हरिवंश फिर बने राज्यसभा के उपसभापति, महिला आरक्षण और परिसीमन पर संसद में घमासान

New Delhi: संसद के विशेष सत्र का आज दूसरा दिन है। इससे पहले गुरुवार का दिन काफी हंगामेदार रहा। विपक्ष ने परिसीमन बिल का जोरदार विरोध किया। वहीं सत्ता पक्ष ने महिला आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन को जरूरी बताया। गुरुवार को संसद आधी रात तक चली। आज भी सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। संसद के विशेष सत्र का दूसरा दिन थोड़ी ही देर में शुरू होने वाला है। गुरुवार को परिसीमन बिल पर पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस और हंगामा हुआ। महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर सरकार और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे। सरकार ने इस बिल को बेहद जरूरी बताया। वहीं विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

महिला आरक्षण के साथ परिसीमन जोड़ने पर विपक्ष का विरोध

महिला आरक्षण के साथ परिसीमन का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। विपक्षी सांसदों ने कहा कि वे महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे परिसीमन से अलग किया जाए। विपक्ष का आरोप है कि महिला आरक्षण के नाम पर बैकडोर से परिसीमन लागू करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इसे महिलाओं के नाम पर राजनीतिक रणनीति बताया।

लोकसभा में देर रात तक चली बहस, आज वोटिंग

संसद का विशेष सत्र जारी है। गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर जोरदार बहस हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर प्रियंका गांधी और असदुद्दीन ओवैसी तक ने इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। विपक्षी दल कानून लागू करने की जल्दबाजी को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं। गुरुवार देर रात तक महिला आरक्षण और परिसीमन पर बहस जारी रही। आज शाम चार बजे महिला आरक्षण पर वोटिंग होनी है। इस बीच महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला महिला आरक्षण अधिनियम-2023 गुरुवार से लागू भी कर दिया गया। इस संबंध में केंद्रीय कानून मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी किया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि 2023 में पारित इस कानून को अभी क्यों लागू किया गया, जबकि संसद में इसके क्रियान्वयन को 2029 से लागू करने को लेकर संशोधन पर बहस चल रही है।

सरकार की अपील, सभी दलों से समर्थन मांगा

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को सभी राजनीतिक दलों से महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है। पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सभी दलों से समर्थन की अपील की है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस कानून से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा।

कांग्रेस का विरोध, सर्वदलीय बैठक की मांग

कांग्रेस नेता के सी वेणुगोपाल ने महिला आरक्षण कानून से जुड़े संशोधनों को वापस लेने की मांग की। उन्होंने इसके क्रियान्वयन पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की। लोकसभा में बहस के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं के सशक्तीकरण के नाम पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का उद्देश्य महिलाओं को अधिकार देना नहीं, बल्कि चुनावी फायदा उठाना है। उन्होंने सवाल किया, “महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका था। 2024 में इसे लागू करने से किसने रोका।”

2029 चुनाव से पहले बुलाया गया विशेष सत्र

गौरतलब है कि संसद का विशेष तीन दिवसीय सत्र 2029 लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया पर विचार के लिए बुलाया गया है। इस सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म बना हुआ है।

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