतनाम युद्ध और अफगानिस्तान युद्ध जैसे मामलों में बड़ी सैन्य ताकत होने के बावजूद देशों को पीछे हटना पड़ा। इसके पीछे मुख्य कारण स्थानीय लोगों का मजबूत जज्बा और प्रतिबद्धता था।
राष्ट्रीय सुरक्षा सबकी जिम्मेदारी
NSA ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना, पुलिस या खुफिया एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की जागरूकता और भागीदारी से ही मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) का निर्माण होता है।
युवाओं को दिया संदेश
सुरक्षा क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं को संबोधित करते हुए डोभाल ने कहा कि इस क्षेत्र में जीत ही सब कुछ होती है। उन्होंने कहा, “यह ऐसा क्षेत्र है, जहां या तो आप जीतते हैं या हारते हैं। जीतने पर इतिहास बनता है और हारने पर अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।”

