Women Reservation Bill: केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव 2029 से पहले संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। संसद में गुरुवार से शुरू हो रहे तीन दिनों के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयक पेश किए जाएंगे। सरकार ने सितंबर 2023 में नारी शक्ति वंदन कानून पारित कराया था, लेकिन उसमें अगली जनगणना और परिसीमन के बाद ही आरक्षण लागू करने की शर्त रखी गई थी। इससे महिला आरक्षण 2034 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू होना मुश्किल माना जा रहा था। अब सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर सीटों का नया फार्मूला तय करना चाहती है, ताकि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू किया जा सके। लेकिन परिसीमन, टाइमिंग और उत्तर-दक्षिण राज्यों के बीच सीटों के असंतुलन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं।
संसद में पेश होंगे तीन अहम विधेयक
1. संविधान संशोधन विधेयक 2026
लोकसभा और विधानसभा में महिला आरक्षण लागू करने के लिए नया संविधान संशोधन विधेयक पेश किया जाएगा। इसके तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी है। इनमें 815 सीटें राज्यों की और 35 सीटें केंद्रशासित प्रदेशों की होंगी। सरकार अनुच्छेद 81 और 82 में संशोधन करना चाहती है। पहले नियम था कि परिसीमन 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आधार पर होगा। अब सरकार यह शर्त हटाकर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का अधिकार चाहती है, ताकि महिला आरक्षण 2029 से लागू किया जा सके।
2. परिसीमन विधेयक 2026 क्या है
डिलिमिटेशन बिल 2026 महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया तय करेगा। इसमें नए परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान है, जो सीटों की नई सीमाएं तय करेगा। यह आयोग तय करेगा कि 850 सीटों में से कौन सी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। हालांकि सीटों के निर्धारण का स्पष्ट फार्मूला अभी नहीं बताया गया है। इस बिल में यह भी तय होगा कि हर चुनाव के बाद आरक्षित सीटों का रोटेशन कैसे होगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों को मौका मिल सके।
3. केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026
यह विधेयक दिल्ली समेत केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने के लिए लाया जा रहा है। दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं में भी 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। पूरे देश में एक साथ आरक्षण लागू करने के लिए इस इनेबलिंग बिल की जरूरत बताई जा रही है।
मोदी सरकार का नया प्लान
सरकार अगली जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कराना चाहती है। लोकसभा की सीटें बढ़ाई जाएंगी ताकि मौजूदा सांसदों की सीट कम न हो और महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण मिल सके। लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके जैसे दलों का कहना है कि पुराने आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करना वैज्ञानिक नहीं है। उनका तर्क है कि इससे जनसंख्या नियंत्रण करने वाले दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान होगा।
विपक्ष की 5 बड़ी आपत्तियां
1. महिला आरक्षण में OBC कोटा की मांग
समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों की मांग है कि महिला आरक्षण के भीतर OBC महिलाओं को भी आरक्षण दिया जाए। विपक्ष का कहना है कि अभी SC और ST महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान है, लेकिन OBC महिलाओं के लिए नहीं है। इससे आरक्षण का लाभ सीमित वर्ग तक रह सकता है।
2. परिसीमन की शर्त पर आपत्ति
सरकार पहले नई जनगणना के बाद परिसीमन की बात कर रही थी, लेकिन अब 2011 के आंकड़ों के आधार पर प्रक्रिया शुरू करना चाहती है। विपक्ष का कहना है कि सीटों के निर्धारण का स्पष्ट फार्मूला नहीं बताया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति है।
3. उत्तर-दक्षिण असंतुलन का डर
दक्षिण भारत के राज्यों केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को आशंका है कि आबादी के आधार पर परिसीमन होने पर उनकी सीटें कम हो सकती हैं। वहीं उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में सीटें बढ़ सकती हैं। विपक्ष इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बता रहा है।
4. 2011 की जनगणना पर सवाल
विपक्ष का कहना है कि 2011 के पुराने आंकड़ों पर परिसीमन करना सही नहीं है। उनका तर्क है कि जब नई जनगणना प्रक्रिया चल रही है तो ताजा और वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर फैसला होना चाहिए।
5. बिल लाने की जल्दबाजी पर सवाल
विपक्ष पूछ रहा है कि जब नई जनगणना 2026-27 तक होने की संभावना है तो इतनी जल्दबाजी क्यों। सरकार का कहना है कि कोरोना समेत कई कारणों से 2021 की जनगणना टल गई थी। ऐसे में महिला आरक्षण 2029 तक लागू करने के लिए अभी कदम उठाना जरूरी है।
परिसीमन पर सरकार का तर्क
सरकार का कहना है कि बिना परिसीमन के यह तय करना मुश्किल है कि कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। परिसीमन एक कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार का दावा है कि 2026-27 की जनगणना और परिसीमन के बाद 2029 लोकसभा चुनाव में महिलाएं आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ सकेंगी। हालांकि विपक्ष का आरोप है कि इससे पिछड़े वर्ग और दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।

