New Delhi: महिला आरक्षण संशोधन बिल पर अमित शाह और अखिलेश यादव के बीच लोकसभा में तीखी बहस देखने को मिली। जनगणना, जातीय गणना और मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण को लेकर दोनों नेताओं के बीच सवाल-जवाब और नोकझोंक हुई।
जनगणना पर अमित शाह का बड़ा बयान
अखिलेश यादव के जनगणना से जुड़े सवाल का जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि जनगणना का काम शुरू हो चुका है और जारी है। अमित शाह ने कहा कि अखिलेश यादव ने जातीय जनगणना की मांग की थी। सरकार ने पहले ही जाति आधारित जनगणना करने का फैसला ले लिया है और यह प्रक्रिया जनगणना के साथ ही होगी। उन्होंने कहा कि अभी घरों की गिनती की जा रही है। घरों की कोई जाति नहीं होती। सपा का बस चले तो घरों की भी जाति तय कर दे। शाह के इस बयान पर सदन में हंगामा शुरू हो गया। अखिलेश यादव हंसने लगे, वहीं धर्मेंद्र यादव अपनी सीट से उठने लगे। बाद में अखिलेश यादव ने उन्हें बैठने का इशारा किया। अमित शाह ने आगे कहा कि जब नागरिकों की गणना होगी, तब उसमें जाति का कॉलम शामिल किया जाएगा। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि यह जनगणना जातीय जनगणना के साथ ही होगी।
मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण पर विवाद
धर्मेंद्र यादव ने मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण देने की मांग उठाई। इस पर अमित शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर किसी भी तरह का आरक्षण देना गैरसंवैधानिक है। अमित शाह ने कहा कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता। इसलिए मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ होगा।
अखिलेश यादव का पलटवार
अखिलेश यादव ने अमित शाह के बयान पर जवाब देते हुए कहा कि पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुस्लिम महिलाएं आधी आबादी का हिस्सा नहीं हैं। इस पर अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे तो अपनी सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है। इसमें सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
सदन में जारी रही तीखी बहस
अमित शाह और अखिलेश यादव के बीच इस बहस के दौरान सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बनी। महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद में और तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

