US and Iran War: अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी लागू करने के लिए 10,000 से ज्यादा अमेरिकी नेवी के जवान, मरीन और एयरमैन तैनात कर दिए हैं। इस ऑपरेशन के तहत एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत समुद्र में और एक दर्जन एयरक्राफ्ट आसमान में तैनात किए गए हैं। अमेरिका का दावा है कि पहले 24 घंटों में कोई भी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी को पार नहीं कर पाया। इसके अलावा छह मालवाहक जहाजों ने अमेरिकी निर्देश का पालन करते हुए वापस मुड़कर ओमान की खाड़ी में स्थित ईरानी बंदरगाहों की ओर लौट गए।
सभी देशों के जहाजों पर लागू नाकेबंदी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी सेंटकॉम ने आधिकारिक ट्वीट और इन्फोग्राफिक जारी कर बताया कि यह नाकेबंदी सभी देशों के जहाजों पर समान रूप से लागू है। इसका मकसद ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकना है। हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले उन जहाजों को अनुमति दी जा रही है, जो ईरान के बंदरगाहों की ओर नहीं जा रहे हैं। इन्फोग्राफिक में दिखाया गया है कि नाकेबंदी की लाल रेखा ईरान के तट के साथ खींची गई है, जिससे ईरान का तेल निर्यात और आयात पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
100 से ज्यादा फाइटर और युद्धपोत मिशन में शामिल
अमेरिका के मुताबिक इस मिशन में 10 हजार से ज्यादा सैनिक शामिल हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा फाइटर जेट और सर्विलांस एयरक्राफ्ट भी तैनात किए गए हैं। इस ऑपरेशन में एयरक्राफ्ट कैरियर, एम्फीबियस असॉल्ट शिप, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर और लिटोरल कॉम्बैट शिप जैसी सैन्य ताकत भी शामिल की गई है। इसे ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। तेल निर्यात पर निर्भर ईरान की अर्थव्यवस्था को इससे बड़ा झटका लग सकता है।
फिर हो सकती है पाकिस्तान में शांति वार्ता
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान में फिर से शांति वार्ता हो सकती है। पाकिस्तान ने भी कहा है कि इस्लामाबाद ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के दूसरे दौर का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी पहले कहा था कि ईरान के साथ बातचीत में कुछ प्रगति हुई है। वहीं ट्रंप ने भी कहा कि दूसरी तरफ से बातचीत का संकेत मिला है और समझौते की कोशिश जारी है।
होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं
अमेरिका ने साफ किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की पूरी नाकेबंदी नहीं की गई है। सेंटकॉम के मुताबिक गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए आने-जाने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिया जा रहा है। इनमें सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर और ओमान जैसे देशों के जहाज शामिल हैं।
केवल ईरानी बंदरगाहों को बनाया गया निशाना
अमेरिका केवल उन जहाजों को रोक रहा है जो ईरानी बंदरगाहों जैसे बंदर अब्बास, बुशहर और चाबहार की ओर जा रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। इस रणनीति से वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ईरान का तेल निर्यात लगभग शून्य हो सकता है। सेंटकॉम ने साफ किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहेगा और केवल ईरान से जुड़े जहाजों को ही निशाना बनाया जा रहा है।

