इस्लामाबाद शांति वार्ता फिर बेनतीजा! US से सीधी बातचीत बिना ही पाकिस्तान से लौटे ईरानी विदेश मंत्री

Iran and US War: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और जंग जैसे हालात के बीच शनिवार को शांति वार्ता की एक नई उम्मीद जगी थी, लेकिन वह भी टूट गई। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi अपनी एक बड़ी टीम के साथ पाकिस्तान की राजधानी Islamabad पहुंचे थे। पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाला था, लेकिन अमेरिकी प्रतिनिधित्व के बिना ही ईरानी डेलिगेशन वापस लौट गया।

पाकिस्तान के जरिए बातचीत की कोशिश

ईरान सीधे अमेरिका से बातचीत करने को तैयार नहीं है, इसलिए पाकिस्तान दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा है।अमेरिका की ओर से भी स्पेशल दूतों के इस्लामाबाद आने की चर्चा थी, लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल के लौट जाने के बाद फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

शहबाज शरीफ से हुई अहम मुलाकात

अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif से मुलाकात की। इस बैठक में पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के साथ सेना प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर भी मौजूद रहे। मुलाकात के बाद तेहरान का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान से रवाना हो गया। यह जानकारी न्यूयॉर्क पोस्ट और इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से सामने आई।

अब ओमान और रूस जाएंगे अराघची

इस्लामाबाद के बाद अब्बास अराघची अब Muscat यानी ओमान और Moscow यानी रूस का दौरा करेंगे। इससे साफ है कि ईरान एक साथ कई देशों से संपर्क कर कूटनीतिक रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है।

ईरान ने सीधी बातचीत से किया साफ इनकार

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने साफ कहा कि इस दौर में ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी मीटिंग नहीं होगी। उन्होंने कहा कि ईरान पाकिस्तान के जरिए अपनी बात और अपनी चिंताओं को अमेरिका तक पहुंचाएगा। बगाई ने अमेरिका की कार्रवाई को “अमेरिका का थोपा हुआ हमलावर युद्ध” बताया और कहा कि पाकिस्तान शांति बहाल करने की कोशिश कर रहा है।

शहबाज शरीफ ने बताया मुलाकात को सकारात्मक

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि बातचीत काफी अच्छी और सकारात्मक रही। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर खुलकर चर्चा हुई और पाकिस्तान-ईरान संबंधों को और मजबूत करने पर भी बात हुई। यानी सिर्फ तनाव कम करने ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के सहयोग बढ़ाने पर भी फोकस रहा।

अमेरिका की ओर से कौन आने वाला था

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के खास दूत स्टीव विटकॉफ और Jared Kushner के इस्लामाबाद आने की चर्चा थी। जेरेड कुशनर ट्रंप के दामाद भी हैं और उनके करीबी सलाहकार माने जाते हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा था कि बातचीत सीधी होगी, लेकिन पाकिस्तान उसे आगे बढ़ाने में मदद करेगा। हालांकि यह बयान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के लौटने से पहले दिया गया था।

ट्रंप ने रखीं दो बड़ी शर्तें

राष्ट्रपति ट्रंप ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए एक फोन इंटरव्यू में कहा कि ईरान एक प्रस्ताव तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा, “वे एक ऑफर बना रहे हैं, हमें देखना होगा।” ट्रंप ने साफ किया कि किसी भी समझौते के लिए दो शर्तें जरूरी हैं। पहली— ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम छोड़ दे। दूसरी— Strait of Hormuz से तेल के जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहे। फिलहाल इस्लामाबाद वार्ता से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, लेकिन कूटनीतिक कोशिशें अभी भी जारी हैं।

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