New Delhi : लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीन अहम विधेयक पेश होने के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। इन बिलों पर संसद में चर्चा जारी है, जिसमें पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। सरकार की ओर से पेश किए गए संशोधन बिल में लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव है। इसमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात कही गई है। इसके साथ ही सीटों के पुनर्निर्धारण (परिसीमन) की भी योजना है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि सरकार बार-बार वही बातें दोहरा रही है। उन्होंने पूछा कि लोकसभा में 850 सीटों का आंकड़ा कैसे तय किया गया। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि महिला आरक्षण में पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पहले जनगणना कराई जाए, उसके बाद ही परिसीमन किया जाए।
सरकार का जवाब
गृह मंत्री अमित शाह ने मुस्लिम महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की मांग को असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष भ्रम फैला रहा है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी कहा कि परिसीमन संविधान के तहत ही किया जा रहा है और इसमें कोई गलत प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है।
दक्षिण भारत में भी विरोध
डीएमके सांसद टी. शिवा ने परिसीमन बिल का विरोध करते हुए कहा कि इससे दक्षिण भारत के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। उन्होंने मांग की कि महिला आरक्षण मौजूदा सीटों के भीतर ही लागू किया जाए।
महिला आरक्षण पर सरकार का पक्ष
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस बिल को ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को राजनीति में बराबरी का अवसर मिलेगा।
बहस के लिए तय समय
इन विधेयकों पर चर्चा के लिए 16 और 17 अप्रैल को कुल 15 घंटे का समय तय किया गया है। इसके बाद वोटिंग कराई जाएगी।

