होर्मुज स्ट्रेट संकट गहराया, तेल-गैस ही नहीं AI और MRI तक पर मंडराया बड़ा खतरा

US and Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में शनिवार को दोनों देशों के बीच समझौते की कोशिश की गई, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही। दोनों देश अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमले के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है। इस वजह से इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। इसका असर केवल तेल और गैस की सप्लाई पर ही नहीं, बल्कि कई महत्वपूर्ण धातुओं और रसायनों की आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। ये धातुएं और रसायन आधुनिक तकनीक, रक्षा उपकरण, AI, सेमीकंडक्टर और मेडिकल मशीनों के लिए बेहद जरूरी हैं।

होर्मुज से पैदा हुआ हीलियम संकट

आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट को तेल और गैस की सप्लाई के लिए अहम माना जाता है। लेकिन यह आधुनिक तकनीक और मेडिकल सिस्टम के लिए भी उतना ही जरूरी है।

हीलियम गैस का इस्तेमाल

  • एमआरआई मशीनों में
  • सेमीकंडक्टर और चिप बनाने में
  • एयरोस्पेस उद्योग में
  • औद्योगिक प्रक्रियाओं में

किया जाता है।

हीलियम गैस को लंबे समय तक स्टोर करना मुश्किल होता है। तरल बनाने के बाद भी यह धीरे-धीरे उड़ जाती है और करीब 45 दिन में काफी खत्म हो जाती है। ऐसे में सप्लाई रुकने पर संकट तेजी से बढ़ जाता है। 12 मार्च के बाद कतर में गैस प्रोसेसिंग रुकने से हर महीने करीब 5.2 मिलियन क्यूबिक मीटर हीलियम बाजार तक नहीं पहुंच पा रही है। इससे कीमतें दोगुनी हो गई हैं।

साल 2025 में दुनिया में लगभग 190 मिलियन क्यूबिक मीटर हीलियम का उत्पादन हुआ।

  • अमेरिका ने 81 मिलियन क्यूबिक मीटर
  • कतर ने 63 मिलियन क्यूबिक मीटर

उत्पादन किया। इससे साफ है कि दोनों देश हीलियम बाजार को प्रभावित करते हैं।

AI और रक्षा उद्योग पर पड़ सकता है असर

अक्सर माना जाता है कि AI केवल सॉफ्टवेयर पर आधारित है, लेकिन असल में यह भारी उद्योगों पर निर्भर करता है।

AI के लिए जरूरी

  • सेमीकंडक्टर
  • डेटा सेंटर
  • कंप्यूटिंग सिस्टम

इन सबके निर्माण में हीलियम का इस्तेमाल होता है।

हीलियम की कमी का असर

  • चिप उत्पादन पर
  • AI विकास पर
  • मिसाइल और विमान निर्माण पर
  • सैटेलाइट निर्माण पर
  • रक्षा उपकरण उत्पादन पर

पड़ सकता है।

सल्फर संकट से बढ़ी चिंता

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से सल्फर का व्यापार भी प्रभावित हुआ है। दुनिया के करीब 50 प्रतिशत सल्फर की आवाजाही इसी मार्ग से होती है।

सल्फर की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अमेरिकी सल्फर की कीमत 165 प्रतिशत तक बढ़कर 650 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से ऊपर पहुंच गई है।

सल्फर का उपयोग

  • सल्फ्यूरिक एसिड बनाने में
  • बैटरी उत्पादन में
  • तांबा निकालने में
  • सेमीकंडक्टर निर्माण में

किया जाता है।

तांबा, निकल और कोबाल्ट पर भी खतरा

सल्फ्यूरिक एसिड का इस्तेमाल नीचे दिए गए चीज़ों में होता है

  • तांबा निकालने में
  • निकल उत्पादन में
  • कोबाल्ट उत्पादन में

ये धातुएं जरूरी हैं

  • जेट इंजन
  • ड्रोन
  • लिथियम आयन बैटरी
  • सैन्य इलेक्ट्रॉनिक्स

के लिए।

सल्फर की कमी से रक्षा उत्पादन और डिजिटल सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

एल्यूमिनियम बाजार भी प्रभावित

एल्यूमिनियम का इस्तेमाल नीचे दिए गए चीज़ों में होते है

  • विमान
  • बख्तरबंद वाहन
  • नौसैनिक उपकरण
  • गोला-बारूद
    ईरान तनाव के बाद एल्यूमिनियम की कीमत में करीब 10 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
    खाड़ी देशों का वैश्विक एल्यूमिनियम उत्पादन में लगभग 9 प्रतिशत हिस्सा है। ईरानी हमलों से
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • बहरीन

के एल्यूमिनियम उत्पादन पर असर पड़ा है। लंदन मेटल एक्सचेंज में एल्यूमिनियम की कीमत बढ़कर 3,492 पाउंड प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। यह चार साल का उच्चतम स्तर है।

वैश्विक सप्लाई पर बड़ा खतरा

खाड़ी देश अपने कुल एल्यूमिनियम उत्पादन का करीब 75 प्रतिशत निर्यात करते हैं।
हर साल

  • यूरोप लगभग 1.2 मिलियन टन
  • अमेरिका करीब 3.4 मिलियन टन

एल्यूमिनियम आयात करता है।
चीन वैश्विक उत्पादन में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, लेकिन वह अधिकांश उत्पादन खुद उपयोग कर लेता है।
ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से गैर-चीनी एल्यूमिनियम सप्लाई का करीब एक चौथाई हिस्सा खतरे में पड़ सकता है।

दुनिया के लिए बढ़ता खतरा

होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर

  • तेल और गैस
  • AI उद्योग
  • मेडिकल उपकरण
  • रक्षा उद्योग
  • इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग

पर पड़ सकता है। अगर यह संकट लंबा चलता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है और कई उद्योगों की रफ्तार धीमी हो सकती है।

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