शशि थरूर को लेकर किरेन रिजिजू का बड़ा दावा, बोले- ‘उन्होंने खुद माना कांग्रेस महिला विरोधी है’

New Delhi: महिला आरक्षण को लेकर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक बार फिर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने बड़ा दावा करते हुए कहा कि कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने खुद माना था कि कांग्रेस महिला विरोधी पार्टी है। रिजिजू ने यह दावा संसद सत्र खत्म होने के बाद हुई अपनी और शशि थरूर की निजी बातचीत का हवाला देते हुए किया।

शशि थरूर को लेकर किया बड़ा दावा

न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में किरेन रिजिजू ने बताया कि संसद सत्र खत्म होने के बाद उनकी मुलाकात संसद भवन में शशि थरूर से हुई थी। रिजिजू के मुताबिक, इस दौरान थरूर ने उनसे कहा था कि कांग्रेस पार्टी महिला विरोधी हो सकती है, लेकिन कोई भी महिला शशि थरूर को महिला विरोधी नहीं कहेगी। इस पर रिजिजू ने जवाब दिया कि, “मैं मानता हूं कि कोई आपको महिला विरोधी नहीं कहेगा, लेकिन आपकी पार्टी महिला विरोधी है।” उन्होंने कहा कि थरूर की इस बात से साफ था कि उन्होंने भी एक तरह से स्वीकार किया कि कांग्रेस का रुख महिलाओं के खिलाफ है।

क्या बोले किरेन रिजिजू

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, “अगर कांग्रेस महिला विरोधी है, लेकिन महिलाएं शशि थरूर को महिला विरोधी नहीं मानतीं, तो इसका मतलब साफ है कि पार्टी की छवि अलग है।” उन्होंने आगे कहा कि व्यक्तिगत तौर पर शशि थरूर महिला विरोधी नहीं हो सकते, लेकिन उनकी पार्टी का रवैया महिलाओं के खिलाफ है।

कांग्रेस पर BJP का हमला

इससे पहले भी महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक पर विपक्ष के विरोध को लेकर BJP ने कांग्रेस को घेरा था। लोकसभा में बिल पास न होने पर रिजिजू ने कहा था कि कांग्रेस महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने का जश्न मना रही है। उन्होंने कहा था, “देश की महिलाएं कांग्रेस को करारा सबक सिखाएंगी और उसे महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा।”

विपक्ष ने क्यों किया विरोध

संविधान के 131वें संशोधन विधेयक के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून लागू करने का प्रस्ताव था। इसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की बात कही गई थी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था। लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध किया, जिसके चलते विधेयक पास नहीं हो सका।

विपक्ष का क्या तर्क था

विपक्षी दलों का कहना था कि बिना सीटों की संख्या बढ़ाए भी महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है। उनका आरोप था कि परिसीमन का यह प्रस्ताव BJP को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए लाया गया है। साथ ही विपक्ष ने यह भी कहा कि इससे दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभाव होगा, क्योंकि वहां जनसंख्या नियंत्रण के बेहतर उपाय पहले से लागू किए गए हैं।

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