Women Reservation Bill: महिला आरक्षण संशोधन बिल को लेकर संसद में अहम चर्चा शुरू हो गई है। 131वां संविधान संशोधन बिल लोकसभा में पेश होते ही सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला। बिल पेश होने के बाद इसे सदन में पेश करने को लेकर वोटिंग कराई गई, जिसमें 207 सांसदों ने बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि 126 सांसदों ने विरोध किया। इसके बाद बिल पर आगे चर्चा का रास्ता साफ हो गया।
प्रधानमंत्री मोदी आज रखेंगे सरकार का पक्ष
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में आज दोपहर 3 बजे महिला आरक्षण बिल पर बोलेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री सरकार का पक्ष रखेंगे और बिल के पीछे की रणनीति समझाएंगे। वहीं चर्चा का जवाब गृह मंत्री अमित शाह देंगे। लोकसभा में 16 और 17 अप्रैल को इस बिल पर कुल 18 घंटे चर्चा तय की गई है। चर्चा के बाद वोटिंग कराई जाएगी।
18 अप्रैल को राज्यसभा में होगी चर्चा
लोकसभा में पास होने के बाद 18 अप्रैल को राज्यसभा में बिल पर चर्चा और वोटिंग होगी। राज्यसभा में इस मुद्दे पर 10 घंटे चर्चा का समय निर्धारित किया गया है। इसी दौरान 16 और 17 अप्रैल को राज्यसभा के उपसभापति का चुनाव भी कराया जा सकता है। सरकार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसके तहत सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों वाला विधेयक पेश किया गया है।
बिल पेश होते ही सदन में हंगामा
संसद का विशेष सत्र गुरुवार से शुरू हुआ और बिल पेश होते ही विपक्ष ने विरोध शुरू कर दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार संविधान को “हाइजैक” करना चाहती है। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जब तक मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण नहीं मिलेगा, तब तक यह अधूरा रहेगा। इस पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है।
अमित शाह और अखिलेश यादव में नोकझोंक
अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है, लेकिन मुस्लिम महिलाओं को लेकर सरकार का क्या रुख है। इस पर अमित शाह ने जवाब देते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे तो अपनी सभी टिकट मुस्लिम महिलाओं को दे सकती है, सरकार को इससे कोई आपत्ति नहीं है। इस बयान के बाद सदन में कुछ देर तक तीखी बहस और हंगामा जारी रहा।
तीनों बिलों पर आगे बढ़ी प्रक्रिया
तीनों विधेयकों को सदन में पेश करने को लेकर वोटिंग कराई गई। 207 सांसदों ने बिल के पक्ष में मतदान किया, जबकि 126 सांसदों ने विरोध किया। इसके बाद महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर विस्तृत चर्चा की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

