Middle East: पाकिस्तान की आर्थिक हालत इन दिनों बेहद कमजोर बनी हुई है। हालात ऐसे हैं जैसे कम आय वाला कोई व्यक्ति कर्ज के बोझ में दब जाए और खर्च कम करने के बजाय नए कर्ज की तलाश में भटकता रहे। पाकिस्तान के साथ भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। देश के पास खुद के खर्च और जरूरी जरूरतों के लिए पैसे कम हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों में सक्रिय रहने की कोशिश जारी है। इसी बीच संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE ने पाकिस्तान को दिया गया कर्ज वापस मांग लिया, जिससे इस्लामाबाद पर दबाव और बढ़ गया।
UAE ने मांगा पैसा, पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक UAE ने पाकिस्तान को दिए गए कर्ज को जल्द लौटाने के लिए कहा है। इसके बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अलग-अलग देशों से मदद मांगने की कोशिश में जुट गए। पहले UAE से बातचीत की कोशिश हुई, लेकिन जब कोई राहत नहीं मिली तो पाकिस्तान ने दूसरे देशों की ओर रुख किया।
शहबाज-मुनीर की कूटनीतिक दौड़ शुरू
फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ईरान दौरे पर निकल गए, जहां उन्होंने क्षेत्रीय तनाव कम कराने और कूटनीतिक भूमिका निभाने की कोशिश की। माना जा रहा है कि इससे पाकिस्तान को चीन, IMF और विश्व बैंक जैसे संस्थानों से मदद मिलने की उम्मीद है। वहीं प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किये के दौरे पर पहुंचे और आर्थिक सहायता की मांग की।
सऊदी अरब ने दिया राहत पैकेज
रिपोर्ट्स के अनुसार सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त सहायता देने पर सहमति जताई है। यह रकम पाकिस्तान को UAE को कर्ज चुकाने में मदद करेगी। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब के मुताबिक यह भुगतान अगले सप्ताह तक मिलने की संभावना है। इसके अलावा सऊदी अरब ने पाकिस्तान में जमा 5 अरब डॉलर की रोलओवर व्यवस्था को भी आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
UAE को कितना देना है पाकिस्तान को
पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात को 3 अरब डॉलर का कर्ज लौटाना है। पाकिस्तान ने पहले इस भुगतान में राहत या समय बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन UAE ने इसे ठुकरा दिया और समय पर भुगतान करने के लिए कहा। इसके बाद पाकिस्तान ने सऊदी अरब और चीन से मदद मांगनी शुरू की।
पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव
पाकिस्तान के पास फिलहाल करीब 16 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है। हालांकि IMF की शर्तों के कारण वह इस राशि को पूरी तरह खर्च नहीं कर सकता। IMF की शर्तों के अनुसार पाकिस्तान को वित्त वर्ष के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाकर 18 अरब डॉलर करना होगा। देश को तेल, गैस और जरूरी सामान आयात करने के लिए भी विदेशी मुद्रा की जरूरत है। इसी कारण पाकिस्तान ने UAE का कर्ज चुकाने के लिए सऊदी अरब से मदद मांगी।
आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार कर्ज लेकर पुराने कर्ज चुकाने की नीति पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही है। ऐसे में पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक स्थिरता लाने और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने की बनी हुई है।

