Iran and US War: ईरान के तेल निर्यात पर अमेरिकी दबाव का असर अब साफ दिखने लगा है। हालात ऐसे हो गए हैं कि दर्जनों तेल टैंकर (41 oil tanker) समुद्र में ही फंसे हुए हैं और कच्चा तेल ग्राहकों तक नहीं पहुंच पा रहा। इसका असर चीन समेत कई देशों पर पड़ रहा है।
नाकेबंदी से ठप पड़ा तेल निर्यात
अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी के चलते ईरानी टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार नहीं कर पा रहे हैं। कई जहाजों ने अपना ट्रैकिंग सिस्टम भी बंद कर दिया है, जिससे उनकी लोकेशन और सप्लाई का पता लगाना मुश्किल हो गया है।
चीन पर सबसे ज्यादा असर
चीन ईरान से रोजाना 13-14 लाख बैरल तेल खरीदता है, जो ईरान के कुल निर्यात का 80-90% हिस्सा है। लेकिन नाकेबंदी के कारण यह सप्लाई बाधित हो गई है, जिससे चीन की ऊर्जा जरूरतों पर असर पड़ रहा है।
निर्यात में भारी गिरावट
ऑयल एनालिटिक्स फर्म के मुताबिक, अप्रैल के बीच के दिनों में ओमान की खाड़ी से निकलने वाले ईरानी टैंकरों की संख्या में 80% से ज्यादा की गिरावट आई है। पहले जहां करोड़ों बैरल तेल निर्यात होता था, अब बहुत कम जहाज बाहर निकल पा रहे हैं।
41 टैंकरों में फंसा करोड़ों बैरल तेल
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस समय 41 टैंकरों में करीब 6.9 करोड़ बैरल कच्चा तेल फंसा हुआ है, जिसे ईरान बेच नहीं पा रहा है। यह ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है।
वैश्विक बाजार में बढ़ी तेल की किल्लत
ईरानी सप्लाई कम होने से पहले से चल रही वैश्विक तेल की कमी और बढ़ गई है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण ओमान की खाड़ी से लेकर अन्य रास्तों पर भी असर पड़ा है, जिससे सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और इराक के निर्यात पर भी दबाव बढ़ा है।
कीमतों में उछाल जारी
ईरान से सप्लाई प्रभावित होने और युद्ध जैसे हालात के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में पिछले कुछ समय में करीब 50 डॉलर प्रति बैरल तक का उछाल देखा गया है, जिससे पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल महंगे हो गए हैं।
स्टोरेज भरने से उत्पादन पर संकट
ईरान के पास तेल स्टोर करने की क्षमता तेजी से भर रही है। जमीन पर मौजूद स्टोरेज करीब 60% तक भर चुका है। ऐसे में अगर हालात नहीं सुधरे, तो ईरान को आने वाले हफ्तों में तेल उत्पादन घटाने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
