Hazaribagh : हजारीबाग जिले के बड़कागांव स्थित प्राचीन मेगालिथ स्थल को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार इस ऐतिहासिक और पौराणिक धरोहर को विकसित कर विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने की दिशा में काम कर रही है। कला, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव मुकेश कुमार ने अधिकारियों के साथ मेगालिथ क्षेत्र का दौरा किया और विकास कार्यों को लेकर जरूरी निर्देश दिए। इस दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और जिला प्रशासन की टीम भी मौजूद रही।
बड़कागांव प्रखंड के पकरी बरवाडीह में स्थित यह मेगालिथ स्थल करीब 3000 से 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। यह प्राचीन पत्थर संरचना आदिवासी समाज की खगोलीय समझ और वैज्ञानिक सोच को दर्शाती है। खास बात यह है कि हर साल 21 मार्च और 23 सितंबर को सूर्य की किरणें इन पत्थरों के बीच से सीधी गुजरती हैं, जिसे ‘इक्विनॉक्स’ कहा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत का इकलौता ऐसा स्थल है जहां इस तरह की खगोलीय घटना साफ तौर पर देखी जाती है। दुनिया में इस तरह के स्थल बहुत कम हैं। इंग्लैंड के प्रसिद्ध न्यूग्रेंज और स्टोनहेंज की तरह यहां भी सूर्योदय का अनोखा दृश्य देखने को मिलता है। मेगालिथ स्थल पर ‘वी’ आकार में खड़े दो विशाल पत्थरों के बीच से सूरज की किरणें गुजरती हैं। इसे आदिवासी समाज की सटीक खगोलीय गणना और आध्यात्मिक परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
सरकार की योजना है कि इस स्थल को विश्व धरोहर की श्रेणी तक पहुंचाया जाए। इसके लिए पर्यटन सुविधाओं का विकास, संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इस मेगालिथ स्थल की खोज वर्ष 2000 में शोधकर्ता शुभाशीष दास ने की थी। अगर यह क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से विकसित होता है, तो हजारीबाग को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने के साथ-साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
