होर्मुज संकट के बीच घट रहा तेल का स्टॉक, भारत पर पड़ सकता हैं असर, तेल की असली कमी के संकेत शुरू

Strait of Hormuz: दुनिया में कच्चे तेल की कमी के संकेत अब साफ दिखने लगे हैं। Mike Wirth ने चेतावनी दी है कि इसका सबसे पहला असर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। उनका कहना है कि अब मांग के हिसाब से सप्लाई नहीं मिल रही, इसलिए देशों को अपनी आर्थिक रफ्तार धीमी करनी पड़ सकती है।

मिडिल ईस्ट संकट से सप्लाई चेन प्रभावित

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण कई देश अब वैकल्पिक सप्लाई की तलाश में जुट गए हैं। जापान ने दो साल बाद रूस से तेल मंगाया है, जबकि अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर तेल एक्सपोर्ट कर रहा है। इसके बावजूद दुनिया भर में तेल का स्टॉक तेजी से घट रहा है।

एशिया पर सबसे ज्यादा असर क्यों?

एशिया के देश तेल और गैस के लिए मिडिल ईस्ट पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं। ऐसे में सप्लाई बाधित होने का असर सबसे पहले यहीं दिख रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके बाद असर यूरोप तक पहुंचेगा।

IEA की चेतावनी—भंडार तेजी से घट रहा

International Energy Agency के प्रमुख फातिह बिरोल पहले ही कह चुके हैं कि कच्चे तेल और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स के निर्यात में भारी गिरावट आई है। युद्ध के चलते रोजाना करोड़ों बैरल उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

क्या सच में दुनिया में तेल खत्म हो रहा है?

असल में दुनिया में तेल खत्म नहीं हो रहा, बल्कि समस्या यह है कि जहां जरूरत है, वहां तेल पहुंच नहीं पा रहा। Strait of Hormuz के लगभग बंद होने से सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है।

रिफाइंड फ्यूल की कमी ज्यादा गंभीर

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, कच्चे तेल से ज्यादा चिंता रिफाइंड प्रोडक्ट्स की है। जेट फ्यूल, नेफ्था और LPG जैसे जरूरी ईंधनों का स्टॉक तेजी से घट रहा है। अभी यह स्टॉक सिर्फ करीब 45 दिनों की मांग के बराबर बचा है।

भारत समेत कई देश हो सकते हैं प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार भारत, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड और ताइवान जैसे देश इस संकट से ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। वजह यह है कि इन देशों की इंडस्ट्री और ट्रांसपोर्ट सेक्टर काफी हद तक इन फ्यूल्स पर निर्भर है।

एविएशन सेक्टर पर दिख रहा असर

इस संकट का सबसे बड़ा असर एयरलाइंस पर पड़ रहा है। जेट फ्यूल की कमी के कारण दुनिया भर में कई उड़ानें रद्द की जा रही हैं।

आगे क्या हो सकता है?

अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो तेल की सप्लाई और प्रभावित हो सकती है। ऐसे में कीमतें बढ़ेंगी और इसका सीधा असर आम लोगों से लेकर इंडस्ट्री तक सभी पर पड़ेगा।

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