US and Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद मिडिल ईस्ट का संकट और गहरा गया है। इसी बीच चीन ने कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रिय होते हुए शांति की पहल की है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है। मौजूदा हालात में इसे बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन की सरकारी एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, यह प्रस्ताव उस समय सामने आया जब अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान बीजिंग दौरे पर थे। दोनों नेताओं की बैठक के दौरान शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में स्थिरता बहाल करने के लिए एक रोडमैप पेश किया।
क्या है चीन का चार सूत्रीय प्रस्ताव
शी जिनपिंग के चार सूत्रीय प्रस्ताव में क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर जोर दिया गया है। इसमें प्रमुख बिंदु शामिल हैं।
- शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को प्राथमिकता देना
- सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करना
- विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना
- अंतरराष्ट्रीय नियम आधारित व्यवस्था की रक्षा करना
शी जिनपिंग ने साफ कहा कि दुनिया को जंगल के कानून की ओर नहीं लौटने दिया जा सकता।
अमेरिका और इजरायल पर अप्रत्यक्ष निशाना
चीन के राष्ट्रपति की यह टिप्पणी अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना के रूप में देखी जा रही है। चीन पहले भी इन हमलों को अवैध बता चुका है, लेकिन इस बार उसने ज्यादा सख्त लहजे में चिंता जताई है।
होर्मुज स्ट्रेट बना टकराव का केंद्र
होर्मुज स्ट्रेट को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। फिलहाल यह क्षेत्र संघर्ष का मुख्य केंद्र बन गया है। ईरान ने मार्च की शुरुआत से उन जहाजों के लिए इस मार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिन्हें वह दुश्मन देशों से जुड़ा मानता है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी और तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ा दिया है। इस टकराव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी दिखने लगा है।
खाड़ी देशों की तेल सप्लाई प्रभावित
खाड़ी देशों से गुजरने वाली तेल आपूर्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही ईरान द्वारा क्षेत्रीय ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि इन हमलों में यूएई के कुछ ठिकाने भी निशाने पर रहे हैं।
अमेरिका-चीन तनाव भी बढ़ा
इसी बीच अमेरिका और चीन के बीच भी तनाव बढ़ने लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि चीन को ईरान को हथियार सप्लाई करते पाया गया, तो चीन पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। ट्रंप ने इसे गंभीर परिणामों वाला कदम बताया है।
बैन किया गया चीनी टैंकर होर्मुज से गुजरा
तनाव के बीच एक और दिलचस्प घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित चीन से जुड़ा टैंकर “रिच स्टार्री” होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता देखा गया। समुद्री ट्रैफिक डेटा के मुताबिक, जहाज ने पहले अपना रास्ता बदला, लेकिन बाद में चीनी क्रू की जानकारी देने के बाद अपनी यात्रा फिर से शुरू कर दी।
वैश्विक शक्तियों के टकराव का केंद्र बना मिडिल ईस्ट
इन घटनाओं के बीच साफ संकेत मिल रहे हैं कि मिडिल ईस्ट अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रहा। यह वैश्विक शक्तियों के टकराव का नया केंद्र बनता जा रहा है। अमेरिका, ईरान और चीन के बीच बढ़ती तनातनी से आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

