New York: अमेरिका से एक बार फिर कोहिनूर हीरे को भारत वापस करने की मांग उठी है। न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी ने साफ कहा है कि अगर उनकी मुलाकात ब्रिटेन के राजा किंग चार्ल्स तृतीय से होती है, तो वह इस मुद्दे को जरूर उठाएंगे। उनका यह बयान आते ही कोहिनूर को लेकर पुरानी बहस फिर से चर्चा में आ गई है।
राजा चार्ल्स से क्या कहेंगे, खुद बताया
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ममदानी से पूछा गया कि वह राजा चार्ल्स से क्या कहेंगे, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “अगर मैं उनसे बात करूंगा, तो मैं उनसे कोहिनूर हीरा भारत को वापस करने के लिए कहूंगा।” उनके इस बयान को औपचारिक कूटनीति से अलग और सीधे तौर पर इतिहास से जुड़ा मुद्दा उठाने वाला माना जा रहा है।
भारतीय जड़ों से जुड़ा है ममदानी का रिश्ता
जोहरान ममदानी की मां मीरा नायर भारत में पैदा हुई थीं और बाद में अमेरिका चली गईं। इस वजह से ममदानी का भारत से खास जुड़ाव माना जाता है। उनका यह बयान भी उसी जुड़ाव और ऐतिहासिक समझ को दर्शाता है।
क्या है कोहिनूर हीरे की कहानी
कोहिनूर हीरा सिर्फ एक कीमती पत्थर नहीं, बल्कि भारत के इतिहास और औपनिवेशिक दौर का प्रतीक भी है। यह हीरा आंध्र प्रदेश की कोल्लूर खान से निकला था और शुरुआत में करीब 186 कैरेट का था। यह अलग-अलग भारतीय राजवंशों, जैसे मुगल और सिख शासकों के पास रहा। 1849 में दूसरे एंग्लो-सिख युद्ध के बाद ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 10 साल के महाराजा दलीप सिंह से लाहौर की संधि पर हस्ताक्षर कराए और यह हीरा ब्रिटेन ले जाया गया।
आज कहां है कोहिनूर
फिलहाल कोहिनूर हीरा 105.6 कैरेट का है और यह क्वीन एलिजाबेथ (क्वीन मदर) के ताज में जड़ा हुआ है। इसे लंदन के टॉवर ऑफ लंदन में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है और लाखों लोग हर साल इसे देखने आते हैं।
क्यों उठती रहती है वापसी की मांग
भारत में बड़ी संख्या में लोग मानते हैं कि कोहिनूर कोई “कानूनी तोहफा” नहीं, बल्कि औपनिवेशिक दौर में लिया गया खजाना है। वहीं, ब्रिटेन का कहना है कि यह हीरा कानूनी संधि के जरिए मिला था। हालांकि कई इतिहासकार इस दावे से सहमत नहीं हैं और इसे दबाव में हुआ समझौता मानते हैं।
दुनिया के दूसरे देश भी उठा रहे ऐसी मांग
कोहिनूर ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देश अपनी ऐतिहासिक धरोहर वापस मांग रहे हैं। ग्रीस एल्गिन मार्बल्स की वापसी चाहता है, जबकि अफ्रीकी देश बेनिन ब्रॉन्ज़ को लौटाने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में ममदानी का बयान इस वैश्विक बहस को और तेज कर सकता है।

