Supreme Court: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं। अदालत ने साफ कहा है कि खेड़ा को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और जब भी पुलिस बुलाए, उन्हें हाजिर होना पड़ेगा। साथ ही, वे किसी भी तरह से सबूतों से छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे।
बिना कोर्ट की इजाजत विदेश नहीं जा सकेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि पवन खेड़ा बिना संबंधित कोर्ट की अनुमति के देश से बाहर नहीं जा सकते। ट्रायल कोर्ट को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त शर्तें लगाने का भी अधिकार दिया गया है। साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के दौरान कही गई बातें केस के अंतिम फैसले को प्रभावित नहीं करेंगी।
गुरुवार को सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा था फैसला
इस मामले में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए आरोपों से जुड़ा है, जिसमें खेड़ा ने अग्रिम जमानत की मांग की थी।
अभिषेक सिंघवी ने रखा था खेड़ा का पक्ष
पवन खेड़ा की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें पेश की थीं। उन्होंने कहा कि अगर खेड़ा को गिरफ्तार किया गया, तो उनके साथ सही व्यवहार नहीं होने की आशंका है। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री पर आपत्तिजनक बयान देने का भी आरोप लगाया।
गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पहले खारिज की थी याचिका
इससे पहले 24 अप्रैल को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। आरोपों के बाद मुख्यमंत्री की पत्नी रिंकी भुइयां शर्मा ने खेड़ा और अन्य के खिलाफ गुवाहाटी में केस दर्ज कराया था।
पहले ट्रांजिट जमानत पर भी हुआ था विवाद
तेलंगाना हाईकोर्ट ने पहले खेड़ा को 7 दिन की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि असम पुलिस ने इसका विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट जमानत पर रोक लगाते हुए खेड़ा को गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने के लिए कहा था।

